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Pilibhit News: बंदूक की कीमत से ज्यादा हो गया किराया, जमा करने के बाद वापस नहीं लौटे शस्त्रधारक
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शहर की गन हाउस में सजे शस्त्र। संवाद
पीलीभीत। आज के दौर में पिस्टल और रिवाल्वर का क्रेज तो बढ़ा, मगर पुराने समय की स्टेटस सिंबल बंदूक से लोगों का ऐसा मोहभंग हुआ कि रखने से भी कतरा रहे हैं। नवीनीकरण की बढ़ी फीस, वारिसान लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया और अन्य दिक्कतें भी मोहभंग की वजह में शामिल हैं।
हाल यह है कि शस्त्रधारकों ने बंदूक गन हाउस पर जमा की फिर वापस ही नहीं ले गए। 15 से 20 हजार रुपये में खरीदी बंदूक का किराया 60 हजार से अधिक हो चुका है। गन हाउस स्वामियों को किराए का भुगतान और शस्त्रधारकों का इंतजार है। (संवाद)
39 वर्षों से जमा 10 बंदूकें, अब तक नहीं मिला किराया
बीसलपुर नगर के राम गन हाउस की मालिक रामरती मिश्रा ने बताया कि उनकी दुकान पर 10 बंदूकें पिछले 39 सालों से जमा हैं। शस्त्रधाारक या उनके वारिस न ही बंदूक ले गए। न ही किराया ही मिला। मौजूदा समय में गन हाउस में एक बंदूक का किराया 2400 रुपये सालाना है। पुराने समय में यह कुछ कम रहा था। अगर 39 वर्षों की बात करें तो 60 हजार के करीब किराया हो गया है। उस समय बंदूक की कीमत 15 से 20 हजार ही रही होगी। नगर के एक बड़े व्यापारी की बंदूक भी 25 वर्ष से जमा है। संपन्न होने के बाद भी व्यापारी भी किराया नहीं दे रहा।
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बंदूक ले जा रहे और न दे रहे किराया
बीसलपुर नगर के ही राकेश गन हाउस के मालिक राकेश मिश्रा ने बताया कि उनकी दुकान पर मोहल्ला दुबे के एक करोड़पति व्यक्ति की बंदूक 15 वर्षों से जमा है। वह व्यक्ति न बंदूक ले जा रहा है और न ही किराया ही दे रहा है। यह भी बताया कि उनकी दुकान पर गांव कासिमपुर के एक ग्रामीण की राइफल 20 वर्षों से जमा है।इसका किराया भी नहीं जमा कर रहा है।
बंदूक जमा की और पलट के नहीं देखा
शहर में पंजाब गन हाउस के स्वामी जी एस विंद्रा ने बताया कि लोगों का बंदूकों से मोहभंग हो गया है। काफी संख्या में बंदूकें लंबे समय से जमा हैं। इनमें कुछ शस्त्रधारकों की मृत्यु भी हो चुकी है। उनके वारिस बंदूक जमा कर गए और फिर वापस नहीं आए। बरखेड़ा क्षेत्र की एक बंदूक 2012 से जमा है। 25 हजार से अधिक किराया हो चुका है। न्यूरिया क्षेत्र की एक बंदूक 2015 से जमा है। बरखेड़ा क्षेत्र की एक अन्य बंदूक भी 13 वर्षों से जमा है। मृतक शस्त्रधारक की पत्नी ने 2012 में एक राइफल जमा की थी। इसी तरह कई अन्य बंदूकों के स्वामी भी किराया तो दूर शस्त्र देखने तक नहीं आए। इस तरह की बंदूकों की संख्या काफी अधिक है।
पुलिस और प्रशासन को सूचना, शस्त्रधारकों से संपर्क का प्रयास
गन हाउस के मालिकों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को ऐसे शस्त्रों को मालखाना में जमा कराने के मकसद से सूचना दे चुके हैं। उनकी दुकानों के निरीक्षण के समय भी बताया जाता है। साथ ही अपने स्तर से शस्त्रधारकों से संपर्क करने का प्रयास किया जाता है। गन हाउस स्वामियों का कहना है कि कम से कम कुछ किराया ही मिलता रहे तो अच्छा है।
इन कारणों ने भी बढ़ाई शस्त्रधारकों की मुश्किलें
- पांच वर्ष पर लाइसेंस का नवीनीकरण कराना होता है। पिछले कुछ वर्षों में नवीनकरण की बढ़ी फीस, कागज और अन्य प्रक्रिया में बदलाव भी इसकी वजह है।
- मृत शस्त्रधारकों के वारिसान के लाइसेंस की प्रक्रिया भी नए लाइसेंस की तरह ही है।
- बंदूक का क्रेज भी अब अधिक नहीं रहा है। दुकान पर लंबे समय से जमा होने से बढ़ा किराया भी बड़ी वजह बन गया है।
पूरनपुर और कुछ अन्य स्थानों के गन हाउस स्वामियों ने बंदूक जमा करने के बाद शस्त्रधारकों की ओर से सुध न लेने और किराया जमा होने की समस्या बताई है। इन शस्त्रधारकों की सूची मांगी है। संबंधित थाना पुलिस के माध्यम से इनका पता कराकर नोटिस जारी की जाएगी। गन हाउस स्वामियों को राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।- विजय वर्धन तोमर, सिटी मजिस्ट्रेट, पीलीभीत
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हाल यह है कि शस्त्रधारकों ने बंदूक गन हाउस पर जमा की फिर वापस ही नहीं ले गए। 15 से 20 हजार रुपये में खरीदी बंदूक का किराया 60 हजार से अधिक हो चुका है। गन हाउस स्वामियों को किराए का भुगतान और शस्त्रधारकों का इंतजार है। (संवाद)
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39 वर्षों से जमा 10 बंदूकें, अब तक नहीं मिला किराया
बीसलपुर नगर के राम गन हाउस की मालिक रामरती मिश्रा ने बताया कि उनकी दुकान पर 10 बंदूकें पिछले 39 सालों से जमा हैं। शस्त्रधाारक या उनके वारिस न ही बंदूक ले गए। न ही किराया ही मिला। मौजूदा समय में गन हाउस में एक बंदूक का किराया 2400 रुपये सालाना है। पुराने समय में यह कुछ कम रहा था। अगर 39 वर्षों की बात करें तो 60 हजार के करीब किराया हो गया है। उस समय बंदूक की कीमत 15 से 20 हजार ही रही होगी। नगर के एक बड़े व्यापारी की बंदूक भी 25 वर्ष से जमा है। संपन्न होने के बाद भी व्यापारी भी किराया नहीं दे रहा।
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बंदूक ले जा रहे और न दे रहे किराया
बीसलपुर नगर के ही राकेश गन हाउस के मालिक राकेश मिश्रा ने बताया कि उनकी दुकान पर मोहल्ला दुबे के एक करोड़पति व्यक्ति की बंदूक 15 वर्षों से जमा है। वह व्यक्ति न बंदूक ले जा रहा है और न ही किराया ही दे रहा है। यह भी बताया कि उनकी दुकान पर गांव कासिमपुर के एक ग्रामीण की राइफल 20 वर्षों से जमा है।इसका किराया भी नहीं जमा कर रहा है।
बंदूक जमा की और पलट के नहीं देखा
शहर में पंजाब गन हाउस के स्वामी जी एस विंद्रा ने बताया कि लोगों का बंदूकों से मोहभंग हो गया है। काफी संख्या में बंदूकें लंबे समय से जमा हैं। इनमें कुछ शस्त्रधारकों की मृत्यु भी हो चुकी है। उनके वारिस बंदूक जमा कर गए और फिर वापस नहीं आए। बरखेड़ा क्षेत्र की एक बंदूक 2012 से जमा है। 25 हजार से अधिक किराया हो चुका है। न्यूरिया क्षेत्र की एक बंदूक 2015 से जमा है। बरखेड़ा क्षेत्र की एक अन्य बंदूक भी 13 वर्षों से जमा है। मृतक शस्त्रधारक की पत्नी ने 2012 में एक राइफल जमा की थी। इसी तरह कई अन्य बंदूकों के स्वामी भी किराया तो दूर शस्त्र देखने तक नहीं आए। इस तरह की बंदूकों की संख्या काफी अधिक है।
पुलिस और प्रशासन को सूचना, शस्त्रधारकों से संपर्क का प्रयास
गन हाउस के मालिकों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को ऐसे शस्त्रों को मालखाना में जमा कराने के मकसद से सूचना दे चुके हैं। उनकी दुकानों के निरीक्षण के समय भी बताया जाता है। साथ ही अपने स्तर से शस्त्रधारकों से संपर्क करने का प्रयास किया जाता है। गन हाउस स्वामियों का कहना है कि कम से कम कुछ किराया ही मिलता रहे तो अच्छा है।
इन कारणों ने भी बढ़ाई शस्त्रधारकों की मुश्किलें
- पांच वर्ष पर लाइसेंस का नवीनीकरण कराना होता है। पिछले कुछ वर्षों में नवीनकरण की बढ़ी फीस, कागज और अन्य प्रक्रिया में बदलाव भी इसकी वजह है।
- मृत शस्त्रधारकों के वारिसान के लाइसेंस की प्रक्रिया भी नए लाइसेंस की तरह ही है।
- बंदूक का क्रेज भी अब अधिक नहीं रहा है। दुकान पर लंबे समय से जमा होने से बढ़ा किराया भी बड़ी वजह बन गया है।
पूरनपुर और कुछ अन्य स्थानों के गन हाउस स्वामियों ने बंदूक जमा करने के बाद शस्त्रधारकों की ओर से सुध न लेने और किराया जमा होने की समस्या बताई है। इन शस्त्रधारकों की सूची मांगी है। संबंधित थाना पुलिस के माध्यम से इनका पता कराकर नोटिस जारी की जाएगी। गन हाउस स्वामियों को राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।- विजय वर्धन तोमर, सिटी मजिस्ट्रेट, पीलीभीत

शहर की गन हाउस में सजे शस्त्र। संवाद