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न कांवड़ न सड़कों पर बम-बम भोले की गूंज... दूर से ही चढ़े बेल पत्र और धतूरे
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पीलीभीत। लिंग थापि विधिवत करि पूजा, शिव समान प्रिय मोहि न दूजा... भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले अपनी मनोसिद्धि के लिए समुद्र के किनारे शिवलिंग की स्थापना कर औढ़रदानी की पूजा की थी। सावन में भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। मगर, इस बार सावन का पहला सोमवार कोरोना के साए में बीता। भक्त चेहरों पर मास्क लगाकर शिवालयों में पहुंचे। भगवान शिव की पूजा अर्चना भी की, मगर हर साल की तरह न तो सड़कों पर कांवड़ियों की बम-बम भोले की गूंज सुनाई पड़ी, न ही श्रद्धालुओं की भीड़। भोले के भक्तों ने शिवालयों में पहुंचकर दूर से ही बेल पत्र, पुष्प, धतूरे, जल, दूध, दही पुजारी के हाथों से अर्पित कराए और सामाजिक दूरी बनाते हुए भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की।
सोमवार सुबह शिवालयों में गिने-चुने भक्त ही निश्चित दूरी बनाकर पहुंचते दिखे। चेहरों पर मास्क लगाए भक्तों को भोले के दर्शन करने से पहले मंदिर के सेवादारों ने उन्हें सैनिटाइज किया। थर्मल स्कैनर से तापमान नापा गया। उसके बाद ही वह भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना कर पाए। प्राचीन गौरीशंकर मंदिर, अर्द्धनारीश्वर मंदिर, दूधिया मंदिर, बल्लभनगर शिव मंदिर, गोदावरी स्टेट कालोनी शिव मंदिर, सिरसा जंगल में इक हत्तरनाथ मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में भी भक्तों ने बेल पत्र, धतूरे, पुष्प, दूध, दही, शहद और गंगाजल चढ़ाकर पूजा अर्चना की। इस बार मंदिरों के बाहर पुष्प, बेल पत्र बिक्री करने वाले दुकानदार भी कम थे। प्रसाद की दुकानें भी हर साल की तुलना में कम दिखीं। मंदिरों के बाहर पुलिस की ड्यूटी भी नहीं लगी थी। कोरोना के डर से पुलिस को एक जगह कुर्सी डालकर बैठने की जगह भ्रमण पर रखा गया।
दृश्य एक
समय- सुबह नौ बजे। स्थान-प्राचीन गौरीशंकर मंदिर।
सावन के पहले सोमवार को मंदिर के बाहर गिने-चुने भक्त दिखे। मंदिर के बाहर स्क्रीनिंग के लिए सेवादार खड़े थे। वह श्रद्धालुओं के हाथ भी सैनिटाइज करा रहे थे। अंदर भी गोल घेरा बनाकर एक-एक कर भक्तों को पूजा करने दी गई।
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दृश्य दो
समय- सुबह 9.30 बजे। स्थान- स्टेशन रोड पर अर्द्धनारीश्वर मंदिर।
मंदिर के सेवादार बाहर खड़े होकर श्रद्धालुओं को सैनिटाइज कर रहे थे। करीब 20 से 25 श्रद्धालु ही लाइन में खड़े थे। वह एक-एक कर सामाजिक दूरी से दर्शन को पहुंच रहे थे। भक्तों ने चेहरे पर मास्क भी लगाए थे।
दृश्य तीन
समय- सुबह 10 बजे। स्थान- बाग गुलशेर खां का दूधिया मंदिर।
गिने-चुने भक्त ही भगवान शिव के दर्शन को पहुंच रहे थे। पुजारी ने भक्तों से बेल पत्र, धतूरा और प्रसाद लेकर स्वयं ही अर्पित किया। भक्तों को दूर से ही दर्शन की हिदायत दी गई। भक्तों ने गोल घेरे में खड़े होकर दर्शन किए।
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सोमवार सुबह शिवालयों में गिने-चुने भक्त ही निश्चित दूरी बनाकर पहुंचते दिखे। चेहरों पर मास्क लगाए भक्तों को भोले के दर्शन करने से पहले मंदिर के सेवादारों ने उन्हें सैनिटाइज किया। थर्मल स्कैनर से तापमान नापा गया। उसके बाद ही वह भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना कर पाए। प्राचीन गौरीशंकर मंदिर, अर्द्धनारीश्वर मंदिर, दूधिया मंदिर, बल्लभनगर शिव मंदिर, गोदावरी स्टेट कालोनी शिव मंदिर, सिरसा जंगल में इक हत्तरनाथ मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में भी भक्तों ने बेल पत्र, धतूरे, पुष्प, दूध, दही, शहद और गंगाजल चढ़ाकर पूजा अर्चना की। इस बार मंदिरों के बाहर पुष्प, बेल पत्र बिक्री करने वाले दुकानदार भी कम थे। प्रसाद की दुकानें भी हर साल की तुलना में कम दिखीं। मंदिरों के बाहर पुलिस की ड्यूटी भी नहीं लगी थी। कोरोना के डर से पुलिस को एक जगह कुर्सी डालकर बैठने की जगह भ्रमण पर रखा गया।
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दृश्य एक
समय- सुबह नौ बजे। स्थान-प्राचीन गौरीशंकर मंदिर।
सावन के पहले सोमवार को मंदिर के बाहर गिने-चुने भक्त दिखे। मंदिर के बाहर स्क्रीनिंग के लिए सेवादार खड़े थे। वह श्रद्धालुओं के हाथ भी सैनिटाइज करा रहे थे। अंदर भी गोल घेरा बनाकर एक-एक कर भक्तों को पूजा करने दी गई।
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दृश्य दो
समय- सुबह 9.30 बजे। स्थान- स्टेशन रोड पर अर्द्धनारीश्वर मंदिर।
मंदिर के सेवादार बाहर खड़े होकर श्रद्धालुओं को सैनिटाइज कर रहे थे। करीब 20 से 25 श्रद्धालु ही लाइन में खड़े थे। वह एक-एक कर सामाजिक दूरी से दर्शन को पहुंच रहे थे। भक्तों ने चेहरे पर मास्क भी लगाए थे।
दृश्य तीन
समय- सुबह 10 बजे। स्थान- बाग गुलशेर खां का दूधिया मंदिर।
गिने-चुने भक्त ही भगवान शिव के दर्शन को पहुंच रहे थे। पुजारी ने भक्तों से बेल पत्र, धतूरा और प्रसाद लेकर स्वयं ही अर्पित किया। भक्तों को दूर से ही दर्शन की हिदायत दी गई। भक्तों ने गोल घेरे में खड़े होकर दर्शन किए।