पीलीभीत के चप्पे-चप्पे पर पीली वर्दी वाले: उत्तराखंड-नेपाल बॉर्डर पर पैनी नजर, 33 साल पहले मारे गए थे 10 आतंकी
33 साल बाद एक बाद फिर से पीलीभीत जिला खालिस्तानी आतंकियों का कब्रगाह बना। 1991 में भी पीलीभीत में 16 घंटे में हुईं तीन अलग-अलग मुठभेड़ों में पुलिस ने पंजाब के 10 खतरनाक आतंकवादियों को मार गिराया था।
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खालिस्तानी आतंकियों से मुठभेड़ के बाद जिले में पुलिस के साथ ही खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। सीमाओं पर सख्ती बढ़ा दी गई है। उत्तराखंड सीमा के साथ ही नेपाल सीमा पर भी सतर्कता बरती जा रही। वाहनों की चेकिंग हो रही है।
मुठभेड़ के बाद अमरिया में रामलीला मैदान के पास हरिद्वार हाईवे और उत्तराखंड बॉर्डर पर वाहनों की सघन चेकिंग की गई। वाहन में कितने लोग और कहां जा रहे हैं? इसकी पड़ताल की गई। मझोला में उत्तराखंड बार्डर के पास भी सख्ती दिखी। जिले में अन्य स्थानों पर भी पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया। मुठभेड़ के बाद से काफी सतर्कता बरती जा रही है।
ऐसे स्थानों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जहां से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की आशंका है। संदिग्ध लोगों पर भी नजर रखी जा रही है। खुफिया एजेंसी के लोग अपने सूत्रों को खंगाल रहे हैं। नेपाल बॉर्डर से आने-जाने वालों पर विशेष निगाह रखी जा रही है।
पीलीभीत में 33 साल पहले भी हुई थी मुठभेड़... मारे गए थे 10 आतंकी
33 साल बाद एक बाद फिर से पीलीभीत जिला खालिस्तानी आतंकियों का कब्रगाह बना। 1991 में भी पीलीभीत में 16 घंटे में हुईं तीन अलग-अलग मुठभेड़ों में पुलिस ने पंजाब के 10 खतरनाक आतंकवादियों को मार गिराया था। इनमें खालिस्तानी लिबरेशन आर्मी के स्वयंभू कमांडर बलजीत सिंह ''पप्पू'' और लेफ्टिनेंट कमांडर जसवंत सिंह भी शामिल थे। मुठभेड़ में सब इंस्पेक्टर हरपाल सिंह भी घायल हुए थे। बता दें सोमवार तड़के हुई मुठभेड़ में भी पंजाब के तीन आतंकी मारे गए हैं।
दरअसल, पीलीभीत, शाहजहांपुर और लखीमपुर खीरी में आतंकवाद की जड़ें पुरानी हैं। तराई का यह इलाका पहले भी आतंकवादियों का सुरक्षित ठिकाना रहा है। आतंकियों ने कई आम लोगों की हत्या की तो सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में कई आतंकियों को ढेर भी किया। 12-13 जुलाई 1991 को होक के जंगल में छिपे आतंकियों को पुलिस ने आत्मसमर्पण करने के लिए कहा तो फायरिंग शुरू कर दी थी। जवाबी फायरिंग में चार आतंकवादी मारे गए थे। इनकी शिनाख्त बलजीत सिंह ''पप्पू'', पंजाब के गुरदासपुर निवासी जसवंत सिंह जद्दा, हरमिंदर सिंह मिंटू और सुरजन सिंह उर्फ बिट्टू के तौर पर हुई थी। बचे आतंकवादी पूरनपुर से पटाभोजी जंगल और फगुनाई जंगल की ओर भागे थे। पूरनपुर के कोतवाल व माधोटांडा के थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस ने पीछा करके चार उग्रवादियों को घेर लिया था। यहां हुई मुठभेड़ में खालिस्तान कमांडो फोर्स के बलविंदर सिंह गिरोह के दो आतंकवादी गुरदासपुर निवासी तरसेम सिंह धारीवाल व करतार सिंह मारे गए थे। उनके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।
पुलिस की दूसरी टीम ने फगुनाई के जंगल में भागे आतंकवादियों को घेर लिया था। यहां हुई मुठभेड़ में खालिस्तान कमांडो फोर्स के जसवंत सिंह फौजी और उसके तीन गुर्गे मारे गए थे। दो की शिनाख्त गुरदासपुर के अजायब सिंह और बचन सिंह के तौर पर हुई थी। एक की पहचान नहीं हो सकी थी। इससे पहले अप्रैल 1990 में पुलिस ने पीलीभीत के जंगल को सील कर दिया था। इस दौरान आईटीबीपी की मदद भी ली गई थी।
उड़ा दिया था पीएसी का ट्रक
दिसंबर 1991 में उग्रवादियों ने हजारा थाना क्षेत्र में शांतिनगर-धनाराघाट मार्ग पर बारूदी सुरंग में रिमोट कंट्रोल से विस्फोट करके पीएसी का ट्रक उड़ा दिया था। इसमें थानाध्यक्ष सहित तीन बलिदान हो गए थे। पीएसी के दो हेड कांस्टेबल और चालक घायल हो गए थे।