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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   There are many more in the foothills of Baraiya Karaara

तराई की तलहटी में कई और भी हैं बरुआ कुठारा

Sun, 21 May 2017 10:34 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Sun, 21 May 2017 10:34 PM IST
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 बराही रेंज में अभी न जाने कितने बरुआ कुठारा हैं, जहां से वन विभाग को अपनी जमीन पर कब्जा लेना टेढ़ी खीर है। वन व राजस्व विभाग में आपसी तालमेल न होने से अतिक्रमण नासूर बन चुका है। टाईगर रिजर्व के बरुआ कुठारा जंगल की जमीन के मामले में अतिक्रमणकारी हाईकोर्ट में हार चुके हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पुलिस व पीएसी की मदद से एसडीओ के नेतृत्व में वन विभाग अपना कब्जा ले। मगर यहां तो तराई की तलहटी में बराही वन क्षेत्र में न जाने कितने बरुआ कुठारा बन गए हैं। जहां जंगल की जमीन पर लोगों का न केवल अवैध कब्जा है, बल्कि बाकायदा वर्षों से खेती कर रहे हैं। कइयों ने अपने घर भी बना रखे हैं। बूंदी भूड़ व बंदरभोज में 170 अतिक्रमणकारियों से वन विभाग मुकदमा लड़ रहा है, लेकिन अभी तक एसडीएम कोर्ट से कोई निर्णय नहीं हो सका। दो वर्ष पूर्व नौजल्हा नंबर दो के 39 परिवारों की जमीन शारदा नदी में कट गई। इन परिवारों ने बेहिचक नौजल्हा में वन भूमि पर कब्जा कर लिया। वन विभाग वाले अवैध कब्जा हटाने गए तो महिलाओं ने लाठी, डंडे लेकर हमला कर दिया था। मजबूर होकर वन विभाग ने 39 परिवारों के खिलाफ वन भूमि पर अवैध कब्जा करने का विभागीय केस काटना पड़ा और मुकदमे शुरू किए। 
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दरअसल वन भूमि पर कब्जा होने की रिपोर्ट शासन तक भेजना पड़ती है। ऐसे में अवैध कब्जे होने से वन विभाग की गर्दन फंसती है। ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, रमनगरा, गुन्हान, वीरखेड़ा, राजपुर समेत कई ऐसे गांव हैं, जहां सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमणकारी कब्जेदार हैं। वहीं पिछले एक दशक से वन विभाग मूक दर्शक बना हुआ है। वन विभाग ने संयुक्त सीमांकन की बात कहकर न तो अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई विभागीय केस काटा और न ही जमीन खाली कराई। अब बरुआ कुठारा की कार्रवाई के बाद शेष गांवों के वन भूमि के अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है, लेकिन वन महकमा उस भूमि को खाली करा पाएगा या नहीं, यह आने वाले समय में ही पता चल सकेगा। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ द्वारा एंटी भू-माफिया अभियान के तहत सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद वन विभाग का हौसला बढ़ता दिखाई दे रहा है। मगर अन्य विभागों से आपसी तालमेल यदि कोई कमी रह गई तो यह अभियान पूर्व वर्षों की तरह हवा हवाई ही साबित होगा।
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