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कोरोना के आगे स्वाइन फ्लू, डेंगू और मलेरिया को भूला स्वास्थ्य विभाग
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पीलीभीत। कोविड-19 के आगे स्वास्थ्य विभाग हर साल गर्मियों में फैलने वाले स्वाइन फ्लू, डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों को भूला बैठा है। हालांकि विभागीय अफसरों का दावा है कि उनकी ओर से फरवरी में ही स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट जारी किया जा चुका है। चिकित्सा विभाग के अफसरों का यह भी कहना है कि कोरोना और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे होते हैं। लिहाजा जो जांच हो रहीं हैं, उसमें ही स्वाइन फ्लू के लक्षणों का पता चल जाता है।
जनपद में पिछले साल डेंगू से लगभग 36 मौतें हुई थी। हालांकि स्वाइन फ्लू और मलेरिया से गत वर्ष कोई मौत नहीं हुई थी। मगर बदलते मौसम में स्वाइन फ्लू, डेंगू या मलेरिया बीमारी कभी भी दस्तक दे सकती हैं। इसके बावजूद कोरोना में व्यस्त स्वास्थ्य विभाग के पास स्वाइन फ्लू, डेंगू और मलेरिया से बचाव के कोई इंतजाम धरातल पर नहीं दिख रहे हैं।
स्वाइन फ्लू को लेकर पहले से ही अलर्ट
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक शासन के निर्देश पर स्वाइन फ्लू को लेकर फरवरी में ही अलर्ट कर दिया गया था। संभावित स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए उसी दौरान जनपद के हर क्षेत्र में 200 वैक्सीन भेजी गई हैं। इसमें सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित किया गया। इसके बाद सभी चिकित्साधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। अस्पतालों में स्वाइन फ्लू से निपटने को पर्याप्त मात्रा में दवाएं भी उपलब्ध करा दी गई थीं।
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मलेरिया से बचाव को इंतजाम का भी दावा
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कोरोना के अलावा मलेरिया रोधी अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके लिए सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लार्वीसाइड दवा उपलब्ध करा दी गई है। इसका छिड़काव किया जा रहा है। इसके साथ फॉगिंग भी चल ही रही है।
डेंगू से बचने के इंतजाम नहीं
डेंगू से गत वर्ष जिले में 36 मौतें हुई थीं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग इन मौतों को डेंगू से न होने की बात कहता रहा था। एक साथ हुई इतनी मौतों के बाद भी इस बार स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से निपटने के इंतजाम नहीं किए हैं।
कारोना वायरस के साथ स्वाइन फ्लू को लेकर भी फरवरी में ही अलर्ट जारी किया गया था। सीएचसी- पीएचसी में में पर्याप्त दवाएं भिजवा दी गई थीं। मलेरियारोधी कार्यक्रम के तहत लार्वीसाइड उपलब्ध कराया गया है। फॉगिंग लगातार हो रही है। फिलहाल अभी तक स्वाइन फ्लू या डेंगू का मामला प्रकाश में नहीं आया है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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जनपद में पिछले साल डेंगू से लगभग 36 मौतें हुई थी। हालांकि स्वाइन फ्लू और मलेरिया से गत वर्ष कोई मौत नहीं हुई थी। मगर बदलते मौसम में स्वाइन फ्लू, डेंगू या मलेरिया बीमारी कभी भी दस्तक दे सकती हैं। इसके बावजूद कोरोना में व्यस्त स्वास्थ्य विभाग के पास स्वाइन फ्लू, डेंगू और मलेरिया से बचाव के कोई इंतजाम धरातल पर नहीं दिख रहे हैं।
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स्वाइन फ्लू को लेकर पहले से ही अलर्ट
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक शासन के निर्देश पर स्वाइन फ्लू को लेकर फरवरी में ही अलर्ट कर दिया गया था। संभावित स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए उसी दौरान जनपद के हर क्षेत्र में 200 वैक्सीन भेजी गई हैं। इसमें सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित किया गया। इसके बाद सभी चिकित्साधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। अस्पतालों में स्वाइन फ्लू से निपटने को पर्याप्त मात्रा में दवाएं भी उपलब्ध करा दी गई थीं।
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मलेरिया से बचाव को इंतजाम का भी दावा
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कोरोना के अलावा मलेरिया रोधी अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके लिए सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लार्वीसाइड दवा उपलब्ध करा दी गई है। इसका छिड़काव किया जा रहा है। इसके साथ फॉगिंग भी चल ही रही है।
डेंगू से बचने के इंतजाम नहीं
डेंगू से गत वर्ष जिले में 36 मौतें हुई थीं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग इन मौतों को डेंगू से न होने की बात कहता रहा था। एक साथ हुई इतनी मौतों के बाद भी इस बार स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से निपटने के इंतजाम नहीं किए हैं।
कारोना वायरस के साथ स्वाइन फ्लू को लेकर भी फरवरी में ही अलर्ट जारी किया गया था। सीएचसी- पीएचसी में में पर्याप्त दवाएं भिजवा दी गई थीं। मलेरियारोधी कार्यक्रम के तहत लार्वीसाइड उपलब्ध कराया गया है। फॉगिंग लगातार हो रही है। फिलहाल अभी तक स्वाइन फ्लू या डेंगू का मामला प्रकाश में नहीं आया है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ