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नेताजी ! आपकी आपकी गोद तलाश रहे हैं टीबी रोग से ग्रसित 66 बच्चे
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जिला क्षय रोग केंद्र। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। केंद्र सरकार 2025 तक देश को टीबीमुक्त करने की मुहिम छेड़े हुए है। दस्तक अभियान के तहत शहर से गांव तक एक-एक मरीज ढूंढकर इलाज किया जा रहा है। अधिकारियों से लेकर माननीय तक और सामाजिक संगठनों से क्षय रोगियों को गोद लेने की अपील खुद राज्यपाल ने की थी। जिले में अधिकारियों और समाजसेवी संगठनों ने तो 140 बच्चों को गोद ले लिया। लेकिन किसी भी माननीय ने इन मरीजों के प्रति उदार हृदय नहीं दिखाया। अब भी टीबी से लड़ रहे 66 बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें उम्मीद है कि कोई उनकी भी मदद को आगे आएगा।
टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) यानी क्षय रोग विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में जनवरी से अगस्त तक 2301 टीबी के मरीज मिले हैं। इनमें 206 बच्चे हैं, जिनकी उम्र 14 साल से कम है। इनका नियमित इलाज चल रहा है। आशा और आगंनबाड़ी कार्यकर्ता मरीजों को समय से दवाइयां उपलब्ध करा रही हैं। बेहतर पोषण के लिए मरीजों को सरकार की तरफ से 500 रुपये महीने भत्ता भी दिया जा रहा है।
तीन अवस्था में मरीज को चिह्नित करने की प्रक्रिया है। पहली अवस्था में 168 दिन का कोर्स चलता है। दूसरी अवस्था में 9 से 11 माह तक और तीसरी अवस्था में मरीज की समस्या और डॉक्टर के परामर्श के आधार पर इलाज होता है। ऐसे मरीजों को एमडीआर की श्रेणी में रखा जाता है। 1201 मरीजों में 23 मरीज ऐसे हैं, जो बीमारी की तीसरी अवस्था में हैं।
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नौ लाख रुपये कीमत टैबलेट मिल रही मुफ्त
दूसरी और तीसरी अवस्था में आने वाले मरीजों के बेहतर उपचार के लिए बेडाक्यूलीन नामक टैबलेट सरकार की तरफ से मुहैया कराई जा रही है। इसकी एक डिब्बी की कीमत नौ लाख रुपये है। इस डिब्बी में 168 गोलियां होती हैं। मरीज को रोजाना दो गोलियां खानी होती हैं। वर्तमान में इस टैबलेट की तीन डिब्बियां विभाग के पास मौजूद हैं।
टीबी वार्ड में महज एक मरीज भर्ती
जिले में दो हजार से अधिक टीबी मरीज हैं। इसमें से 23 मरीज तीसरी यानी एमडीआर अवस्था में चल रहे हैं। मंगलवार को आठ बेड के अस्पताल में टीबी वार्ड में महज एक मरीज भर्ती मिला। वार्ड में स्टॉफ के नाम पर कोई नहीं था। मरीज ने बताया कि कोई समस्या होने पर जनरल वार्ड में जाकर स्टाफ को बुलाना पड़ता है। जानकारी करने पर पता चला कि टीबी वार्ड के लिए अलग से स्टाफ की ड्यूटी नहीं लगाई जाती। वहीं, जिला टीबी अस्पताल में रोजाना करीब 40 मरीज आ रहे हैं। डिप्टी डीटीओ डॉ. पारुल मित्तल ने बताया कि पुराने मरीजों के अलावा नए मरीज भी निकल रहे हैं। जांच के बाद उनका इलाज शुरू कर दिया जाता है।
अफसरों, समाजसेवी संगठनों ने लिए 140 बच्चे गोद
जनवरी में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपील की थी कि नेता, अधिकारी, समाजसेवी और अन्य लोग टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद लें। इसके बाद जिले में डीएम पुलकित खरे समेत अन्य अफसरों ने टीबी से पीड़ित 35 बच्चों को गोद लिया। इसके अलावा रोटरी क्लब, व्यापार मंडल, चीनी मिल के अधिकारी, राइस मिलर्स आदि ने 105 बच्चों को गोद लिया।
मरीजों पर एक नजर
वर्ष मरीज मिले ठीक हुए
2017 2000 1677
2018 3297 2837
2019 3442 3028
2020 2788 2487
2021 3782 3444
टीबी को खत्म करने के लिए अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अस्पताल में उनका बेहतर उपचार किया जा रहा है। लोग इसे छिपाए नहीं, बल्कि लगातार इलाज कराएं। -डॉ. केके जौहरी, जिला क्षय रोग अधिकारी।
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टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) यानी क्षय रोग विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में जनवरी से अगस्त तक 2301 टीबी के मरीज मिले हैं। इनमें 206 बच्चे हैं, जिनकी उम्र 14 साल से कम है। इनका नियमित इलाज चल रहा है। आशा और आगंनबाड़ी कार्यकर्ता मरीजों को समय से दवाइयां उपलब्ध करा रही हैं। बेहतर पोषण के लिए मरीजों को सरकार की तरफ से 500 रुपये महीने भत्ता भी दिया जा रहा है।
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तीन अवस्था में मरीज को चिह्नित करने की प्रक्रिया है। पहली अवस्था में 168 दिन का कोर्स चलता है। दूसरी अवस्था में 9 से 11 माह तक और तीसरी अवस्था में मरीज की समस्या और डॉक्टर के परामर्श के आधार पर इलाज होता है। ऐसे मरीजों को एमडीआर की श्रेणी में रखा जाता है। 1201 मरीजों में 23 मरीज ऐसे हैं, जो बीमारी की तीसरी अवस्था में हैं।
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नौ लाख रुपये कीमत टैबलेट मिल रही मुफ्त
दूसरी और तीसरी अवस्था में आने वाले मरीजों के बेहतर उपचार के लिए बेडाक्यूलीन नामक टैबलेट सरकार की तरफ से मुहैया कराई जा रही है। इसकी एक डिब्बी की कीमत नौ लाख रुपये है। इस डिब्बी में 168 गोलियां होती हैं। मरीज को रोजाना दो गोलियां खानी होती हैं। वर्तमान में इस टैबलेट की तीन डिब्बियां विभाग के पास मौजूद हैं।
टीबी वार्ड में महज एक मरीज भर्ती
जिले में दो हजार से अधिक टीबी मरीज हैं। इसमें से 23 मरीज तीसरी यानी एमडीआर अवस्था में चल रहे हैं। मंगलवार को आठ बेड के अस्पताल में टीबी वार्ड में महज एक मरीज भर्ती मिला। वार्ड में स्टॉफ के नाम पर कोई नहीं था। मरीज ने बताया कि कोई समस्या होने पर जनरल वार्ड में जाकर स्टाफ को बुलाना पड़ता है। जानकारी करने पर पता चला कि टीबी वार्ड के लिए अलग से स्टाफ की ड्यूटी नहीं लगाई जाती। वहीं, जिला टीबी अस्पताल में रोजाना करीब 40 मरीज आ रहे हैं। डिप्टी डीटीओ डॉ. पारुल मित्तल ने बताया कि पुराने मरीजों के अलावा नए मरीज भी निकल रहे हैं। जांच के बाद उनका इलाज शुरू कर दिया जाता है।
अफसरों, समाजसेवी संगठनों ने लिए 140 बच्चे गोद
जनवरी में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपील की थी कि नेता, अधिकारी, समाजसेवी और अन्य लोग टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद लें। इसके बाद जिले में डीएम पुलकित खरे समेत अन्य अफसरों ने टीबी से पीड़ित 35 बच्चों को गोद लिया। इसके अलावा रोटरी क्लब, व्यापार मंडल, चीनी मिल के अधिकारी, राइस मिलर्स आदि ने 105 बच्चों को गोद लिया।
मरीजों पर एक नजर
वर्ष मरीज मिले ठीक हुए
2017 2000 1677
2018 3297 2837
2019 3442 3028
2020 2788 2487
2021 3782 3444
टीबी को खत्म करने के लिए अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अस्पताल में उनका बेहतर उपचार किया जा रहा है। लोग इसे छिपाए नहीं, बल्कि लगातार इलाज कराएं। -डॉ. केके जौहरी, जिला क्षय रोग अधिकारी।