{"_id":"56f81c0b4f1c1b4b42f150fa","slug":"pupils-education-policy-given-the-continued-interest","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षा नीति विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए बने ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षा नीति विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए बने
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Sun, 27 Mar 2016 11:27 PM IST
विज्ञापन
होली
- फोटो : pilibhit, beureu
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजकीय महाविद्यालय में भारत की भावी उच्च शिक्षा नीति, दृष्टि एवं आयाम विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार शुरू हुई। डीएम मासूम अली सरवर और अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप जलाकर सेमिनार का शुभारंभ किया।
सेमिनार में डीएम मासूम अली सरवर ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि शिक्षा नीति विद्यार्थियों के हितों और भावनाओं को देखते हुए बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। शिक्षा नीति कभी भी थोपी जाने वाली नहीं होनी चाहिए। सेमिनार में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. एचसी पोखिरियाल ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि शिक्षा नीति एक व्यापक मुद्दा है। सभी लोगों को शिक्षा के महत्व से वाकिफ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े लोगों को स्थानीय मुद्दों पर कार्य करना चाहिए। शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखे जाने की महती आवश्यकता है। सेमिनार में उच्च शिक्षा निदेशालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. आरपीएस यादव, सेवानिवृत्त उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. एनबी खान, सेवानिवृत्त उच्च शिक्षा निदेशक (द्वितीय) अखिलेश अग्रवाल, आगरा कालेज के सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ संतोष कुमार, तहसीलदार नन्हेलाल, डॉ. सुनीता सक्सेना, डॉ. आरपी यादव, डॉ पवन त्रिवेदी, डॉ शीला रानी खरे, डॉ दरख्शा अजहर, डॉ एमपी सिंह, डॉ अलका मेहरा, डॉ महेश बाबू, कैलाश सिंह, डॉ मेवालाल, डॉ एसएस यादव, डॉ पूर्णिमा भारद्वाज, डॉ प्रह्लाद सिंह, डॉ सुरेंद्र गंगवार, डॉ अंजना गंगवार, डॉ. सुशील कुमार, रामखिलौना शर्मा और हाजी अशरफ कुरैशी आदि वक्ताओं ने संबोधित किया। सेमिनार में वक्ताओं ने उच्च शिक्षा को और अधिक बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी दिए। सेमिनार में महाविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागतगान पेश किया। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. आरसी वाजपेई ने और संचालन डॉ. विकास प्रधान ने किया। महाविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स और रोवर्स रेंजर्स ने अतिथियों की अगवानी की। समारोह में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भी दिए गए।
विज्ञापन
सेमिनार में डीएम मासूम अली सरवर ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि शिक्षा नीति विद्यार्थियों के हितों और भावनाओं को देखते हुए बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। शिक्षा नीति कभी भी थोपी जाने वाली नहीं होनी चाहिए। सेमिनार में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. एचसी पोखिरियाल ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि शिक्षा नीति एक व्यापक मुद्दा है। सभी लोगों को शिक्षा के महत्व से वाकिफ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े लोगों को स्थानीय मुद्दों पर कार्य करना चाहिए। शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखे जाने की महती आवश्यकता है। सेमिनार में उच्च शिक्षा निदेशालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. आरपीएस यादव, सेवानिवृत्त उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. एनबी खान, सेवानिवृत्त उच्च शिक्षा निदेशक (द्वितीय) अखिलेश अग्रवाल, आगरा कालेज के सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ संतोष कुमार, तहसीलदार नन्हेलाल, डॉ. सुनीता सक्सेना, डॉ. आरपी यादव, डॉ पवन त्रिवेदी, डॉ शीला रानी खरे, डॉ दरख्शा अजहर, डॉ एमपी सिंह, डॉ अलका मेहरा, डॉ महेश बाबू, कैलाश सिंह, डॉ मेवालाल, डॉ एसएस यादव, डॉ पूर्णिमा भारद्वाज, डॉ प्रह्लाद सिंह, डॉ सुरेंद्र गंगवार, डॉ अंजना गंगवार, डॉ. सुशील कुमार, रामखिलौना शर्मा और हाजी अशरफ कुरैशी आदि वक्ताओं ने संबोधित किया। सेमिनार में वक्ताओं ने उच्च शिक्षा को और अधिक बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी दिए। सेमिनार में महाविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागतगान पेश किया। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. आरसी वाजपेई ने और संचालन डॉ. विकास प्रधान ने किया। महाविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स और रोवर्स रेंजर्स ने अतिथियों की अगवानी की। समारोह में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भी दिए गए।
विज्ञापन