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धान केंद्र प्रभारी और सचिव पर रिश्वत मांगने का आरोप
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पीलीभीत। धान खरीद में तौल के नाम पर सुविधा शुल्क मांगने का एक नया मामला सामने आया है। शिवनगर गांव में लगे पीसीयू के केंद्र प्रभारी और सचिव पर 200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से रिश्वत मांगने और न देने पर धान की तौल न करने का आरोप लगा है। मामले की शिकायत डिप्टी आरएमओ से की गई है।
कलीनगर तहसील के कस्बा माधोटांडा के निवासी किसान कमलजीत सिंह पुत्र अमरीक सिंह ने शुक्रवार को डिप्टी आरएमओ को दिए शिकायती पत्र में बताया कि शिवनगर गांव में पीसीयू का क्रय केंद्र बना है। दस दिन पहले वह अपना दो ट्रॉली धान क्रय केंद्र पर तौल कराने के लिए ले गए थे। क्रय केंद्र प्रभारी ने दो सौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से रिश्वत मांगी। सचिव ने भी रिश्वत देने का दबाव बनाया। जब रिश्वत देने में असमर्थता जताई तो धान की तौल नहीं की। कई दिन तक धान सेंटर पर पड़ा रहा। फिर मजबूरन पीड़ित ने रुपये के बजाय उतना धान काटने की बात कह दी। मगर क्रय केंद्र प्रभारी और सचिव रुपये देने का ही दबाव बनाते रहे। इसके बिना धान की तौल करने से इनकार कर दिया। वसूली के लिए एक निजी व्यक्ति भी क्रय केंद्र पर लगाया गया है। दस दिन तक सभी उत्पीड़न करते रहे और धान भी नहीं तौला। मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
उधर, डिप्टी आरएमओ डॉ. अविनाश झा ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आया है। सुविधा शुल्क न देने पर धान की तौल न करने की बात किसान ने कही है। वहीं यह भी पता लगा है कि धान रिजेक्ट किया गया था। ऐसे में कहीं गलत तरीके से तो धान रिजेक्ट नहीं किया गया। इसकी जांच कराने के लिए जिला प्रबंधक को निर्देशित किया गया है। अगर गड़बड़ी निकलती है, तो सख्त कार्रवाई होगी।
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कलीनगर तहसील के कस्बा माधोटांडा के निवासी किसान कमलजीत सिंह पुत्र अमरीक सिंह ने शुक्रवार को डिप्टी आरएमओ को दिए शिकायती पत्र में बताया कि शिवनगर गांव में पीसीयू का क्रय केंद्र बना है। दस दिन पहले वह अपना दो ट्रॉली धान क्रय केंद्र पर तौल कराने के लिए ले गए थे। क्रय केंद्र प्रभारी ने दो सौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से रिश्वत मांगी। सचिव ने भी रिश्वत देने का दबाव बनाया। जब रिश्वत देने में असमर्थता जताई तो धान की तौल नहीं की। कई दिन तक धान सेंटर पर पड़ा रहा। फिर मजबूरन पीड़ित ने रुपये के बजाय उतना धान काटने की बात कह दी। मगर क्रय केंद्र प्रभारी और सचिव रुपये देने का ही दबाव बनाते रहे। इसके बिना धान की तौल करने से इनकार कर दिया। वसूली के लिए एक निजी व्यक्ति भी क्रय केंद्र पर लगाया गया है। दस दिन तक सभी उत्पीड़न करते रहे और धान भी नहीं तौला। मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
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उधर, डिप्टी आरएमओ डॉ. अविनाश झा ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आया है। सुविधा शुल्क न देने पर धान की तौल न करने की बात किसान ने कही है। वहीं यह भी पता लगा है कि धान रिजेक्ट किया गया था। ऐसे में कहीं गलत तरीके से तो धान रिजेक्ट नहीं किया गया। इसकी जांच कराने के लिए जिला प्रबंधक को निर्देशित किया गया है। अगर गड़बड़ी निकलती है, तो सख्त कार्रवाई होगी।
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