{"_id":"5fde3fb58ebc3e3c8f32f20c","slug":"scam-investigation-pilibhit-news-bly4307833196","type":"story","status":"publish","title_hn":"सात दिन में जमा कराएं रिकवरी की राशि, नहीं तो होगी एफआईआर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सात दिन में जमा कराएं रिकवरी की राशि, नहीं तो होगी एफआईआर
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पीलीभीत। दो साल पूर्व ग्राम पंचायतों में हुए कूड़ेदान घोटाले में रिकवरी पर डीएम ने अब सख्ती दिखाई है। रकम जमा न करने वाले 19 सचिवों को एक सप्ताह का समय दिया गया है। डीएम ने कहा कि अगर इस अवधि में वह रिकवरी की रकम जमा नहीं करा पाए तो उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। वहीं मामले में दोषी पाए गए प्रधानों पर भी पंचायती राज एक्ट का पालन कराते हुए सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीण इलाकों में साफ-सफाई व्यवस्था सुचारू कराने के लिए जनपद की 721 ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान रखवाए गए थे। शासन-प्रशासन की इस बेहतर मुहिम में भी जिम्मेदार घोटाला करने से बाज नहीं आए। कबाड़ की दुकानों से खरीदे गए लोहे के ड्रम को कटवाकर रंग कराकर कूड़ेदान का रूप दे देते हुए उन्हें सभी ग्राम पंचायतों में रखवा दिया। वहीं नए कूड़ेदान की खरीद दर्शाते हुए हजारों रुपये के बिल भुगतान के लिए भेज दिए। इस मामले में करीब 99 लाख रुपये का घोटाला किया गया था।
दो साल पूर्व हुए इस घोटाले में शुरुआत में अफसर चुप्पी साधे रहे, मगर बाद में जब शोर मचा तो अफसरों ने खुद पर आंच आने से बचने के लिए जांच कराई थी। जांच भी धीमी गति से चली, लेकिन लगातार सवाल उठते रहे तो मामला पूरी तरह से दबाया नहीं जा सका। जांच पूरी होने के बाद 164 ग्राम प्रधान और 40 सचिव इस मामले में दोषी पाए गए थे। इन सभी पर सख्ती करते हुए उनसे रिकवरी के आदेश किए गए थे। कई आरोपी रिकवरी की रकम जमा भी कर चुके हैं। मगर 19 सचिवों ने अब तक रिकवरी की रकम जमा नहीं की है, जो कि लाखों में है।
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एक दिन पूर्व हुई समीक्षा बैठक में इस मामले में भी डीएम पुलकित खरे ने सख्त रुख अपनाया है। प्रधानों पर सख्ती करने के साथ ही ऐसे सचिवों को कड़ी चेतावनी दी गई है। उन्हें एक सप्ताह के भीतर रिकवरी की रकम जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को इसमें तेजी लाने को कहा गया है। यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर रकम जमा करने में लापरवाही बरती गई तो संबंधित सचिव पर रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। इसके बाद खलबली मच गई है। डीएम ने बताया कि लंबे समय बाद भी रिकवरी की रकम सचिवों ने जमा नहीं की थी। उन्हें तत्काल रकम जमा कराने को कहा गया है। सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों को कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
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ग्रामीण इलाकों में साफ-सफाई व्यवस्था सुचारू कराने के लिए जनपद की 721 ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान रखवाए गए थे। शासन-प्रशासन की इस बेहतर मुहिम में भी जिम्मेदार घोटाला करने से बाज नहीं आए। कबाड़ की दुकानों से खरीदे गए लोहे के ड्रम को कटवाकर रंग कराकर कूड़ेदान का रूप दे देते हुए उन्हें सभी ग्राम पंचायतों में रखवा दिया। वहीं नए कूड़ेदान की खरीद दर्शाते हुए हजारों रुपये के बिल भुगतान के लिए भेज दिए। इस मामले में करीब 99 लाख रुपये का घोटाला किया गया था।
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दो साल पूर्व हुए इस घोटाले में शुरुआत में अफसर चुप्पी साधे रहे, मगर बाद में जब शोर मचा तो अफसरों ने खुद पर आंच आने से बचने के लिए जांच कराई थी। जांच भी धीमी गति से चली, लेकिन लगातार सवाल उठते रहे तो मामला पूरी तरह से दबाया नहीं जा सका। जांच पूरी होने के बाद 164 ग्राम प्रधान और 40 सचिव इस मामले में दोषी पाए गए थे। इन सभी पर सख्ती करते हुए उनसे रिकवरी के आदेश किए गए थे। कई आरोपी रिकवरी की रकम जमा भी कर चुके हैं। मगर 19 सचिवों ने अब तक रिकवरी की रकम जमा नहीं की है, जो कि लाखों में है।
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एक दिन पूर्व हुई समीक्षा बैठक में इस मामले में भी डीएम पुलकित खरे ने सख्त रुख अपनाया है। प्रधानों पर सख्ती करने के साथ ही ऐसे सचिवों को कड़ी चेतावनी दी गई है। उन्हें एक सप्ताह के भीतर रिकवरी की रकम जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को इसमें तेजी लाने को कहा गया है। यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर रकम जमा करने में लापरवाही बरती गई तो संबंधित सचिव पर रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। इसके बाद खलबली मच गई है। डीएम ने बताया कि लंबे समय बाद भी रिकवरी की रकम सचिवों ने जमा नहीं की थी। उन्हें तत्काल रकम जमा कराने को कहा गया है। सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों को कोई रियायत नहीं दी जाएगी।