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योगी जी! दो साल बीत गए....कहां गया टाइगर सफारी देने का वादा

Fri, 03 Jan 2020 01:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jan 2020 01:34 AM IST
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पीलीभीत। टाइगर रिजर्व में यदि इटावा की तर्ज पर टाइगर सफारी बन जाता तो बाहर से आने वाले पर्यटकों को आसानी से न केवल बाघ समेत अन्य जानवर देखने को मिलते बल्कि मैदानी क्षेत्रों में पकड़े गए बाघों को टाइगर सफारी में ही छोड़कर उन्हें सुरक्षित भी रखा जा सकता था। अभी तो टाइगर रिजर्व के जंगल से बाघ निकलकर आसपास के गांवों में घुसकर इंसान और जानवरों पर हमला कर रहे हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद अपने भ्रमण के दौरान टाइगर सफारी बनाने का वादा किया था। सीएम की घोषणा पर लंबा समय बीतने के बाद भी कोई काम नहीं हो सका। ऐसा तब है जब शासन ने टाइगर सफारी के लिए भेजे गए प्रस्ताव के बाद पांच सदस्यीय कमेटी का भी गठन कर दिया था। यदि यहां टाइगर सफारी बन गया होती तो पर्यटन के रूप में पीलीभीत का नाम देश और दुनिया के नक्शे पर दर्ज हो चुका होता। पीलीभीत में 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में जंगल है। नौ जून 2014 को इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। इसके बाद से यहां बाघ और तेंदुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इधर, पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज स्थित कोर एरिया में इको टूरिज्म स्पॉट चूका बीच स्थापित किया गया है। टाइगर रिजर्व में बाघों की बेहतर मौजूदगी के बाद भी पर्यटन सत्र के दौरान पर्यटकों को बाघ मुश्किल से ही दिखते हैं। बाघ देखने आने वाले अधिकांश पर्यटकों को मायूस होकर ही लौटना पड़ रहा है।
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वन्यजीवों की सुरक्षा और संवर्धन के मामले में आगे रहने वाले तत्कालीन वन संरक्षक वीके सिंह ने जब बरेली का चार्ज लिया तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व से बाहर हमलावर हो रहे बाघों को खुले क्षेत्र में सुरक्षित रखने के लिए टाइगर सफारी की मांग शासन स्तर पर भेजी। शासन से ही झंडी मिलने के बाद टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। मकसद यह था कि एक तो पर्यटकों को आसानी से बाघ देखने को मिल जाते। टाइगर सफारी के चारों तरफ तार फेंसिंग कराए जाने से बाघ उसमें स्वच्छंद तरीके से घूम सकते थे। यदि कोई बाघ आबादी क्षेत्र में पकड़ा जाता तो उसे पहले रेस्क्यू सेंटर और बाद में उसे टाइगर सफारी में ले जाकर छोड़ दिया जाता।
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टाइगर रिजर्व से जब प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया तो शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए टाइगर सफारी की कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए उस दौरान निदेशक प्रोजेक्ट टाइगर अजय द्विवेदी के नेतृत्व में कमेटी गठित की गई थी। इसमें बरेली के तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक अरविंद गुप्ता, वन संरक्षक वीके सिंह, सेवानिवृत प्रमुख मुख्य वन संरक्षक आरएस भदौरिया एवं दुधवा नेशनल पार्क से अनिल कुमार पटेल को इसमें शामिल किया गया था। उस दौरान इसकी पुष्टि स्वयं तत्कालीन वन संरक्षक वीके सिंह ने की थी।
टाइगर सफारी के लिए टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के बरुआ कुठारा क्षेत्र में करीब 110 हेक्टेयर का रकबा जो अवैध अतिक्रमण की चपेट में था, उसको चिह्नित किया गया था। अफसरों ने खुद मौके पर जाकर हकीकत को परखा था। माना जा रहा था कि जल्द ही पीलीभीत को टाइगर सफारी के रूप में नया तोहफा मिल जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 12 नवंबर 2017 को जनपद दौरे पर आए थे। उन्हें पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन अफसरों ने चूका बीच का भी भ्रमण कराया था। यहां मुख्यमंत्री जंगल की हरी-भरी वादियों और चूका बीच की खूबसूरती के कायल हो गए थे। उन्होंने खासी दिलचस्पी को दिखाते जनपद में टाइगर सफारी और रेस्क्यू सेंटर का प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए थे। माना जा रहा था कि प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन इसमें न तो स्थानीय जनप्रतिनिधि और न ही स्थानीय वन अफसरों ने कोई पैरवी की। तबसे यह मामला ठंडे बस्ते में हैं।

टाइगर सफारी प्रोजेक्ट मेरे आने से पहले का है। यह प्रोजेक्ट शासन में लंबित हैं। फिलहाल टाइगर कंजर्वेशन प्लान बनाया जा रहा है। यह ग्लोबल टाइगर फोरम द्वारा तैयार किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में हमने रेस्क्यू सेंटर को शामिल करने की रिक्वेस्ट की है। प्रोजेक्ट बनने के बाद शासन को भेजा जाएगा। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
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