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Pilibhit News: तीन साल से मछली का ठेका नहीं, शारदा सागर डैम में अवैध शिकार का खेल

Sat, 10 Oct 2026 12:26 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Sat, 10 Oct 2026 12:26 AM IST
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No fishing contract for three years; illegal poaching rampant at Sharda Sagar Dam.
नदी में मछली पकड़ते लोग। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलीनगर। शारदा सागर डैम में मछलियों के अवैध शिकार और तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। करीब 22 किलोमीटर लंबे जलाशय में तीन वर्षों से अधिक समय से मछली का नीलामी ठेका नहीं होने के बीच अवैध शिकार का कारोबार फलने-फूलने के आरोप हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकारी दिन में भी नाव लेकर डैम में उतरते हैं और मछलियों को निकालकर तस्करों तक पहुंचाते हैं। अब शरद ऋतु में प्रवासी पक्षियों के आगमन के साथ उनके शिकार की आशंका भी बढ़ गई है।
शारदा सागर डैम का करीब 17 किलोमीटर हिस्सा पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटा है, जबकि आगे का क्षेत्र उत्तराखंड की सुरई रेंज के अंतर्गत आता है। जलाशय में मछलियों के प्रबंधन और नीलामी की जिम्मेदारी मत्स्य निगम के पास है। निगम का मंडलीय मुख्यालय बरेली में है, लेकिन जिले में उसका कार्यालय नहीं बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले मछली के ठेके से राजस्व मिलता था, लेकिन कई वर्षों से नीलामी नहीं होने से सरकारी आय प्रभावित हो रही है। मछलियों के बीज डालने और उनके संरक्षण की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि डैम के बाहरी हिस्से में रहने वाले कुछ लोग नावों से मछलियों का शिकार करते हैं। इसके बाद मछलियों को कथित तस्करों के माध्यम से कलीनगर, पीलीभीत और उत्तराखंड के खटीमा व किच्छा तक पहुंचाया जाता है। सुबह और दोपहर बाद डैम में नावें दिखाई देने की बात भी कही जा रही है। निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए लोगों ने संबंधित विभागों से कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, मिलीभगत और धन उगाही के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रेंजर सहेंद्र यादव ने बताया कि पीटीआर की सीमा में अवैध शिकार को लेकर निगरानी बरती जाती है। समय-समय पर कार्रवाई भी अमल में लाई जाती है। इसको और प्रभावी किया जाएगा।
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प्रवासी पक्षियों पर भी खतरा
विशाल जलाशय होने के कारण शारदा सागर डैम स्थानीय और प्रवासी जलीय पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण ठिकाना है। आरोप है कि पिछले वर्षों में यहां पक्षियों का भी शिकार होता रहा है। शिकार पर रोक नहीं लगी तो इस बार भी प्रवासी पक्षियों की संख्या प्रभावित हो सकती है। इससे जैव विविधता और पर्यटन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
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