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उन्नाव पीड़िता की दर्दनाक मौत से एक बार फिर सिस्टम पर सवाल

Sun, 08 Dec 2019 06:48 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 08 Dec 2019 06:48 PM IST
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पीलीभीत। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की इलाज के दौरान दिल्ली के अस्पताल में मौत होने के बाद आधी आबादी समेत समाज के सभ्य वर्ग में एक बार फिर जबरदस्त आक्रोश है। एक दिन पहले हैदराबाद कांड के चारों आरोपियों के एनकाउंटर पर जहां लोग राहत महसूस कर न्याय बताने में लगे थे, वहीं उन्नाव रेप पीड़िता के मामले में आधी आबादी समेत अन्य लोग भी बोले- भले ही हैदराबाद एनकाउंटर कानूनी तौर पर गलत हो, मगर, अदालतों में लंबित केस जल्द निपटाकर दरिंदों को जल्द सजा मिलेगी, तभी वह न्याय समझा जाएगा। देर से मिला न्याय अन्याय के बराबर है। उन्नाव कांड के बाद फिर महिला सुरक्षा पर बात तेज है। आधी आबादी भी इन घटनाओं को लेकर आक्रोशित है। महिलाओं का कहना है कि देश में ऐसी व्यवस्था हो कि निर्भया और हैदराबाद जैसे कांड को दोहराया न जा सके। किसी के साथ कोई दरिंदगी होने पर उसे न्याय पाने के लिए भटकना न पड़े। सख्त कानून बनाने से अधिक इसका पालन कराने में चुस्ती दिखाई जाए। शहर के प्रबुद्ध वर्ग से अमर उजाला ने उन्नाव की पड़िता के मामले पर बातचीत की।
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उन्नाव में दुष्कर्म पीड़िता की जलाकर हत्या की घटना सिस्टम पर सवाल है। नृशंस तरीके से की गई हत्या के आरोपियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। इसमें समय बरवाद न किया जाए। - शबानाज, छात्रा, चंदोई
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दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं, लेकिन इनमें सुधार की जरूरत है। कोर्ट में सुनवाई समय से होनी चाहिए, ताकि दरिंदों को सख्त सजा जल्द मिल सके। - बुसरा, छात्रा, चंदोई
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इस तरह की घटनाओं पर हैदराबाद पुलिस ने जो किया वह गलत नहीं है। सिस्टम कमियों को दूर करे, ताकि ऐसी नौबत न आए। इतना जरूर है कि अब लड़कियों को खुद को मजबूत करने की जरूरत है। - छाया, छात्रा, गौहनिया
घटनाओं के बाद बेवजह की राजनीति तो हो रही है, लेकिन सुधार को राजनीति खमोश है। कुछ के बयान तो गंदी सोच को दर्शाते हैं। उनको भी खुद का सुधार करने की जरूरत है। -रितिका शुक्ला, छात्रा, जमुनी चौराहा
घटना को रोकने के साथ ही ऐसा काम किया जाए कि पीड़िता को खुद के साथ हुए अन्याय को साबित करने में दिक्कत न आए। कई बार तो उसको दर्द साबित करना ही चुनौती बन जाता है। इस बेपटरी सिस्टम में भी सुधार हो। - पिंकी कौर, छात्रा, खकरा
महिला सुरक्षा के नाम पर बहस नहीं काम किया जाए। ऐसे बंदोबस्त हो कि घर से निकलने के बाद उनको सुरक्षित माहौल का अहसास हो और इस तरह की घिनौनी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। - पिंकी देवल, गृहणी, खकरा
हैदराबाद पुलिस का न्याय सही था, लेकिन यह भी सत्य है कि ऐसे हर किसी को नहीं कर सकते। इसलिए ऐसा कदम उठाया जाए कि कोई और निर्भया दरिंदों की भेंट न चढ़ पाए। - कंचन गोयल, गृहणी, मोहल्ला डोरीलाल
बात सिर्फ सख्त कानून बनाने की नहीं है। पहले से कई कानून हैं। सिस्टम चुस्त करें, ताकि त्वरित न्याय मिले। अपराधी से अधिक पीड़िताओं को परेशान होना पड़ता है। - स्वीटी अग्रवाल, गृहणी, साहूकारा
ये घटनाएं सिस्टम की कमी का नतीजा हैं। इसका खामियाजा हैदराबाद या उन्नाव की पीड़िताओं को भुगतना पड़ता है। सजा की बात नहीं, धरातल पर काम होना चाहिए। - शेषा मिश्रा, गृहणी, गोदावरी इस्टेट कॉलोनी
दरिंदगी की घटनाएं रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। कानूनों का सख्ती से पालन हो, तभी सुधार आ सकता है। ओछी सोच रखने वालों का समाज से तिरस्कार करना चाहिए। - अमृतलाल, समाजसेवी, राजा बाग कॉलोनी

बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ के नारे के साथ काम करने वाली सरकार ऐसी घटनाएं रोकने के लिए तुरंत हल निकाले। सिस्टम कमियां दूर करे। समाज भी भागीदारी निभाए। अच्छे परिणाम जरूर आएंगे। - डॉ.एसके शर्मा, रिटायर्ड प्रोफेसर, उपाधि कॉलेज
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