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नौ ग्राम पंचायत सचिवों से होगी 5.49 लाख की रिकवरी
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पीलीभीत। मनरेगा योजना के तहत बनाए गए राजीव गांधी सेवा केंद्रों के निर्माण में धांधलेबाजी कर दी गई। इसका खुलासा सत्यापन के दौरान सामने आया। सीडीओ ने सेवा केंद्रों का निर्माण कराने वाले नौ पंचायत सचिवों से 5,49,720 रुपये की रिकवरी करने के निर्देश दिए हैं।
मनरेगा योजना के तहत वर्ष 2017 में ग्राम पंचायतों में राजीव गांधी सेवा केंद्रों का निर्माण कराया गया था। जिले में करीब 250 राजीव सेवा केंद्र बनाए गए हैं। निर्माण की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों को दी गई थी। बताते हैं कि राजीव गांधी सेवा केंद्रों के निर्माण के दौरान मॉनिटरिंग न होने के चलते निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया। नतीजा यह निकला कि कुछ सेवा केंद्रों का प्लास्टर टूटने लगा तो कुछ के दरवाजे खिड़की टूटने लगे। इस मामले में शिकायतें भी हुई। बाद में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सेवा केंद्रों का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान निर्माण में बड़े पैमाने में धांधली पाई गई। सत्यापन रिपोर्ट तत्कालीन सीडीओ को सौंपी गई।
सत्यापन रिपोर्ट के मुताबिक पूरनपुर की छह ग्रामपंचायतों में बने सेवा केंद्रों के निर्माण में गड़बड़ी पाई गई। जबकि बरखेड़ा के दो, मरौरी और ललौरीखेड़ा की एक-एक ग्राम पंचायत में बने सेवा केंद्र के निर्माण में गड़बड़ी पाई गई। इस पर सचिव अजय देवल से 24624 रुपये, मोहम्मद रिजवान से 19852 रुपये, दिनेश श्रीवास्तव से 68681, अरविंद कुमार वर्मा से 93154, अखिलेश कुमार गुप्ता से 73584, रुपलाल से 1,12,822, राजा तोमर से 30886, विशेष कुमार मिश्रा से 49325 और झब्बूलाल से 76792 रुपये की रिकवरी के आदेश जारी किए गए हैं। इन सभी सचिवों को नोटिस जारी कर संबंधित धनराशि बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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मनरेगा के तहत बने राजीव गांधी सेवा केंद्रों के निर्माण में सत्यापन के दौरान खामियां मिली थी। नौ ग्राम पंचायत अधिकारियों से रिकवरी के आदेश दिए गए है। कोविड-19 के चलते यह कार्रवाई रुकी चल रही थी। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ
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मनरेगा योजना के तहत वर्ष 2017 में ग्राम पंचायतों में राजीव गांधी सेवा केंद्रों का निर्माण कराया गया था। जिले में करीब 250 राजीव सेवा केंद्र बनाए गए हैं। निर्माण की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों को दी गई थी। बताते हैं कि राजीव गांधी सेवा केंद्रों के निर्माण के दौरान मॉनिटरिंग न होने के चलते निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया। नतीजा यह निकला कि कुछ सेवा केंद्रों का प्लास्टर टूटने लगा तो कुछ के दरवाजे खिड़की टूटने लगे। इस मामले में शिकायतें भी हुई। बाद में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सेवा केंद्रों का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान निर्माण में बड़े पैमाने में धांधली पाई गई। सत्यापन रिपोर्ट तत्कालीन सीडीओ को सौंपी गई।
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सत्यापन रिपोर्ट के मुताबिक पूरनपुर की छह ग्रामपंचायतों में बने सेवा केंद्रों के निर्माण में गड़बड़ी पाई गई। जबकि बरखेड़ा के दो, मरौरी और ललौरीखेड़ा की एक-एक ग्राम पंचायत में बने सेवा केंद्र के निर्माण में गड़बड़ी पाई गई। इस पर सचिव अजय देवल से 24624 रुपये, मोहम्मद रिजवान से 19852 रुपये, दिनेश श्रीवास्तव से 68681, अरविंद कुमार वर्मा से 93154, अखिलेश कुमार गुप्ता से 73584, रुपलाल से 1,12,822, राजा तोमर से 30886, विशेष कुमार मिश्रा से 49325 और झब्बूलाल से 76792 रुपये की रिकवरी के आदेश जारी किए गए हैं। इन सभी सचिवों को नोटिस जारी कर संबंधित धनराशि बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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मनरेगा के तहत बने राजीव गांधी सेवा केंद्रों के निर्माण में सत्यापन के दौरान खामियां मिली थी। नौ ग्राम पंचायत अधिकारियों से रिकवरी के आदेश दिए गए है। कोविड-19 के चलते यह कार्रवाई रुकी चल रही थी। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ