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पीटीआर ने दी एनओसी, फिर भी गति नहीं पकड़ पा रहा आमान परिवर्तन का काम
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मैलानी रेल खंड पर अधूरा पड़ा काम फाइल फोटो।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। मैलानी रेल खंड पर अमान परिवर्तन का काम चार साल पहले शुरू हुआ था। इसमें 43 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। मगर पीटीआर से मार्च 2021 में एनओसी मिलने के बाद भी 19 किलोमीटर बचे काम में रफ्तार नहीं आ पा रही है। इससे 48 माह बाद भी ट्रेनों के संचालन की कोई संभावना नहीं है।
लखनऊ रूट के मैलानी रेल खंड पर 2012 में अमान परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 62 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 88 करोड़ की लागत से काम पूरा करने का जिम्मा कार्यदायी संस्था रेल विकास निगम लिमिटेड को दिया गया था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमान परिवर्तन के लिए 31 मई 2018 में मीटरगेज की ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। इसके बाद एक जून 2018 से अमान परिवर्तन का काम शुरू कर दिया गया। 18 माह में काम पूरा करने का जिम्मा संस्था को दिया गया। काम गति पकड़ पाता, इससे पहले ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल क्षेत्र में ब्रॉडगेज की पटरिया डालने के लिए आपत्ति लग गई। कई साल तक पीटीआर से एनओसी का इंतजार किया गया। इसके बाद भी एनओसी नहीं मिली, तो मैलानी-शाहगढ़ के बीच काम शुरू किया था। जिसका सीआरएस निरीक्षण भी हो चुका है। इसी दौरान मार्च 2021 में पीटीआर से भी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट मिल गया। इससे शाहगढ़ और पीलीभीत के बीच अमान परिवर्तन के काम का रास्ता साफ हो गया। मगर एक साल बीतने के बाद इस 19 किलोमीटर में अमान परिवर्तन का काम तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। इससे इस रेल खंड पर ट्रेनों का संचालन भी शुरू नहीं हो सका है।
एनओसी देने में कुछ दिक्कत थी। समस्या अब दूर हो गई है। एक-दो दिन में रेलवे को सभी बिंदुओं पर काम करने की अनुमति दे दी जाएगी। - नवीन खंडेलवाल, डीडी पीटीआर
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लखनऊ रूट के मैलानी रेल खंड पर 2012 में अमान परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 62 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 88 करोड़ की लागत से काम पूरा करने का जिम्मा कार्यदायी संस्था रेल विकास निगम लिमिटेड को दिया गया था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमान परिवर्तन के लिए 31 मई 2018 में मीटरगेज की ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। इसके बाद एक जून 2018 से अमान परिवर्तन का काम शुरू कर दिया गया। 18 माह में काम पूरा करने का जिम्मा संस्था को दिया गया। काम गति पकड़ पाता, इससे पहले ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल क्षेत्र में ब्रॉडगेज की पटरिया डालने के लिए आपत्ति लग गई। कई साल तक पीटीआर से एनओसी का इंतजार किया गया। इसके बाद भी एनओसी नहीं मिली, तो मैलानी-शाहगढ़ के बीच काम शुरू किया था। जिसका सीआरएस निरीक्षण भी हो चुका है। इसी दौरान मार्च 2021 में पीटीआर से भी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट मिल गया। इससे शाहगढ़ और पीलीभीत के बीच अमान परिवर्तन के काम का रास्ता साफ हो गया। मगर एक साल बीतने के बाद इस 19 किलोमीटर में अमान परिवर्तन का काम तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। इससे इस रेल खंड पर ट्रेनों का संचालन भी शुरू नहीं हो सका है।
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एनओसी देने में कुछ दिक्कत थी। समस्या अब दूर हो गई है। एक-दो दिन में रेलवे को सभी बिंदुओं पर काम करने की अनुमति दे दी जाएगी। - नवीन खंडेलवाल, डीडी पीटीआर
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