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जंगल किनारे गन्ने की खेती बन रही मुसीबत
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Sun, 05 Mar 2017 11:46 PM IST
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टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्रों में गन्ने की खेती किसानों के साथ अब प्रशासन के लिए भी मुसीबत बनती जा रही है। बाघ एवं वन्यजीव इसे प्राकृतिक वास समझकर छिपे रहते हैं जिससे आए दिन घटनाएं हो रही हैं। इसमें जहां गन्ना विभाग को जंगल से सटे क्षेत्र गन्ने की पर्चियां समय से देने की व्यवस्था करनी होगी वहीं किसानों को भी गन्ने के स्थान पर अन्य फसलों को अपनाना होगा।जंगलों में बाघ का मुख्य वास नरकुल, बेंत एवं खरिया घास माना जाता है। कमोवेश गन्ना भी इससे काफी मिलता जुलता होता है। इन दिनों बड़े पैमाने पर नरकुल एवं खरिया घास काटी जा रही है जिससे बाघों के प्राकृतिक वास नष्ट हो रहे हैं। टाइगर रिजर्व के चारों ओर कोई बाउंड्री अथवा तार फेसिंग न होने के कारण बाघ जंगल से बाहर आकर गन्ने को अपनी शरण स्थली बना रहे हैं। यही कारण है कि आए दिन बाघ की चहलकदमी खेतों में देखी जा रही है। चूंकि गन्ना ऐसी फसल है जिसे एक दिन में एक साथ नहीं काटी जा सकती। मिल की क्षमता के अनुसार विभाग से पर्चियां जारी होती हैं और इसी के आधार पर करीब चार माह तक गन्ने की कटाई हो पाती है। इधर बाघ के हमले की घटनाएं बढ़ने पर किसानों ने गन्ने की पर्चियां प्राथमिकता के आधार पर जारी करने की मांग की है। यदि जिला प्रशासन या गन्ना विभाग ऐसा कर भी देता है तो एक साथ पूरे क्षेत्र का गन्ना कटना मुश्किल है। वहीं जो गन्ना दो तीन माह पहले कट चुका है उसकी पेड़ी भी बढ़कर पुन: समस्या बनेगी। इसके लिए वन विभाग को जंगल के चारों ओर बाउंड्री या तार फेसिंग को प्राथमिकता से कराना होगा वहीं किसानों को भी गन्ने के स्थान पर अन्य फसलों को अपनाना होगा।
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