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Pilibhit News: पारंपरिक व्यंजनों का बढ़ेगा सम्मान, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिलेगी पहचान

Fri, 08 May 2026 02:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 02:24 AM IST
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Respect for traditional cuisine will increase, and it will also gain recognition at the national and international level.
बंगाली मिठाई संदेश के बाद जनपद की जलेबी, खोआ मिठाई, लस्सी और लौज भी एक जिला एक व्यंजन में शामिल, पैकेजिंग आदि के माध्यम से पारंपरिक व्यंजनों को मंच देने की कवायद शुरू
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पीलीभीत। जनवरी में प्रसिद्ध बंगाली मिठाई संदेश को एक जिला एक व्यंजन में शामिल करने के बाद अब जनपद के चार और व्यंजन को इस योजना में शामिल किया गया है। इस बार जनपद की जलेबी, खोआ मिठाई, लस्सी और लौज को शामिल किया है। जिले के पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से ओडीओपी की तर्ज पर गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, कौशल प्रशिक्षण आदि के माध्यम से पीलीभीत के पारंपरिक व्यंजनों को मंच देने की पहल की गई है। इन व्यंजनों से जनपद भर में 1400 विक्रेेता जुड़े हुए हैं। लौज की जनपद में 300 इकाइयां स्थापित हैं।
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सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की एक जिला एक व्यंजन योजना में शामिल किए गए पीलीभीत के व्यंजनों का चिह्नांकन लखनऊ से आई सर्वे टीम के आधार पर किया गया। परंपरागत व्यंजनों की पहचान को सुरक्षित एवं संरक्षित करने, स्वच्छता एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, व्यंजनों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने एवं इन व्यंजनों को स्केल बल बनाने के उद्देश्य से जनपद में अब व्यंजनवार स्टैंडर्ड रेसिपी मैन्युअल विकसित किए जाएंगे। पीलीभीत में लस्सी, खोआ मिठाई, जलेबी से भी 400 से ज्यादा विक्रता जुड़े हुए हैं। लस्सी सुनगढ़ी, बीसलपुर में ज्यादा टेस्टी बनाई जाएगी। जलेबी जनपद की हर मिठाई की दुकान पर सुबह के समय बनाई जाती है। संवाद
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इकाइयां स्थापित कर 400 लोग संदेश मिठाई कारोबार से जुड़े
बंगाली मिठाई संदेश का कारोबार जिले में 400 लोग कर रहे हैं। मिठाई बनाने की करीब 80 इकाइयां जिले के पूरनपुर, कलीनगर एवं पीलीभीत के बंगाली भाषी क्षेत्रों में स्थापित हैं। इसे जनपद भर की मिठाई दुकानों पर बेचा जा रहा है। 20 थोक विक्रता हैं। दस रेस्त्रां भी संचालित हैं। संदेश मिठाई पश्चिम बंगाल की एक प्रमुख मिठाई है। जिसे वहां पर जीआई टैग भी प्राप्त है।
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इस मिठाई का यह है इतिहास
उद्योग विभाग के अधिकारी बताते हैं कि सन 1947 में विभाजन के समय एवं सन 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध होने के बाद बांग्लादेश के बंगाली हिंदुओं को जनपद पीलीभीत में कई जगहों पर बसाया गया था, जो अपने साथ संदेश मिठाई बनाने की परंपरा को भी साथ ले आए थे। संदेश मिठाई बनाने में दूध, पनीर एवं चीनी का प्रयोग किया जाता है। गाय का दूध मिठाई निर्माण में इसे स्वादिष्ट बनाता है और इसमें केसर, गुलाब और पारंपरिक गुड़ के साथ भी बनाया जाता है। इलायची व केसर से सुगंधित किया जाता है।
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लौज के कारोबार से जुड़े हैं एक हजार लोग

जनपद में लौज मिठाई की करीब 300 इकाइयां स्थापित हैं। इनमें करीब एक हजार लोग जुड़े हैं। यह मिठाई दूध और पनीर एवं चीनी से बनाई जाती है। उपायुक्त उद्योग की ओर से शासन को भेजे गए प्रस्ताव में बताया है कि यह मिठाई जनपद के बीसलपुर, बरखेड़ा के अलावा कई शहरी क्षेत्रों में बनाई जाती है। स्वाद के साथ कम मीठी होने के कारण स्वास्थ्य के प्रति सजग लोगों में भी अत्यधिक लोकप्रिय है। इसमें उत्पादन की 200 इकाइयां हैं। 50 थोक विक्रेता भी हैं।

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जनपद के व्यंजनों में जलेबी, खोआ मिठाई, लस्सी और लौज को एक जिला एक व्यंजन में शामिल किया गया है। एफएसएसएआई, सीएफटीआरआई, एनआईएफटीईएम आदि के सहयोग से नए व्यंजनों में गुणवत्ता सुधार के साथ इनके वेरिएंट्स (रूपांतरिक उत्पाद) विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। ब्रांडिंग के लिए लोगो जारी किया जाएगा। अन्य कई सुधार कराए जाएंगे। शासन स्तर से इसमें शासनादेश जारी किया गया है। -आशीष गुप्ता, उपायुक्त उद्योग, पीलीभीत
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