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Pilibhit News: मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए मंथन करेंगे अफसर
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पीलीभीत। मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए पीटीआर के साथ अन्य विभाग भी गंभीर हों, इसके लिए जनपद में पहली बार 11 दिसंबर को मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन समिति की बैठक होगी। डीएम की अध्यक्षता में संघर्ष का कारण और निवारण विषय पर चर्चा और रोकथाम पर मंथन होगा। कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। पूर्व में जारी आंकड़ों के अनुसार पीटीआर में 72 बाघ हैं, लेकिन पूर्व में जन्में शावकों को व्यस्क होने पर संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में जंगल से बाहर बाघों की चहलकदमी बढ़ने से संघर्ष की स्थिति भी बन रही है।
इसको रोकने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अलावा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। तार और जाल फेंसिंग के साथ अन्य जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इधर अब मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए शासन की ओर से भी गंभीरता बरती जा रही है। इसके लिए मानव वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन समिति का गठन किया गया है।
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अब इस दिशा में अमल भी शुरू किया जा रहा है। इसके लिए 11 दिसंबर को मुख्यालय स्थित गांधी सभागार में डीएम संजय सिंह की अध्यक्षता में बैठक होगी। बैठक में पंचायती राज, कृषि, राजस्व, विद्युत विभाग समेत अन्य विभागों के अफसर भी शामिल रहेंगे।
संघर्ष रोकने के लिए बनाई जाएगी कार्ययोजना
बैठक में जंगल से बाहर मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के तरीकों पर मंथन किया जाएगा। इसके लिए विभागों में आपसी समन्वय स्थापित कर संयुक्त प्रयास करने पर जोर दिया जाएगा। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि मानव वन्यजीव संघर्ष के कई कारण हैं। जिसे एक विभाग के प्रयास से रोकना संभव नहीं हो सकता। बैठक में जंगल से सटे इलाकों में कच्चे आवास, शौचालय के अलावा बिजली लाइन की समस्या समेत अन्य बिंदुओं पर चर्चा कर निवारण की दिशा में कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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उप्र में इस तरह की पहली बैठक होने जा रही है। बैठक का उद्देश्य मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने के विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय से इस दिशा में सकारात्मक प्रयास करना है।
- मनीष सिंह, डीएफओ
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। पूर्व में जारी आंकड़ों के अनुसार पीटीआर में 72 बाघ हैं, लेकिन पूर्व में जन्में शावकों को व्यस्क होने पर संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में जंगल से बाहर बाघों की चहलकदमी बढ़ने से संघर्ष की स्थिति भी बन रही है।
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इसको रोकने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अलावा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। तार और जाल फेंसिंग के साथ अन्य जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इधर अब मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए शासन की ओर से भी गंभीरता बरती जा रही है। इसके लिए मानव वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन समिति का गठन किया गया है।
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अब इस दिशा में अमल भी शुरू किया जा रहा है। इसके लिए 11 दिसंबर को मुख्यालय स्थित गांधी सभागार में डीएम संजय सिंह की अध्यक्षता में बैठक होगी। बैठक में पंचायती राज, कृषि, राजस्व, विद्युत विभाग समेत अन्य विभागों के अफसर भी शामिल रहेंगे।
संघर्ष रोकने के लिए बनाई जाएगी कार्ययोजना
बैठक में जंगल से बाहर मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के तरीकों पर मंथन किया जाएगा। इसके लिए विभागों में आपसी समन्वय स्थापित कर संयुक्त प्रयास करने पर जोर दिया जाएगा। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि मानव वन्यजीव संघर्ष के कई कारण हैं। जिसे एक विभाग के प्रयास से रोकना संभव नहीं हो सकता। बैठक में जंगल से सटे इलाकों में कच्चे आवास, शौचालय के अलावा बिजली लाइन की समस्या समेत अन्य बिंदुओं पर चर्चा कर निवारण की दिशा में कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
उप्र में इस तरह की पहली बैठक होने जा रही है। बैठक का उद्देश्य मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने के विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय से इस दिशा में सकारात्मक प्रयास करना है।
- मनीष सिंह, डीएफओ