{"_id":"5e0f7a2f8ebc3e87cb39cdf7","slug":"others-in-pilibhit-pilibhit-news-bly3905771106","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिछले साल 20.73 लाख पौधे.लगाए,....70 फीसदी पौधों का नामोनिशान मिट गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिछले साल 20.73 लाख पौधे.लगाए,....70 फीसदी पौधों का नामोनिशान मिट गया
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पीलीभीत। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते साल जुलाई में पौधरोपण अभियान पूरे प्रदेश में जोर-शोर से चलाया था। उसके तहत पीलीभीत में भी नौ अगस्त को केवल एक दिन में 20.73 लाख से पौधे लगाने के दावे किए गए। हालांकि दावे हकीकत के बजाय कागजों में ही ज्यादा थे। न ठीक से पौधे लगे, न कहीं ग्रीन बेल्ट बनी। अब हाल यह है कि मौके पर करीब 70 फीसदी पौधे नहीं हैं।
वन विभाग के अफसरों का दावा है कि ये पौधे देखभाल न होने की वजह से चले नहीं। मगर, इन दावों को सच मान भी लिया जाए तो जब पौधे लगाने से ज्यादा उनको जिंदा रखने की बात पहले ही हो चुकी थी तो उनकी देखभाल क्यों नहीं की गई। फिलहाल, जो पौधे रोपे भी गए, उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया। जिन जगह पौधरोपण कराया गया था वहां पौधों का नामोनिशान तक नहीं है। शुक्रवार को पौधरोपण की हकीकत का अमर उजाला की टीम ने जायजा लिया तो हालात चौंकाने वाले दिखे। शहर में सड़कों के किनारे, खलिहानों और चरागाहों की जमीनों पर रोपे गए पौधे ढूंढने से भी नहीं मिले। शासन से जनपद को 20.73 लाख पौधे रोपे जाने का लक्ष्य दिया गया था। इसमें वन विभाग के अलावा सहकारिता, पावर कॉरपोरेशन, श्रम, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरपालिका, पुलिस, उद्यान विभाग समेत विभिन्न सरकारी विभागों को पौधे लगाने थे। फिलहाल तो किसी भी विभाग में पिछले कराया गया पौधरोपण देखने को नहीं मिला।
पीलीभीत शहर : ट्री गार्ड ..पौधों की जगह नजर आए सिर्फ गड्ढे
नगरपालिका के पौधरोपण की पड़ताल की तो पता चला कि संस्था ने नगरपालिका कैंपस, दूधिया मंदिर, जिला अस्पताल रोड, टनकपुर हाईवे के किनारे, वॉटर वर्क्स कंपाउंड में 5700 पौधे रोपे थे। अब मौके पर एक भी पौधा देखने को नहीं मिला। जिला अस्पताल रोड के किनारे नगरपालिका ने पौधे लगाए थे। यहां अब ट्री गार्ड तो खड़े मिले, लेकिन इनमें पौधा लगा नहीं पाया गया। कुछ ट्री गार्डों में पौधों की सूखी ठूंठ नजर आई। नगर पालिका कैंपस और वॉटर वर्क्स में पौधरोपण नष्ट कर उनके स्थान पर वॉटर टैंकों का निर्माण करा दिया गया। यही हाल शिक्षा, सहकारिता, कृषि समेत अन्य विभागों के पौधरोपण का मिला। मनरेगा से गड्ढे खुदवाकर पौधे लगवाने के नाम पर भारी गोलमाल किया गया। ईओ निशा मिश्रा ने बताया कि पिछले वर्ष जिन स्थानों पर पौधरोपण कराया था उनमें अधिकांश पौधे अब भी ठीक अवस्था में हैं। जहां-जहां पौधे नष्ट हो गए, वहां जगह दिखवाकर उनकी जगह नए पौधों को लगवाया जाएगा।
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पूरनपुर: पौधे लगाने के बाद देखना भूल गए
पूरनपुर। नौ अगस्त को असम हाईवे पर हरियाली बाजार के समीप, घाटमपुर, जमुनिया जगतपुर, माधोटांडा सहित अन्य स्थानों पर सामाजिक वानिकी की ओर से 18700 पौधे रोपे गए। इसी दिन गन्ना कृषक महाविद्यालय, लक्ष्य डिग्री कॉलेज, जेसीज रिवर्डेल इंटर कॉलेज, गांव रघुनाथपुर के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूल, विद्युत उपकेंद्र, खंड विकास कार्यालय, नगर और देहात के स्कूलों, ग्राम पंचायतों में भी पौधे रोपे गए। कुछ पौधों की देखरेख ठीक ढंग से हुई। मगर अधिकांश स्थानों पर देखरेख न होने से पौधे नष्ट हो गए। असम हाईवे पर हरियाली बाजार के समीप रोपे गए पौधों की सुरक्षा को तार फेंसिंग की गई, लेकिन कुछ दिन बाद तारों को काटकर लोगों ने गायब कर दिया। तमाम पौधों को जानवर खा गए। सामाजिक वानिकी रेंजर गोविंद राम ने बताया कि रोपे गए पौधों की देखरेख का जिम्मा कर्मचारियों को दिया गया। तार फेंसिंग भी कराई गई। कुछ पौधे तो नष्ट हुए, लेकिन बाकी जिंदा हैं।
बीसलपुर: 100 पौधे लगाए थे...बचा एक भी नहीं
बीसलपुर। नौ अगस्त को तहसील मेें विभिन्न प्रजातियों के 30860 पौधे लगवाए थे। रेंजर वजीर हसन के अनुसार ये सारे पौधे जीवित हैं। वन विभाग ने ये पौधे पीलीभीत रेलवे लाइन, शाहजहांपुर रेलवे लाइन, पीलीभीत रोड, शाहजहापुंर रोड, बिलसंडा रोड, बरेली रोड, खुदागंज रोड, कितनापुर रोड, रंपुरा रोड, गजरौला रोड, और दियोरिया रोड आदि इलाकों में लगवाए थे। इसके अलावा करीब इतने ही पौधे विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और संस्थाओं में संबंधित विभागों द्वारा लगवाए गए। इनमें से अधिकांश पौधे नष्ट हो चुके हैं। ग्यासपुर सहकारी समिति के अध्यक्ष कामता प्रसाद वर्मा ने बताया कि उनकी समिति में 100 में से एक भी पौधा जीवित नहीं है। बिलसंडा सहकारी समिति के प्रबंध निदेशक विजय सक्सेना ने बताया कि उनकी समिति में 50 में से 15 पौधे जीवित हैं। सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव आरपी कुशवाहा ने बताया कि उनकी समिति में 50 में से गिने चुने पौधे ही जीवित हैं।
वृहद पौधरोपण अभियान के तहत पिछले साल अगस्त में लक्ष्य से अधिक पौधे रोपे गए थे। यह कहना गलत होगा कि सब पौधे जिंदा हैं। हां, कुछ पौध नष्ट हुए हैं। पौधरोपण की क्रॉस चेकिंग की जा रही है। जहां पौधे नष्ट हुए हैं संबंधित विभाग वहां दोबारा पौधे लगवाएगा। -संजीव कुमार, प्रभागीय निदेशक, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन
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वन विभाग के अफसरों का दावा है कि ये पौधे देखभाल न होने की वजह से चले नहीं। मगर, इन दावों को सच मान भी लिया जाए तो जब पौधे लगाने से ज्यादा उनको जिंदा रखने की बात पहले ही हो चुकी थी तो उनकी देखभाल क्यों नहीं की गई। फिलहाल, जो पौधे रोपे भी गए, उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया। जिन जगह पौधरोपण कराया गया था वहां पौधों का नामोनिशान तक नहीं है। शुक्रवार को पौधरोपण की हकीकत का अमर उजाला की टीम ने जायजा लिया तो हालात चौंकाने वाले दिखे। शहर में सड़कों के किनारे, खलिहानों और चरागाहों की जमीनों पर रोपे गए पौधे ढूंढने से भी नहीं मिले। शासन से जनपद को 20.73 लाख पौधे रोपे जाने का लक्ष्य दिया गया था। इसमें वन विभाग के अलावा सहकारिता, पावर कॉरपोरेशन, श्रम, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरपालिका, पुलिस, उद्यान विभाग समेत विभिन्न सरकारी विभागों को पौधे लगाने थे। फिलहाल तो किसी भी विभाग में पिछले कराया गया पौधरोपण देखने को नहीं मिला।
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पीलीभीत शहर : ट्री गार्ड ..पौधों की जगह नजर आए सिर्फ गड्ढे
नगरपालिका के पौधरोपण की पड़ताल की तो पता चला कि संस्था ने नगरपालिका कैंपस, दूधिया मंदिर, जिला अस्पताल रोड, टनकपुर हाईवे के किनारे, वॉटर वर्क्स कंपाउंड में 5700 पौधे रोपे थे। अब मौके पर एक भी पौधा देखने को नहीं मिला। जिला अस्पताल रोड के किनारे नगरपालिका ने पौधे लगाए थे। यहां अब ट्री गार्ड तो खड़े मिले, लेकिन इनमें पौधा लगा नहीं पाया गया। कुछ ट्री गार्डों में पौधों की सूखी ठूंठ नजर आई। नगर पालिका कैंपस और वॉटर वर्क्स में पौधरोपण नष्ट कर उनके स्थान पर वॉटर टैंकों का निर्माण करा दिया गया। यही हाल शिक्षा, सहकारिता, कृषि समेत अन्य विभागों के पौधरोपण का मिला। मनरेगा से गड्ढे खुदवाकर पौधे लगवाने के नाम पर भारी गोलमाल किया गया। ईओ निशा मिश्रा ने बताया कि पिछले वर्ष जिन स्थानों पर पौधरोपण कराया था उनमें अधिकांश पौधे अब भी ठीक अवस्था में हैं। जहां-जहां पौधे नष्ट हो गए, वहां जगह दिखवाकर उनकी जगह नए पौधों को लगवाया जाएगा।
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पूरनपुर: पौधे लगाने के बाद देखना भूल गए
पूरनपुर। नौ अगस्त को असम हाईवे पर हरियाली बाजार के समीप, घाटमपुर, जमुनिया जगतपुर, माधोटांडा सहित अन्य स्थानों पर सामाजिक वानिकी की ओर से 18700 पौधे रोपे गए। इसी दिन गन्ना कृषक महाविद्यालय, लक्ष्य डिग्री कॉलेज, जेसीज रिवर्डेल इंटर कॉलेज, गांव रघुनाथपुर के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूल, विद्युत उपकेंद्र, खंड विकास कार्यालय, नगर और देहात के स्कूलों, ग्राम पंचायतों में भी पौधे रोपे गए। कुछ पौधों की देखरेख ठीक ढंग से हुई। मगर अधिकांश स्थानों पर देखरेख न होने से पौधे नष्ट हो गए। असम हाईवे पर हरियाली बाजार के समीप रोपे गए पौधों की सुरक्षा को तार फेंसिंग की गई, लेकिन कुछ दिन बाद तारों को काटकर लोगों ने गायब कर दिया। तमाम पौधों को जानवर खा गए। सामाजिक वानिकी रेंजर गोविंद राम ने बताया कि रोपे गए पौधों की देखरेख का जिम्मा कर्मचारियों को दिया गया। तार फेंसिंग भी कराई गई। कुछ पौधे तो नष्ट हुए, लेकिन बाकी जिंदा हैं।
बीसलपुर: 100 पौधे लगाए थे...बचा एक भी नहीं
बीसलपुर। नौ अगस्त को तहसील मेें विभिन्न प्रजातियों के 30860 पौधे लगवाए थे। रेंजर वजीर हसन के अनुसार ये सारे पौधे जीवित हैं। वन विभाग ने ये पौधे पीलीभीत रेलवे लाइन, शाहजहांपुर रेलवे लाइन, पीलीभीत रोड, शाहजहापुंर रोड, बिलसंडा रोड, बरेली रोड, खुदागंज रोड, कितनापुर रोड, रंपुरा रोड, गजरौला रोड, और दियोरिया रोड आदि इलाकों में लगवाए थे। इसके अलावा करीब इतने ही पौधे विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और संस्थाओं में संबंधित विभागों द्वारा लगवाए गए। इनमें से अधिकांश पौधे नष्ट हो चुके हैं। ग्यासपुर सहकारी समिति के अध्यक्ष कामता प्रसाद वर्मा ने बताया कि उनकी समिति में 100 में से एक भी पौधा जीवित नहीं है। बिलसंडा सहकारी समिति के प्रबंध निदेशक विजय सक्सेना ने बताया कि उनकी समिति में 50 में से 15 पौधे जीवित हैं। सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव आरपी कुशवाहा ने बताया कि उनकी समिति में 50 में से गिने चुने पौधे ही जीवित हैं।
वृहद पौधरोपण अभियान के तहत पिछले साल अगस्त में लक्ष्य से अधिक पौधे रोपे गए थे। यह कहना गलत होगा कि सब पौधे जिंदा हैं। हां, कुछ पौध नष्ट हुए हैं। पौधरोपण की क्रॉस चेकिंग की जा रही है। जहां पौधे नष्ट हुए हैं संबंधित विभाग वहां दोबारा पौधे लगवाएगा। -संजीव कुमार, प्रभागीय निदेशक, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन