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सपाइयों ने छोटे लोहिया को पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि
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पीलीभीत। समाजवादी पार्टी ने 10 वीं पुण्यतिथि पर समाजवादी चिंतक जनेश्वर मिश्र उर्फ छोटे लोहिया के योगदान को बुधवार को याद किया गया। पूर्व मंत्री हाजी रियाज अहमद ने कहा कि जब 1992 में सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के जेल जाने की सूचना मिली तो जनेश्वर मिश्र की पत्नी की तबीयत बहुत खराब थी, लेकिन छोटे लोहिया ने घर परिवार की परवाह न करके समाजवादी आंदोलन में शामिल होकर अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया था।
नकटादाना स्थित पार्टी कार्यालय पर आयोजित पुण्यतिथि पर सपाइयों ने छोटे लोहिया को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके समाजवादी आंदोलन में योगदान पर प्रकाश डाला। निवर्तमान जिला अध्यक्ष आनंद सिंह यादव की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में पूर्व मंत्री हाजी रियाज अहमद ने कहा कि 1992 के आंदोलन में जब नेताजी जेल चले गए तो आंदोलन की कमान खुद जनेश्वर मिश्र ने संभाल ली। इस आंदोलन में वह खुद भी जेल चले गए। जेल में उन्हें पत्नी की मृत्यु की सूचना मिली, लेकिन उन्होंने मुलायम सिंह यादव को जेल से रिहा किए बिना खुुद की पैरोल लेने से मना कर दिया। ऐसे थे समाजवादी चिंतक जनेश्वर मिश्र। पूर्व राज्य मंत्री हेमराज वर्मा ने कहा जनेश्वर मिश्र कई बार राज्यसभा सदस्य और कैबिनेट मंत्री, लेकिन उनके मन में गरीब कमजोर और पीड़ितों के लिए दया हमेशा रही। समाजवाद की लड़ाई में उनका योगदान हमेशा प्रेरणादायक रहेगा।
निवर्तमान जिलाध्यक्ष आनंद सिंह यादव ने कहा जनेश्वर मिश्र का जीवन सादगी और ईमानदारी का प्रतीक था। समाजवादी आंदोलन में जनेश्वर मिश्र पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने में पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव के कंधे से कंधा मिलाकर चले। इस मौके पर वरिष्ठ नेता अशोक शंभा, नरेंद्र मिश्रा कट्टर, डॉ. राम मूर्ति गंगवार, सुरेश कश्यप, अरुण वर्मा, श्यामाचरण गंगवार, सुखलाल गंगवार ,विवेक यादव ने भी विचार रखे। फरवरी के बाद तीन दिवसीय जनपद में समाजवादी प्रशिक्षण शिविर लगाने का निर्णय लिया।
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नकटादाना स्थित पार्टी कार्यालय पर आयोजित पुण्यतिथि पर सपाइयों ने छोटे लोहिया को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके समाजवादी आंदोलन में योगदान पर प्रकाश डाला। निवर्तमान जिला अध्यक्ष आनंद सिंह यादव की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में पूर्व मंत्री हाजी रियाज अहमद ने कहा कि 1992 के आंदोलन में जब नेताजी जेल चले गए तो आंदोलन की कमान खुद जनेश्वर मिश्र ने संभाल ली। इस आंदोलन में वह खुद भी जेल चले गए। जेल में उन्हें पत्नी की मृत्यु की सूचना मिली, लेकिन उन्होंने मुलायम सिंह यादव को जेल से रिहा किए बिना खुुद की पैरोल लेने से मना कर दिया। ऐसे थे समाजवादी चिंतक जनेश्वर मिश्र। पूर्व राज्य मंत्री हेमराज वर्मा ने कहा जनेश्वर मिश्र कई बार राज्यसभा सदस्य और कैबिनेट मंत्री, लेकिन उनके मन में गरीब कमजोर और पीड़ितों के लिए दया हमेशा रही। समाजवाद की लड़ाई में उनका योगदान हमेशा प्रेरणादायक रहेगा।
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निवर्तमान जिलाध्यक्ष आनंद सिंह यादव ने कहा जनेश्वर मिश्र का जीवन सादगी और ईमानदारी का प्रतीक था। समाजवादी आंदोलन में जनेश्वर मिश्र पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने में पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव के कंधे से कंधा मिलाकर चले। इस मौके पर वरिष्ठ नेता अशोक शंभा, नरेंद्र मिश्रा कट्टर, डॉ. राम मूर्ति गंगवार, सुरेश कश्यप, अरुण वर्मा, श्यामाचरण गंगवार, सुखलाल गंगवार ,विवेक यादव ने भी विचार रखे। फरवरी के बाद तीन दिवसीय जनपद में समाजवादी प्रशिक्षण शिविर लगाने का निर्णय लिया।
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