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शीतलहर से कांपी तराई, पारा पांच डिग्री सेल्सियस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,pilibhit
Updated Wed, 03 Jan 2018 06:49 PM IST
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girls in cold
पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी क्षेत्र में तीसरे दिन भी देखने को मिला। बर्फीली हवाओं के साथ दिनभर मौसम में गलन बनी रही। नए साल के तीसरे दिन भी कड़ाके की ठंड से लोग कांप उठे। बुधवार को न्यूनतम पारा पांच डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। जिस कारण लोगों को घरों से निकलने में काफी दिक्कतें आईं। गरीब वर्ग के लोगों पर सबसे ज्यादा ठंड की मार पड़ रही है। मंगलवार को लोगों को दिन में थोड़ी देर सूर्य देवता के दर्शन होने से राहत मिली। वहीं, बुधवार को दिनभर गलन भरी सर्दी से लोग ठिठुरते रहे।
बुधवार सुबह कोहरे की धुंध कम थी, लेकिन बर्फीली हवाओं के साथ मौसम में गलन बरकरार है। नौकरी पेशा वाले ठंड में किसी तरह घर से बाहर निकले, लेकिन गंतव्य तक पहुंचे में उनको काफी दिक्कतें हुई। थ्री व्हीलर और दो पहिया वाहन चालक भी ठंड से कांपते दिखाई दिए। हाथ में दस्ताने पहनने पर गलन भरी ठंड से राहत नहीं मिल सकी। ठंड का असर बाजरों में भी देखने को मिला। कपड़ों के बाजार में सामान्य दिनों के मुकाबले भीड़ कम दिखी। दिन ढलते ही शाम को लोग घरों में कैद होने लगे। सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। रोड पर निकलने वालों की आवाजाही कम दिखाई दी।
नगरपालिका ने अलाव के नाम पर की खानापूर्ति
शहर के प्रमुख चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की हकीकत अमर उजाला ने उजागर की तो पालिका प्रशासन जागा। मंगलवार को शहर के कुछ चौराहों पर अलाव की व्यवस्था सिर्फ खानापूर्ति भरी दिखाई दी। रेलवे स्टेशन और छतरी चौराहों पर पालिका की ओर से अलाव की व्यवस्था करने के नाम पर लकड़ी के बड़े-बड़े लट्ठे जलाने को डाल दिए गए। लकड़ी के टुकड़ों को जलाने के लिए स्थानीय लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। रेलवे स्टेशन पर सुबह लोग कुल्हाड़ी से लकड़ी के लट्ठे के टुकड़े करते दिखाई दिए पूछने पर बताया कि दो दिन से किराए पर कुल्हाड़ी लेकर लकड़ी के टुकड़े किए जा रहे हैं। करीब दो सौ रुपये का केरोसीन और मोबिल ऑयल खर्च कर चुके हैं फिर भी लकड़ी का लट्ठा नहीं जला। आने वालों दिनों में अगर पालिका की ओर से अलाव की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो गरीब वर्ग के लोगों की समस्या ओर बढ़ जाएगी।
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रैन बसेरा भी सिर्फ नाम का
रेलवे स्टेेशन रोड स्थित रैन बसेरा में प्रशासन की ओर से की गई ठहरने की व्यवस्था चौपट दिखाई दी। जिस धर्मशाला में रैन बसेरा बनाया गया है वहां आवारा कुत्ते घूमते दिखाई दिए। गेट पर गंदगी का ढेर लगा था। कमरों में जाकर देखा तो रुकने की कोई खास इंतजाम नहीं था। स्थानीय कर्मचारी से अलाव के बारे में पूछा तो बताया गया कि पालिका प्रशासन की ओर से शाम को सिर्फ एक टाइम लकड़ी भेजी जाती है। दयनीय स्थिति होने के कारण रैन बसेरा में ठहरा हुआ कोई भी नहीं दिखा।
ठंड से हाल बेहाल, अलाव का पता नहीं
अमरैयाकलां। लगातार तीसरे दिन सर्दी का सितम तराईवासियों की मुसीबत बना है। प्रशासन ठंड से बचाव के पुख्ता बंदोबस्त के दावे कर रहा है, लेकिन ग्रामीण इलाकों की बात करें तो अब तक अलाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। प्रधान और सचिव अलाव को लेकर अनदेखी करने मेें जुटे हैं। सर्दी बढ़ने के बावजूद ग्राम पंचायत सुखदासपुर, खाता, अमरैयाकलां, लोधीपुर, तकियादीनारपुर, महादिया, रम्पुराफकीरे, सबलपुर, ककरौआ, देवीपुर आदि में अलाव जलना शुरू नहीं हुए हैं।
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बुधवार सुबह कोहरे की धुंध कम थी, लेकिन बर्फीली हवाओं के साथ मौसम में गलन बरकरार है। नौकरी पेशा वाले ठंड में किसी तरह घर से बाहर निकले, लेकिन गंतव्य तक पहुंचे में उनको काफी दिक्कतें हुई। थ्री व्हीलर और दो पहिया वाहन चालक भी ठंड से कांपते दिखाई दिए। हाथ में दस्ताने पहनने पर गलन भरी ठंड से राहत नहीं मिल सकी। ठंड का असर बाजरों में भी देखने को मिला। कपड़ों के बाजार में सामान्य दिनों के मुकाबले भीड़ कम दिखी। दिन ढलते ही शाम को लोग घरों में कैद होने लगे। सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। रोड पर निकलने वालों की आवाजाही कम दिखाई दी।
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नगरपालिका ने अलाव के नाम पर की खानापूर्ति
शहर के प्रमुख चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की हकीकत अमर उजाला ने उजागर की तो पालिका प्रशासन जागा। मंगलवार को शहर के कुछ चौराहों पर अलाव की व्यवस्था सिर्फ खानापूर्ति भरी दिखाई दी। रेलवे स्टेशन और छतरी चौराहों पर पालिका की ओर से अलाव की व्यवस्था करने के नाम पर लकड़ी के बड़े-बड़े लट्ठे जलाने को डाल दिए गए। लकड़ी के टुकड़ों को जलाने के लिए स्थानीय लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। रेलवे स्टेशन पर सुबह लोग कुल्हाड़ी से लकड़ी के लट्ठे के टुकड़े करते दिखाई दिए पूछने पर बताया कि दो दिन से किराए पर कुल्हाड़ी लेकर लकड़ी के टुकड़े किए जा रहे हैं। करीब दो सौ रुपये का केरोसीन और मोबिल ऑयल खर्च कर चुके हैं फिर भी लकड़ी का लट्ठा नहीं जला। आने वालों दिनों में अगर पालिका की ओर से अलाव की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो गरीब वर्ग के लोगों की समस्या ओर बढ़ जाएगी।
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रैन बसेरा भी सिर्फ नाम का
रेलवे स्टेेशन रोड स्थित रैन बसेरा में प्रशासन की ओर से की गई ठहरने की व्यवस्था चौपट दिखाई दी। जिस धर्मशाला में रैन बसेरा बनाया गया है वहां आवारा कुत्ते घूमते दिखाई दिए। गेट पर गंदगी का ढेर लगा था। कमरों में जाकर देखा तो रुकने की कोई खास इंतजाम नहीं था। स्थानीय कर्मचारी से अलाव के बारे में पूछा तो बताया गया कि पालिका प्रशासन की ओर से शाम को सिर्फ एक टाइम लकड़ी भेजी जाती है। दयनीय स्थिति होने के कारण रैन बसेरा में ठहरा हुआ कोई भी नहीं दिखा।
ठंड से हाल बेहाल, अलाव का पता नहीं
अमरैयाकलां। लगातार तीसरे दिन सर्दी का सितम तराईवासियों की मुसीबत बना है। प्रशासन ठंड से बचाव के पुख्ता बंदोबस्त के दावे कर रहा है, लेकिन ग्रामीण इलाकों की बात करें तो अब तक अलाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। प्रधान और सचिव अलाव को लेकर अनदेखी करने मेें जुटे हैं। सर्दी बढ़ने के बावजूद ग्राम पंचायत सुखदासपुर, खाता, अमरैयाकलां, लोधीपुर, तकियादीनारपुर, महादिया, रम्पुराफकीरे, सबलपुर, ककरौआ, देवीपुर आदि में अलाव जलना शुरू नहीं हुए हैं।