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तराई में भी खूब चला मुलायम का जादू
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पूरनपुर में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष उमाशंकर यादव के घर 2001 में आए थे सपा मुखिया (फाइल फोटो)।
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रहे मुलायम सिंह यादव का जादू तराई में भी खूब चला। सिख बाहुल्य क्षेत्र में मुलायम सिंह यादव सबके प्रिय थे। सन 2012 में उनकी जनसभा के बाद जिले की चार में से तीन सीटें सपा के खाते में गईं थीं। जिले के नौजवान हो या बुजुर्ग या फिर नेता, जो एक बार उनसे मिल लेता था उनका कायल हो जाता था।
पीलीभीत को शुरू से ही मुलायम सिंह ने काफी तवज्जो दी। यूपी में जहां अन्य जिलों के लोग इस जिले को छोटा कहते थे वहीं मुलायम सिंह यादव ने यहां जमकर मेहनत की। 1983 में पूर्व मंत्री रहे धीरेंद्र सहाय के चुनाव में वह तीन दिन तक जिले में ही डटे रहे। धीरेंद्र सहाय के बेटे मनोज सप्पू बताते हैं कि नेताजी हमेशा से ही सादा जीवन व्यतीत करते थे। उनके घर पर आए तो दरी पर ही लेट गए।
पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने बताया कि आखिरी बार नेता जी 2014 के लोकसभा चुनाव में गजरौला में आए थे। इससे पहले 2012 में विधान सभा चुनाव में नेताजी आए थे। तब असम चौराहे के पास मैदान पर उन्होंने रैली की थी। जिसमें हजारों की भीड़ जुटी थी। रैली में नेताजी ने जिले की चारों सीटों को जीताने की अपील की थी। उस रैली का नतीजा यह निकला कि पीलीभीत की चार में से तीन पर सपा ने कब्जा कर लिया।
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शहर से हाजी रियाज अहमद, बरखेड़ा से हेमराज वर्मा व पूरनपुर से प्रीतमराम विधायक बने। हेमराज वर्मा बताते हैं कि नेताजी ने हमेशा गरीबों का मुख्य धारा में जोड़ने का काम किया। वह गरीब को भी नेता बनाने का हुनर जानते थे। किसानों के लिए उन्होंने बहुत काम किया। हमेशा सबसे परिवार की तरह मिला करते थे। पीलीभीत में दलित, यादव, ब्राह्मण, मुस्लिम सभी जातियों के प्रति उनका स्नेह था। तराई की जनता भी उन्हें बहुत प्यार करती थी। यही कारण था कि शहर सीट पर साल 2000 के बाद से हाजी रियाज अहमद लगातार तीन बार 15 साल तक विधायक रहे। जिले में काफी संख्या में नेता ऐसे हैं जिनको सामने आने पर वह सीधे नाम लेकर पुकारते थे।
...अरे उमाशंकर यहां कैसे और रुकवा दिया रक्षा मंत्री ने काफिला
पूरनपुर (पीलीभीत)। सपा जिलाध्यक्ष रहे नगर निवासी उमाशंकर यादव ने नेता जी की प्रेरणा से ही राजनीति में 1982 में कदम रखा था। वे बताते है कि 1982 में मुलायम सिंह यादव लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष थे। तब विधानसभा चुनाव में होरीलाल के पक्ष में सभा को संबोधित करने आए थे। अचानक उनके घर नेता जी का भोज का कार्यक्रम रखा गया।
वर्ष 2001 में पत्नी कमला देवी के निधन होने पर नेता जी ने उनके घर आकर शोक संवेदना व्यक्त की थी। उमाशंकर यादव बताते है कि जब नेता जी रक्षा मंत्री बने। तब उनसे मिलने दिल्ली पहुंचे, मगर सुरक्षाकर्मियों ने मिलने ही नहीं दिया। दो दिन तक मिलने की कोशिश करते रहे। आखिर बाद में एक दिन उनके आवास के बाहर उधर खड़े हुए जिधर से नेता जी निकलने वाले थे। नेता जी ने उन्हें देखते ही अपना काफिला रुकवा दिया और बोले उमाशंकर कैसे? हालचाल और समस्या पूछी। उन क्षणों को उमाशंकर आज तक नहीं भूल पाए हैं।
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पीलीभीत को शुरू से ही मुलायम सिंह ने काफी तवज्जो दी। यूपी में जहां अन्य जिलों के लोग इस जिले को छोटा कहते थे वहीं मुलायम सिंह यादव ने यहां जमकर मेहनत की। 1983 में पूर्व मंत्री रहे धीरेंद्र सहाय के चुनाव में वह तीन दिन तक जिले में ही डटे रहे। धीरेंद्र सहाय के बेटे मनोज सप्पू बताते हैं कि नेताजी हमेशा से ही सादा जीवन व्यतीत करते थे। उनके घर पर आए तो दरी पर ही लेट गए।
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पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने बताया कि आखिरी बार नेता जी 2014 के लोकसभा चुनाव में गजरौला में आए थे। इससे पहले 2012 में विधान सभा चुनाव में नेताजी आए थे। तब असम चौराहे के पास मैदान पर उन्होंने रैली की थी। जिसमें हजारों की भीड़ जुटी थी। रैली में नेताजी ने जिले की चारों सीटों को जीताने की अपील की थी। उस रैली का नतीजा यह निकला कि पीलीभीत की चार में से तीन पर सपा ने कब्जा कर लिया।
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शहर से हाजी रियाज अहमद, बरखेड़ा से हेमराज वर्मा व पूरनपुर से प्रीतमराम विधायक बने। हेमराज वर्मा बताते हैं कि नेताजी ने हमेशा गरीबों का मुख्य धारा में जोड़ने का काम किया। वह गरीब को भी नेता बनाने का हुनर जानते थे। किसानों के लिए उन्होंने बहुत काम किया। हमेशा सबसे परिवार की तरह मिला करते थे। पीलीभीत में दलित, यादव, ब्राह्मण, मुस्लिम सभी जातियों के प्रति उनका स्नेह था। तराई की जनता भी उन्हें बहुत प्यार करती थी। यही कारण था कि शहर सीट पर साल 2000 के बाद से हाजी रियाज अहमद लगातार तीन बार 15 साल तक विधायक रहे। जिले में काफी संख्या में नेता ऐसे हैं जिनको सामने आने पर वह सीधे नाम लेकर पुकारते थे।
...अरे उमाशंकर यहां कैसे और रुकवा दिया रक्षा मंत्री ने काफिला
पूरनपुर (पीलीभीत)। सपा जिलाध्यक्ष रहे नगर निवासी उमाशंकर यादव ने नेता जी की प्रेरणा से ही राजनीति में 1982 में कदम रखा था। वे बताते है कि 1982 में मुलायम सिंह यादव लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष थे। तब विधानसभा चुनाव में होरीलाल के पक्ष में सभा को संबोधित करने आए थे। अचानक उनके घर नेता जी का भोज का कार्यक्रम रखा गया।
वर्ष 2001 में पत्नी कमला देवी के निधन होने पर नेता जी ने उनके घर आकर शोक संवेदना व्यक्त की थी। उमाशंकर यादव बताते है कि जब नेता जी रक्षा मंत्री बने। तब उनसे मिलने दिल्ली पहुंचे, मगर सुरक्षाकर्मियों ने मिलने ही नहीं दिया। दो दिन तक मिलने की कोशिश करते रहे। आखिर बाद में एक दिन उनके आवास के बाहर उधर खड़े हुए जिधर से नेता जी निकलने वाले थे। नेता जी ने उन्हें देखते ही अपना काफिला रुकवा दिया और बोले उमाशंकर कैसे? हालचाल और समस्या पूछी। उन क्षणों को उमाशंकर आज तक नहीं भूल पाए हैं।

पीलीभीत में 2012 में हुई जनसभा को संबोधित करते पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव। फाइल फोटो- फोटो : PILIBHIT