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सामाजिक वानिकी ने खेतों में शुरू की गड्ढों की खुदाई

Wed, 20 Jan 2016 11:13 PM IST
पीलीभीत
पीलीभीत Updated Wed, 20 Jan 2016 11:13 PM IST
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The social forestry farms Launched in the excavation pits
कंजिया सिंहपुर के ग्रामीणों ने जिस दलदली भूमि को वर्षों पूर्व खेती योग्य बनाया था, सामाजिक वानिकी के डिप्टी रेंजर वनकर्मियों के साथ उसी भूमि पर गड्ढे खोदने पहुंच गए। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई का जमकर विरोध किया। बता दें कि इस मामले में हाईकोर्ट से स्टे चल रहा है।
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सिंचाई विभाग ने शारदा डैम के सामने पड़ने वाली करीब 1171 एकड़ भूमि वर्ष 1971 में राजस्व विभाग को ट्रांसफर की थी। उक्त भूमि भूमिहीनों को दी जानी थी। वर्ष 2010 में तत्कालीन डीएम ने उस भूमि को राज्य सरकार द्वारा प्रबंधक राजस्व विभाग कलक्टर पीलीभीत के नाम नान जेडए खतौनी में दर्ज करा दिया था। उसके बाद तत्कालीन डीएम कौशलराज शर्मा ने सभी ग्राम पंचायतों में एक साथ मीटिंग बुलाकर पट्टा आवंटन की प्रक्रिया शुरू करा दी थी, जिसमें कंजिया सिंहपुर के 152 परिवारों के लिए 192 एकड़ रकवा पट्टा आवंटन में शामिल किया गया था, लेकिन उसी बीच बसपा सरकार के चलते कुछ दलित परिवारों ने समूची 1171 एकड़ भूमि पर हाईकोर्ट से स्टेे ले लिया, जिसके बाद से आज तक यह स्टे चला आ रहा है। उधर, मंगलवार को सामाजिक वानिकी के डिप्टी रेंजर आरिफ जमाल वनकर्मियों के साथ कंजिया सिंहपुर पहुंचे। उन्होंने राधेश्याम, पाचू विश्वास, संजीव सरकार के खेतों में गड्ढों की खुदाई शुरू करा दी। मामले की जानकारी पर ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर इसका जमकर विरोध किया। ग्रामीणों ने बताया कि उनको जेल भेजने की धमकी दी जा रही है।
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सूचना मिलने पर ग्राम प्रधानपति शंकर राय और सामाजिक वानिकी रेंजर हसीन अहमद भी मौके पर पहुंच गए। वनकर्मियों का कहना था कि उनको सिंचाई विभाग ने पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदने को कहा है, जबकि ग्राम प्रधान का कहना था कि शारदा डैम में मात्र 600 फिट चौडाई में ही शेष भूमि बची है। शेष भूमि ग्राम समाज के नाम दर्ज हो चुकी है। इस पर स्टे भी चल रहा है। इसलिए पौधारोपण के लिए गड्ढे की खुदाई न करें। इस पर उनके पट्टे की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। मात्र स्टे की वजह से उनका दाखिल खारिज नहीं हो पाया है।
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हमें सिंचाई विभाग ने यहां पर कुछ शर्तों के आधार पर वृक्षारोपण करने के लिए जमीन दिखाई थी, इसलिए गड्ढे खुदवाए जा रहे हैं। अब सिंचाई विभाग से स्थिति की रिपोर्ट मांगी की गई।
- हसीन अहमद, रेंजर सामाजिक वानिकी पूरनपुर
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