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राजस्व टीम ने गांव पहुंच बीमार पशुओं का जायजा, पशुओं में टीकाकरण
अमर उजाला ब्यूरो जमुनिया (पीलीभीत)।
Updated Thu, 07 Sep 2017 11:12 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद पशु चिकित्सा विभाग की खुली नींद
गांव में पिछले एक सप्ताह से पशुओं में फैली बीमारी से डेढ़ दर्जन पशुओं की मौत होने और कई मवेशियों के बीमार होने की अमर उजाला में गुरुवार को प्रकाशित खबर के बाद पशु चिकित्सा विभाग और प्रशासन की नींद खुली। बृहस्पतिवार सुबह एसडीएम कलीनगर सूरज यादव ने अपनी राजस्व टीम के साथ गांव पहुंच हालात का जायजा लिया। साथ ही पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने भी गांव पहुंच पशुओं में टीकाकरण किया।
बताते चलें कि जमुनियां खास गांव में पिछले एक सप्ताह से पशुओं में बीमारी फैली हुई थी। ग्रामीणों की सूचना के बाद भी पशु चिकित्सा विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके चलते गांव के करीब डेढ़ दर्जन पशुओं की मौत हो गई थी। ग्रामीणों का आरोप था कि समय से सूचना के बाद भी पशु चिकित्सा विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अमर उजाला ने सात सितंबर के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन में खलबली मच गई। डीएम के निर्देश पर एसडीएम कलीनगर सूरज यादव गुरुवार तहसीलदार विजय त्रिवेदी, कानूनगो बिजेंदर सिंह राना, पंकज राना, लेखपाल महेश सिन्हा के साथ गांव जा धमके। उन्होंने गांव वालों से बात की ओर हालात का जायजा लिया। जिन लोगों के पशु मरे थे उनसे विस्तार से बात की। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची टीम से कहा कि पहले से ही टीकाकरण अभियान चलाया जाता तो इतने पशुओं की जान जाने से बचाया जा सकता था।
गांव में पशुओं का किया गया टीकाकरण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह ने टीम को सुबह ही गांव भेज दिया था। उन्होंने तीन पैनलों में टीम को टीकाकरण करने को लगाया। टीम ने गांव पहुंच पशुओं की बीमारी से हो रही मौत की रोकथाम के लिए टीकाकरण किया। टीम का नेतृत्व कर रहे गांव पहुंचे पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. नूरुल हुदा ने एक मृत पशु का पोस्टमार्टम भी कराया। बाद में उन्होंने बताया कि ज्यादातर पशुओं की मौत विषाक्त चारा से होने के लक्षण सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि किसान कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव अपनी फसलों में करते हैं, उसके पास उगी घास में भी यह कीटनाशक पहुंच जाता है। पशु हरे चारे के खाने के माध्यम से वह पेट में पहुंच कर जहर बना देता है। इससे पशुओं का पेट फूल जाता है। झाग आना, दम घुटना एवं अज्ञात बुखार, मौत का कारण बन जाता है। उन्होंने पशुपालकों को 20 दिन हरा चारा पशु को न देने की अपील की है। बताया कि टीकाकरण की टीम लगाकर जमुनिया में सौ पशुओं के साथ नवदिया सुखदासपुर में तीन सौ टीका लगाए गए हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वह अपने मृत पशुओं को गड्ढे में दबाए। जिससे यह रोग और न फैले।
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गांव में पिछले एक सप्ताह से पशुओं में फैली बीमारी से डेढ़ दर्जन पशुओं की मौत होने और कई मवेशियों के बीमार होने की अमर उजाला में गुरुवार को प्रकाशित खबर के बाद पशु चिकित्सा विभाग और प्रशासन की नींद खुली। बृहस्पतिवार सुबह एसडीएम कलीनगर सूरज यादव ने अपनी राजस्व टीम के साथ गांव पहुंच हालात का जायजा लिया। साथ ही पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने भी गांव पहुंच पशुओं में टीकाकरण किया।
बताते चलें कि जमुनियां खास गांव में पिछले एक सप्ताह से पशुओं में बीमारी फैली हुई थी। ग्रामीणों की सूचना के बाद भी पशु चिकित्सा विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके चलते गांव के करीब डेढ़ दर्जन पशुओं की मौत हो गई थी। ग्रामीणों का आरोप था कि समय से सूचना के बाद भी पशु चिकित्सा विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अमर उजाला ने सात सितंबर के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन में खलबली मच गई। डीएम के निर्देश पर एसडीएम कलीनगर सूरज यादव गुरुवार तहसीलदार विजय त्रिवेदी, कानूनगो बिजेंदर सिंह राना, पंकज राना, लेखपाल महेश सिन्हा के साथ गांव जा धमके। उन्होंने गांव वालों से बात की ओर हालात का जायजा लिया। जिन लोगों के पशु मरे थे उनसे विस्तार से बात की। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची टीम से कहा कि पहले से ही टीकाकरण अभियान चलाया जाता तो इतने पशुओं की जान जाने से बचाया जा सकता था।
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गांव में पशुओं का किया गया टीकाकरण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह ने टीम को सुबह ही गांव भेज दिया था। उन्होंने तीन पैनलों में टीम को टीकाकरण करने को लगाया। टीम ने गांव पहुंच पशुओं की बीमारी से हो रही मौत की रोकथाम के लिए टीकाकरण किया। टीम का नेतृत्व कर रहे गांव पहुंचे पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. नूरुल हुदा ने एक मृत पशु का पोस्टमार्टम भी कराया। बाद में उन्होंने बताया कि ज्यादातर पशुओं की मौत विषाक्त चारा से होने के लक्षण सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि किसान कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव अपनी फसलों में करते हैं, उसके पास उगी घास में भी यह कीटनाशक पहुंच जाता है। पशु हरे चारे के खाने के माध्यम से वह पेट में पहुंच कर जहर बना देता है। इससे पशुओं का पेट फूल जाता है। झाग आना, दम घुटना एवं अज्ञात बुखार, मौत का कारण बन जाता है। उन्होंने पशुपालकों को 20 दिन हरा चारा पशु को न देने की अपील की है। बताया कि टीकाकरण की टीम लगाकर जमुनिया में सौ पशुओं के साथ नवदिया सुखदासपुर में तीन सौ टीका लगाए गए हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वह अपने मृत पशुओं को गड्ढे में दबाए। जिससे यह रोग और न फैले।
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