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राम-रावण के युद्ध ने सबको किया रोमांचित
Bisalpur
Updated Fri, 23 Oct 2015 11:08 PM IST
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नगर के ऐतिहासिक रामलीला में शुक्रवार को रावण वध लीला का मंचन हुआ। रामलीला मैदान में शुक्रवार दोपहर से श्रद्धालुओं का पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। निर्धारित समय पर शुरू हुई रामलीला में रामादल और रावणदल के मध्य लगभग तीन घंटे तक घमासान युद्ध हुआ। शाम लगभग सात बजे भगवान राम ने रावण की नाभि में बाण मारकर उसका संहार कर दिया। रावण का संहार होते ही लीला स्थल पर मौजूद भीड़ राम के जयकारे लगाने लगी। इससे पूर्व राम और रावण में संवाद भी हुआ। मृत्यु शैय्या पर लेटे रावण ने विजय मुद्रा में कहा कि मेरे जीते जी आप लंका में नहीं घुस पाए, लेकिन वह उनके जीते जी स्वर्ग लोक को जा रहा है।
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भगवान ने अपने भाई लक्ष्मण से मृत्युशैय्या पर लेटे रावण से राजनीति की शिक्षा लेने को कहा। इस पर लक्ष्मण रावण के सिर की तरफ जाकर खड़े हो गए। रावण ने लक्ष्मण से कहा कि यदि शिक्षा लेनी है तो उन्हें पैरों की तरफ खड़ा होना पड़ेगा। उसके बाद भगवान राम के इशारे पर लक्ष्मण रावण के पैरों की तरफ जाकर खड़े हो गए, तब जाकर रावण ने लक्ष्मण को राजनीति की शिक्षा दी। इसके बाद रावण के पुतले का दहन किया गया। इससे पूर्व भगवान राम ने अहिरावण का वध किया।
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लीला का संचालन मनोज त्रिपाठी, उपेंद्र शंखधार, अवधेश भट्ट ने किया। लीला मंचन के दौरान रामायण के लंका कांड का पाठ होता रहा। रावण के सिररूपी गुब्बारे प्रशासन, पुलिस अधिकारियों व मेला कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा छोड़े गए। रावण वध लीला के बाद अधिकारियों व मेला कमेटी के पदाधिकारियों ने राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन व हनुमान के स्वरूपों को तिलक लगाकर उनकी आरती उतारी।
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अस्थियां लेने को दौड़ पड़ी भीड़
रावण का पुतला दहन होते ही मौजूद भीड़ पुतले की अस्थियां लेने को झपट पड़ी। मान्यता है कि रावण के जले पुतले की अस्थियां घर में रखने से काल का विनाश होता है। इसको लेकर पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।