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Pilibhit News: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं गूंज पा रहीं किलकारियां
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पीलीभीत। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए भले ही स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक प्रसव की सुविधाएं शुरू की हो, लेकिन शहर की प्रसूताओं को स्टाफ व जागरूकता की कमी के चलते अपेक्षित सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालात यह हैं कि पिछले एक वर्ष में शहर के दो अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक भी संस्थागत प्रसव नहीं हो सके। इससे आशा कार्यकर्ताओं की जागरूकता गतिविधियों और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिले में कुल पांच अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं, जिनमें से तीन केंद्र शहर के बागगुलशेर खां, पुराना अस्पताल और जोशी टोला में स्थित हैं। इन केंद्रों पर सामान्य प्रसव कराने के लिए प्रसव कक्ष सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद अगस्त 2025 से अब तक तीन में से दो केंद्रों पर एक भी गर्भवती महिला का प्रसव नहीं कराया गया।
संबंधित केंद्रों की स्टाफ नर्स, एएनएम और आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर सुरक्षित प्रसव के लिए प्रेरित करने में सफल नहीं हो सकीं। नतीजतन, अधिकांश महिलाएं जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों का रुख कर रही हैं। अगर क्षेत्रों में कार्य कर रहीं आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं से नियमित संपर्क, समय पर काउंसिलिंग और सरकारी सुविधाओं की जानकारी दें तो अर्बन पीएचसी में भी संस्थागत प्रसव बढ़ाए जा सकते हैं।
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वहीं, उपस्थित स्टाफ की मानें तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर इमरजेंसी में जितना स्टाफ चाहिए उतनी उपस्थित नहीं है। ऐसे में प्रसव करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। संवाद
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जिले में कुल पांच अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं, जिनमें से तीन केंद्र शहर के बागगुलशेर खां, पुराना अस्पताल और जोशी टोला में स्थित हैं। इन केंद्रों पर सामान्य प्रसव कराने के लिए प्रसव कक्ष सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद अगस्त 2025 से अब तक तीन में से दो केंद्रों पर एक भी गर्भवती महिला का प्रसव नहीं कराया गया।
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संबंधित केंद्रों की स्टाफ नर्स, एएनएम और आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर सुरक्षित प्रसव के लिए प्रेरित करने में सफल नहीं हो सकीं। नतीजतन, अधिकांश महिलाएं जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों का रुख कर रही हैं। अगर क्षेत्रों में कार्य कर रहीं आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं से नियमित संपर्क, समय पर काउंसिलिंग और सरकारी सुविधाओं की जानकारी दें तो अर्बन पीएचसी में भी संस्थागत प्रसव बढ़ाए जा सकते हैं।
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वहीं, उपस्थित स्टाफ की मानें तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर इमरजेंसी में जितना स्टाफ चाहिए उतनी उपस्थित नहीं है। ऐसे में प्रसव करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। संवाद