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बाढ़ थमते ही शुरू हो गए अधूरे बाढ़ नियंत्रण कार्य
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Tue, 01 Nov 2016 10:25 PM IST
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बाढ़ थमते ही शुरू हो गए अधूरे बाढ़ नियंत्रण कार्य
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
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शारदा नदी की बाढ़ थमने के बाद किसी नए प्रोजेक्ट पर तो नहीं, लेकिन नौजल्हा नंबर दो में नदी के दाएं किनारे पर बन रही बाढ़ नियंत्रण योजना के शेष बचे प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू कराया गया है। बाढ़ खंड को यह कार्य फरवरी तक पूरा करना है।
शारदा नदी पर तटबंध बनाने की कई सरकारें घोषणा करती आ रहीं थी, लेकिन उस पर कोई कार्य आगे नहीं बढ़ सका था। तत्कालीन भाजपा सरकार में सिंचाई मंत्री रहे ओमप्रकाश सिंह ने उस दौरान विधानसभा में पूर्व विधायक गोपाल कृष्ण सक्सेना द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में यह कहा था कि शारदा बैडेड नेचर की है। ऐसे में नदी के किनारे बसी आबादी को कहीं और बसाया जाए। उन्होंने सरकार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में नेपाल में जनपद में प्रवेश करने से लेकर लखीमपुर तक शारदा पर तटबंध बनाने का न केवल प्रोजेक्ट मांग लिया था, बल्कि उसकी समय सीमा भी निर्धारित कर दी थी। यह जिम्मेदारी शारदा सागर खंड के अधिशासी अभियंता को सौंपी गई थी। चूंकि इतने लंबे क्षेत्र में तटबंध बनाने को सर्वे में समय लगना स्वाभाविक था, इसलिए निर्धारित अल्प अवधि में प्रोजेक्ट न बनाकर देने के चलते शारदा सागर के अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया था, लेकिन यह सब मात्र चुनावी स्टंट ही साबित हुआ।
प्रदेश सरकार ने बरसात से पूर्व बाढ़ खंड को नौजल्हा नंबर दो में नोमेंस लैंड से लेकर सनेड़ी तटबंध तक दांये किनारे पर जियो ट्यूब का मार्जनल बांध व ठोकरें बनाने को बजट दिया था। सिंचाई विभाग की जनपद में जियो ट्यूब एवं जियो बैग से मार्जनल बांध बनाने यह पहली परियोजना है। इसमें बरसात से पूर्व तेजी से कार्य शुरू हुआ, लेकिन फिर भी कार्य पूरा नहीं हो सका। इन सबके बावजूद इस बांध के बनने से शारदा नदी का कटान आबादी व डैम की ओर रुक गया था। इधर अब बाढ़ खंड ने शेष बचे कार्य को शुरू कराकर फरवरी तक कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। जिसके तहत नोमेंस लैंड से सटे इलाके में जियो व एसी बैग से प्लेटफार्म तैयार करने के साथ मार्जनल बांध के शेष बचे भाग को ऊंचा किया जाना है।
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शारदा नदी पर तटबंध बनाने की कई सरकारें घोषणा करती आ रहीं थी, लेकिन उस पर कोई कार्य आगे नहीं बढ़ सका था। तत्कालीन भाजपा सरकार में सिंचाई मंत्री रहे ओमप्रकाश सिंह ने उस दौरान विधानसभा में पूर्व विधायक गोपाल कृष्ण सक्सेना द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में यह कहा था कि शारदा बैडेड नेचर की है। ऐसे में नदी के किनारे बसी आबादी को कहीं और बसाया जाए। उन्होंने सरकार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में नेपाल में जनपद में प्रवेश करने से लेकर लखीमपुर तक शारदा पर तटबंध बनाने का न केवल प्रोजेक्ट मांग लिया था, बल्कि उसकी समय सीमा भी निर्धारित कर दी थी। यह जिम्मेदारी शारदा सागर खंड के अधिशासी अभियंता को सौंपी गई थी। चूंकि इतने लंबे क्षेत्र में तटबंध बनाने को सर्वे में समय लगना स्वाभाविक था, इसलिए निर्धारित अल्प अवधि में प्रोजेक्ट न बनाकर देने के चलते शारदा सागर के अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया था, लेकिन यह सब मात्र चुनावी स्टंट ही साबित हुआ।
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प्रदेश सरकार ने बरसात से पूर्व बाढ़ खंड को नौजल्हा नंबर दो में नोमेंस लैंड से लेकर सनेड़ी तटबंध तक दांये किनारे पर जियो ट्यूब का मार्जनल बांध व ठोकरें बनाने को बजट दिया था। सिंचाई विभाग की जनपद में जियो ट्यूब एवं जियो बैग से मार्जनल बांध बनाने यह पहली परियोजना है। इसमें बरसात से पूर्व तेजी से कार्य शुरू हुआ, लेकिन फिर भी कार्य पूरा नहीं हो सका। इन सबके बावजूद इस बांध के बनने से शारदा नदी का कटान आबादी व डैम की ओर रुक गया था। इधर अब बाढ़ खंड ने शेष बचे कार्य को शुरू कराकर फरवरी तक कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। जिसके तहत नोमेंस लैंड से सटे इलाके में जियो व एसी बैग से प्लेटफार्म तैयार करने के साथ मार्जनल बांध के शेष बचे भाग को ऊंचा किया जाना है।
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