फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   The branch of the tree gave support, then two people came as messengers and saved us

पेड़ की डाल ने दिया सहारा फिर दूत बनकर आए दो लोग और हमें बचा लिया

Thu, 21 Oct 2021 01:20 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 21 Oct 2021 01:20 AM IST
विज्ञापन
The branch of the tree gave support, then two people came as messengers and saved us
बाढ़ से सुरक्षित लौटे घटना की जानकारी देते सपन मंडल और कुलवीर सिंह। - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। हम दोनों ट्रैक्टर की छतरी पर बैठकर सोच रहे थे कि पानी बढ़ता रहा तो बह जाएंगे। इतने में एक पेड़ नजदीक से गुजरा मैं उसकी डाल पकड़कर बहने लगा। भोर में देखा कि दो लोग नाव लेकर आ गए। वे मुझे गोरखडिब्बी गांव ले गए। यही लोग मेरे दूसरे साथी को भी वहां से निकाल लाए। फिर सुबह हेलिकॉप्टर देखा तो जान में जान आई। यह किस्सा सुनाया नौ घंटे बाढ़ में फंसे कुलवीर और सपन मंडल ने। वायु सेना के हेलिकॉप्टर ने इन्हें रेस्क्यू किया।
विज्ञापन

रमनगरा निवासी कुलवीर सिंह और मढ़ैया लालपुर निवासी सपन मंडल ने बताया कि वे अपने-अपने गांव से सोमवार सुबह आठ बजे शारदा पार ढकिया क्षेत्र में स्थित खेतों में धान की कटाई के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली से गए थे। सोमवार रात में दोनों सोए हुए थे। रात 11 बजे से पानी खेतों के चारों तरफ आना शुरू हो गया। देखते-देखते पानी इतना बढ़ा कि फसल बह गई और ट्रैक्टर ट्रॉली भी डूब गई। जान बचाने के लिए पूरी रात ट्रैक्टर छतरी पर बैठना पड़ा। छतरी पर बैठे-बैठे देख रहे थे कि पानी बढ़ रहा है। हम ट्रैक्टर समेत बह सकते हैं। डर में एक-एक पल बीत रहा था। घर में फोन कर रहे थे लेकिन कोई बचाव के लिए नहीं आ पा रहा था। सपन ने बताया कि मंगलवार दोपहर दो बजे के करीब उसे एक पेड़ बहते हुए दिखा। उसने ट्रैक्टर के करीब से गुजरे पेड़ की डाल को पकड़ लिया। तेज बहाव में बहने लगा कुछ ही दूरी पर गोरख डिब्बी गांव के नजदीक पहुंच गया। भोर के वक्त गांव के कुछ लोगों ने उसे बहते हुए देखा। दो लोग खुद की जान खतरे में डालकर बहते पानी में नाव लेकर आ गए। इसके बाद उसको पानी से बाहर निकाला। अपने गांव ले आए। उनका गांव भी पूरी तरह जलमग्न हो चुका था।
विज्ञापन

मेरे कहने पर गांव के लोग एक बार फिर नाव लेकर ट्रैक्टर तक आए। इसके बाद कुलवीर को नाव में बैठाकर गोरख डिब्बी गांव पहुंचे। बुधवार सुबह आठ बजे उन्हें अन्य लोगों के साथ हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया। कुलवीर और सपन ने बताया कि सोमवार रात 11 बजे से बुधवार सुुबह आठ बजे तक पूरा समय पानी में ही बीता। अगर गांव वाले न आते और प्रशासन के रेस्क्यू का इंतजार करते रहते तो बच पाना मुश्किल होता। क्योंकि ट्रैक्टर लगभग डूब ही गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

जब मैंने पेड़ की डाल को पकड़ा तो यही सोचा कि ट्रैक्टर बहेगा तो भी जान जाएगी। डाल पकड़कर बहूंगा तो हो सकता है आगे कहीं सहारा मिला जाए। तेज बहाव में सुध खो बैठा था लेकिन होश तब आया जब कुछ लोग मुझे सहारा देने के लिए नाव लेकर आ गए। मैं उन दो लोगों के जरिये बच गया। इसके बाद गोरख डिब्बी गांव में मंगलवार की पूरी रात गुजारी। सुबह हेलिकॉप्टर आया तो जान में जान आई।

- सपन मंडल
सोमवार सुबह आठ बजे खेत पर गया था। दिन भर धान की कटाई कराई। रात तक 20 एकड़ खेत में धान कट गया था। रात में 11 बजे से पानी आना शुरू हो गया। पानी भोर में तीन बजे तक इतना बढ़ गया था कि ट्रैक्टर की छत पर बैठना पड़ा। ऊपर से बारिश हो रही थी और नीचे बाढ़ का पानी बह रहा था। घर फोन लगा रहा था लेकिन बाढ़ का पानी इतना ज्यादा था कि बचाने के लिए कोई नहीं आ पा रहा था। सपन मंडल ने पेड़ की एक डाल पकड़ पानी में कूद गया। उसने गांव वालों की मदद से बचाया और फिर वह भी गोरख डिब्बी गांव तक पहुंचे।
- कुलवीर सिंह
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed