{"_id":"66da0ae4c93f07dd2f076fa1","slug":"the-victims-of-erosion-of-sharda-river-celebrated-black-day-for-not-getting-compensation-pilibhit-news-c-121-1-pbt1008-122035-2024-09-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pilibhit News: शारदा नदी के कटान पीड़ितों ने मुआवजा न मिलने पर मनाया काला दिवस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pilibhit News: शारदा नदी के कटान पीड़ितों ने मुआवजा न मिलने पर मनाया काला दिवस
विज्ञापन
पूरनपुर के गांव खिरकिया बरगदिया में काला दिवस मनाते ग्रामीण।स्रोत:ग्रामीण
पूरनपुर। शारदा नदी के कटान से हुए नुकसान का सर्वे न होने और मुआवजा न मिलने के विरोध में खिरकिया बरगदिया के लोगों ने बृहस्पतिवार को काला दिवस मनाया। इस दौरान हाथों में काली पट्टियां बांधकर धरना दिया। वहीं शुक्रवार से समस्याओं का समाधान न होने तक बेमियादी धरना प्रदर्शन शुरू करने का निर्णय लिया गया।
नदी के कटान से पीड़ित लोगों ने गांव के धार्मिक स्थल परिसर में बैठकर सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक धरना दिया और काला दिवस मनाया। लोगों की मांग है कि कटान से हुए नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाया जाए, बाढ़ से बचाव के लिए तटबंध बनवाया जाए। इस दौरान तय किया गया कि शुक्रवार से समस्याओं का समाधान न होने तक बेमियादी धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। धरने पर प्रतिदिन 11 लोग बैठेंगे। जबकि उनके समर्थन में अन्य लोग भी धरना देंगे।
बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर कुछ कम होने पर कई ग्रामीणों ने नदी किनारे पहुंचकर सामूहिक श्रमदान भी किया। इसमें बांस, बल्ली, झाड़ियों को तारों से बांधा, मिट्टी भरे कट्टों को नदी किनारे लगाया। ताकि कटान रुक सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
नदी के कटान से पीड़ित लोगों ने गांव के धार्मिक स्थल परिसर में बैठकर सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक धरना दिया और काला दिवस मनाया। लोगों की मांग है कि कटान से हुए नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाया जाए, बाढ़ से बचाव के लिए तटबंध बनवाया जाए। इस दौरान तय किया गया कि शुक्रवार से समस्याओं का समाधान न होने तक बेमियादी धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। धरने पर प्रतिदिन 11 लोग बैठेंगे। जबकि उनके समर्थन में अन्य लोग भी धरना देंगे।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर कुछ कम होने पर कई ग्रामीणों ने नदी किनारे पहुंचकर सामूहिक श्रमदान भी किया। इसमें बांस, बल्ली, झाड़ियों को तारों से बांधा, मिट्टी भरे कट्टों को नदी किनारे लगाया। ताकि कटान रुक सके।
विज्ञापन