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कुछ तोड़ा, कुछ जोड़ा, पीलीभीत में फिर बना दीं तीन सीटें
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Mon, 09 Jan 2017 11:03 PM IST
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विधानसभा क्षेत्रों को तोड़ने, जोड़ने और फिर नए क्षेत्रों के गठन का काम पीलीभीत जिले में विधानसभा के सन् 1962 में हुए तीसरे चुनाव में भी जारी रहा। इस जोड़ का नतीजा यह रहा कि पहले चुनाव में जिले में जहां चार सीटें थीं जो दूसरे चुनाव में दो रह गईं और फिर तीसरे चुनाव में तीन हो गईं। तीसरे क्षेत्र का गठन बीसलपुर क्षेत्र को विभाजित कर पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र के रूप में किया गया। इस चुनाव में जिले की तीनों सीटों पर इंडियन नेशनल कांग्रेस के उम्मीदवारों ने परचम लहराया। सिर्फ 154 वोटों से जीतकर मोहनलाल आचार्य नवगठित पूरनपुर सीट के पहले विधायक बने। विधानसभा चुनाव- 1962 में जिले की तीनों सीटों के नाम 58-पीलीभीत, 59-पूरनपुर और 60-बीसलपुर (सुरक्षित) हो गए। इन तीनों सीटों पर कुल 19 प्रत्याशियों ने भाग्य आजमाया। 58-पीलीभीत सीट पर सर्वाधिक नौ प्रत्याशी मैदान में उतरे जिनके लिए 44555 मतदाताओं ने वोट डाले थे। इंडियन नेशनल कांग्रेस के रामरूप सिंह 10939 मत निर्वाचित हुए, उन्होंने सीपीआई के नफीस अहमद को 919 मतों से पराजित किया। 59-पूरनपुर में चार प्रत्याशी ही मैदान में थे जहां मोहनलाल आचार्य ने कांटे की टक्कर में जनसंघ के हरीशचंद्र को हराया। मोहनलाल को 13681 मत मिले थे। 60-बीसलपुर सुरक्षित सीट पर छह प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। इसमें भी इंडियन नेशनल कांग्रेस के दुर्गा प्रसाद ने 9323 मत पाकर जीत दर्ज की और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के बिहारीलाल 943 मतों के अंतर से हराया। पीलीभीत में यह पहला ऐसा चुनाव था जिसमें तीनों सीटों पर एक ही पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस ने परचम लहराया।
फिर नहीं जीते पहले विधायक हरप्रसाद
पहली विधानसभा चुनाव में बीसलपुर सेंट्रल सीट से जीतकर बीसलपुर के पहले विधायक बने हरप्रसाद ने क्षेत्र बदलकर 1957 में पीलीभीत और 1962 में पूरनपुर सीट से पुन: चुनाव लड़ा लेकिन दोनों चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
दो सीटों पर 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदान
तीसरी विधानसभा चुनाव में मतदाताओं में उत्साह दिखा। शायद यही वजह रही कि पीलीभीत सीट पर 50.29 प्रतिशत और पूरनपुर सीट पर 50.70 प्रतिशत हुआ जबकि बीसलपुर सीट पर 41.10 प्रतिशत वोटिंग हुई। हालांकि दूसरी विधानसभा के चुनाव में बीसलपुर सीट पर 79.79 प्रतिशत मतदान हुआ था।
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फिर नहीं जीते पहले विधायक हरप्रसाद
पहली विधानसभा चुनाव में बीसलपुर सेंट्रल सीट से जीतकर बीसलपुर के पहले विधायक बने हरप्रसाद ने क्षेत्र बदलकर 1957 में पीलीभीत और 1962 में पूरनपुर सीट से पुन: चुनाव लड़ा लेकिन दोनों चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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दो सीटों पर 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदान
तीसरी विधानसभा चुनाव में मतदाताओं में उत्साह दिखा। शायद यही वजह रही कि पीलीभीत सीट पर 50.29 प्रतिशत और पूरनपुर सीट पर 50.70 प्रतिशत हुआ जबकि बीसलपुर सीट पर 41.10 प्रतिशत वोटिंग हुई। हालांकि दूसरी विधानसभा के चुनाव में बीसलपुर सीट पर 79.79 प्रतिशत मतदान हुआ था।
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