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Pilibhit News: होली पर गमी वाले घरों में लोकगीत गाकर बांटते हैं खुशी
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बीसलपुर में चौपाई का प्रदर्शन कर गमी मिटाते कलाकार फाइल फोटो
बीसलपुर। होली पर गमी वाले घरों में पहुंचकर लोकगीत गाकर शोक खत्म कराने के लिए चौपाई गायन की परंपरा करीब 200 वर्ष पुरानी है। इन टोलियों के ऐसा करने से समाज को नई दिशा मिल रही है।
नगर के कुछ मोहल्लों और तहसील क्षेत्र के अधिकांश गांवों में चौपाई टोलियां बनी हुई हैं। इन टोलियों के कलाकार होली पर गमी वाले घर में जाकर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। संबंधित घरों के लोग इन कलाकारों को मिठाई खिलाते और इनाम देते हैं। ये टोलियां लोकगीतों के माध्यम से दुख भूल कर पर्व की खुशी मनाने का संदेश देती हैं। माना जाता है कि चौपाई गायन के बाद संबंधित घरों की गमी दूर हो जाती है। उन घरों में पूड़ी पकवान बनने लगते हैं। गमी की वजह से जिन परिवारों यह पर्व नहीं मनाया जाता है। वहां के लोग इन कलाकारों को आमंत्रित करते हैं। इन टोलियों में 10 से 15 कलाकार होते हैं। कलाकार घरों के दरवाजे पर ग्रामीण अंदाज में नृत्य करने के साथ लोकगीत गाते हैं। संवाद
इन स्थानों पर हैं चौपाई दल
नगर के मोहल्ला दुबे, खेड़ा, दुर्गा प्रसाद, ग्यासपुर, हबीबुल्लाह खान शुमाली के अलावा शादीपुर, पिपरिया, रामभुजा, टिहरी, मानपुर नगरिया, रामपुर फतेहपुर, नवदिया सितारगंज, नवदिया भगत, गोवल, पतिपुरा, मंडरा सुमन, चुटकुना, चंद्रपुर खांड़ेपुर, जसौली, कासिमपुर, अमरा करोड, हाफिज नगर, बरखेड़ा यासीन और गांगूपुर।
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कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मी भी हैं शामिल
इन दलों में इन चौपाई दलों में कुछ कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं। गांव खांड़ेपुर निवासी डाक विभाग में कर्मचारी कुलिंदर पाल, गांव बरखेड़ा यासीन निवासी शिक्षक कृष्ण पाल, गांव नवदिया भगत के सेवानिवृत्त शिक्षक तेजराम गंगवार अपने अपने गांव के चौपाई दलों में शामिल हैं।
वाद्य यंत्रों से कलाकार रहते हैं लैस
चौपाई दलों के कलाकार हारमोनियम, ढोलक, झांझ, घुंघरू और मंजीरा जैसे वाद्य यंत्र से लैस रहते हैं। अधिकांश कलाकारों के हाथों में मोर पंख भी रहते हैं। कुछ कलाकार भगवान श्री कृष्ण, लिल्ली घोड़ी और जोकर का रूप धारण करके प्रदर्शन करते हैं। कुछ कलाकार नृत्य करते हैं।
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चार दशकों से लोकहित में कर रहे कार्य
अपने मोहल्ले के चौपाई दल में पिछले चार दशकों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उम्र अब 59 साल हो गई, लेकिन जब तक शरीर में ताकत रहेगी, तब तक यह कार्य लोकहित में करते रहेंगे।
- कन्हई लाल
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पांच दिन पहले ही रिहर्सल शुरू कर दिया है। पिछले 35 वर्षों से चौपाई गायन कर रहे हैं। कार्यक्रम शुरू करते ही शरीर में गजब की स्फूर्ति आ जाती है।- राजकुमार
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नगर के कुछ मोहल्लों और तहसील क्षेत्र के अधिकांश गांवों में चौपाई टोलियां बनी हुई हैं। इन टोलियों के कलाकार होली पर गमी वाले घर में जाकर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। संबंधित घरों के लोग इन कलाकारों को मिठाई खिलाते और इनाम देते हैं। ये टोलियां लोकगीतों के माध्यम से दुख भूल कर पर्व की खुशी मनाने का संदेश देती हैं। माना जाता है कि चौपाई गायन के बाद संबंधित घरों की गमी दूर हो जाती है। उन घरों में पूड़ी पकवान बनने लगते हैं। गमी की वजह से जिन परिवारों यह पर्व नहीं मनाया जाता है। वहां के लोग इन कलाकारों को आमंत्रित करते हैं। इन टोलियों में 10 से 15 कलाकार होते हैं। कलाकार घरों के दरवाजे पर ग्रामीण अंदाज में नृत्य करने के साथ लोकगीत गाते हैं। संवाद
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इन स्थानों पर हैं चौपाई दल
नगर के मोहल्ला दुबे, खेड़ा, दुर्गा प्रसाद, ग्यासपुर, हबीबुल्लाह खान शुमाली के अलावा शादीपुर, पिपरिया, रामभुजा, टिहरी, मानपुर नगरिया, रामपुर फतेहपुर, नवदिया सितारगंज, नवदिया भगत, गोवल, पतिपुरा, मंडरा सुमन, चुटकुना, चंद्रपुर खांड़ेपुर, जसौली, कासिमपुर, अमरा करोड, हाफिज नगर, बरखेड़ा यासीन और गांगूपुर।
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कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मी भी हैं शामिल
इन दलों में इन चौपाई दलों में कुछ कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं। गांव खांड़ेपुर निवासी डाक विभाग में कर्मचारी कुलिंदर पाल, गांव बरखेड़ा यासीन निवासी शिक्षक कृष्ण पाल, गांव नवदिया भगत के सेवानिवृत्त शिक्षक तेजराम गंगवार अपने अपने गांव के चौपाई दलों में शामिल हैं।
वाद्य यंत्रों से कलाकार रहते हैं लैस
चौपाई दलों के कलाकार हारमोनियम, ढोलक, झांझ, घुंघरू और मंजीरा जैसे वाद्य यंत्र से लैस रहते हैं। अधिकांश कलाकारों के हाथों में मोर पंख भी रहते हैं। कुछ कलाकार भगवान श्री कृष्ण, लिल्ली घोड़ी और जोकर का रूप धारण करके प्रदर्शन करते हैं। कुछ कलाकार नृत्य करते हैं।
चार दशकों से लोकहित में कर रहे कार्य
अपने मोहल्ले के चौपाई दल में पिछले चार दशकों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उम्र अब 59 साल हो गई, लेकिन जब तक शरीर में ताकत रहेगी, तब तक यह कार्य लोकहित में करते रहेंगे।
- कन्हई लाल
पांच दिन पहले ही रिहर्सल शुरू कर दिया है। पिछले 35 वर्षों से चौपाई गायन कर रहे हैं। कार्यक्रम शुरू करते ही शरीर में गजब की स्फूर्ति आ जाती है।- राजकुमार

बीसलपुर में चौपाई का प्रदर्शन कर गमी मिटाते कलाकार फाइल फोटो

बीसलपुर में चौपाई का प्रदर्शन कर गमी मिटाते कलाकार फाइल फोटो