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Pilibhit News: हर साल तबाही का मंजर देख कांप उठती है रूह

Fri, 07 Jul 2023 12:15 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Fri, 07 Jul 2023 12:15 AM IST
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Seeing the scene of devastation every year, the soul trembles
शारदा नदी।
पूरनपुर। वर्षाकाल में शारदा नदी हर साल उफन कर कहर बरपाती है। कई गांवों का जिला और तहसील मुख्यालय से संपर्क कट जाता है। खेत और घर नदी में समा जाते हैं। जलभराव होने से लोगों के घरों में कई दिन चूल्हे नहीं जल पाते। उन्हें बेघर होकर इधर-उधर शरण लेनी पड़ती है। नदी का जलस्तर कम होने पर कटान होता है।
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यूं तो हर बड़ी नदी उफान पर आकर आसपास की आबादी में अपना कहर बरपाती है, लेकिन शारदा नदी की खासियत यह है कि अक्सर अपने बहाव का रुख बदल लेती है। यही कारण है कि इसके बहाव पर आज तक अंकुश नहीं लगाया जा सका। नदी करीब पांच किलाेमीटर चौड़ाई के क्षेत्र में तक बहती है। नदी के आसपास गांवों में बसे लोग हर साल तबाही का मंजर नजदीक से देखते है। पहाड़ों पर हुई बारिश के बाद बनवसा बैराज से शारदा नदी में पानी रिलीज होने का क्रम शुरू हो जाता है। पहले नदी के उफान पर और नदी का जलस्तर कम होने पर कटान से तबाही होती है।
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फोटो ०६ पीबीटीपी २४
नदी की तबाही का मंजर पूरे साल सताता रहता है। बारिश शुरू होने से पहले ही तबाही होगी ही। इसको सोचकर लोग घरों के सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर देते है। - आशीष पांडेय
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फोटो ०६ पीबीटीपी २५
बाढ़ और कटान की समस्या दशकों पुरानी है। लंबे समय से समस्या के समाधान की मांग नदी किनारे गांव के लोग कर रहे है। नेता, अफसर हर बार समस्या के समाधान कराने का मात्र आश्वासन देते है। - संजय मलिक
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फोटो ०६ पीबीटीपी २६
बाढ़ और कटान को नदी कब किस ओर रुख कर दें। इसको लेकर चिंता रहती है। बाढ़ में घरों में पानी भरने पर टांड़ बनाकर रहता पड़ता है। कई दिन भूखे ही निकल जाते है। -कार्तिक सरकार

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फोटो ०६ पीबीटीपी २७
क्षेत्र के लोगों का जीविकोपार्जन खेती पर निर्भर है। जिन लोगों के पास खेती नहीं है, वे मजदूरी कर पेट पालते है। मगर कटान में अक्सर खेती ही नदी की भेंट चढ़ जाती है। कई दिन खेतों में पानी भरा रहने से फसलें खराब होती है। - सुखवीर सिंह

शारदा नदी।

शारदा नदी।

शारदा नदी।

शारदा नदी।

शारदा नदी।

शारदा नदी।

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