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विरोध के बीच मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर और डलावघर का निर्माण शुरू
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पिलर के लिए गड्ढे खुदवाते ईओ आरके भार्गव।
- फोटो : PILIBHIT
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पूरनपुर। नगर पालिका के एमआरएफसी (मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर) और डलावघर निर्माण का विरोध के बीच रविवार को निर्माण शुरू करा दिया गया। झगड़े की आशंका के चलते एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। विरोध करने पहुंची महिलाओं को पुलिस ने कुछ दूरी पर ही रोक दिया।
ठोस अविशिष्ट प्रबंधन के तहत मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (एमआरएफसी) और डलावघर निर्माण के लिए राजस्व विभाग ने गांव औरंगाबाद में नगरपालिका को छह एकड़ जमीन दी थी। जमीन नगर पालिका के अभिलेखों में भी दर्ज हो चुकी है। रोजाना नगर से निकलने वाले कूड़े का ढेर इस जमीन पर लगे हैं। एमआरएफसी सेंटर के निर्माण को जुलाई में पिलर बनाने के लिए गड्ढे भी खोदे गए। लाइनपार साहूकारा के कुछ लोगों ने जमीन को अपना बताकर इसका विरोध किया था। उस समय विरोध के चलते निर्माण कार्य रोक दिया गया था। इसके कुछ दिन बाद जमीन के कुछ हिस्से पर पौधरोपण के लिए गड्ढे खुदवाए। तब वहां के लोगों ने पौधरोपण भी नहीं होने दिया था।
विरोध करने वालों का कहना है कि करीब चार दशक पहले जमीन पर उनके घर बने थे। लूट-डकैती की घटनाओं से परेशान होकर वह लोग मोहल्ला साहूकारा लाइनपार आकर बस गए। इसलिए वह जमीन उनकी है। रविवार को जब निर्माण शुरू हुआ तो एसडीएम राजेंद्र प्रसाद, तहसीलदार विजय कुमार त्रिवेदी, नायब तहसीलदार अनुराग सिंह पुलिस टीम के मौके पर पहुंचे। विरोध करने के लिए कुछ महिलाएं भी पहुंचीं। मगर, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। एसडीएम ने विरोध करने वालों से जमीन के अभिलेख मांगे। मगर, वह अभिलेख नहीं दिखा सके। नगरपालिका ईओ आरके भार्गव ने बताया कि जमीन पर एमआरएफसी और डलावघर बनेगा। वहां एकत्र कूड़े की छटाई कराई जाएगी। लोहा, शीशा, रबड़ आदि सामानों को अलग कर उसकी नीलामी होगी। बाकी अवशेष से खाद बनवाई जाएगी। इस कदम से नगरपालिका की आय बढ़ेगी।
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ठोस अविशिष्ट प्रबंधन के तहत मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (एमआरएफसी) और डलावघर निर्माण के लिए राजस्व विभाग ने गांव औरंगाबाद में नगरपालिका को छह एकड़ जमीन दी थी। जमीन नगर पालिका के अभिलेखों में भी दर्ज हो चुकी है। रोजाना नगर से निकलने वाले कूड़े का ढेर इस जमीन पर लगे हैं। एमआरएफसी सेंटर के निर्माण को जुलाई में पिलर बनाने के लिए गड्ढे भी खोदे गए। लाइनपार साहूकारा के कुछ लोगों ने जमीन को अपना बताकर इसका विरोध किया था। उस समय विरोध के चलते निर्माण कार्य रोक दिया गया था। इसके कुछ दिन बाद जमीन के कुछ हिस्से पर पौधरोपण के लिए गड्ढे खुदवाए। तब वहां के लोगों ने पौधरोपण भी नहीं होने दिया था।
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विरोध करने वालों का कहना है कि करीब चार दशक पहले जमीन पर उनके घर बने थे। लूट-डकैती की घटनाओं से परेशान होकर वह लोग मोहल्ला साहूकारा लाइनपार आकर बस गए। इसलिए वह जमीन उनकी है। रविवार को जब निर्माण शुरू हुआ तो एसडीएम राजेंद्र प्रसाद, तहसीलदार विजय कुमार त्रिवेदी, नायब तहसीलदार अनुराग सिंह पुलिस टीम के मौके पर पहुंचे। विरोध करने के लिए कुछ महिलाएं भी पहुंचीं। मगर, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। एसडीएम ने विरोध करने वालों से जमीन के अभिलेख मांगे। मगर, वह अभिलेख नहीं दिखा सके। नगरपालिका ईओ आरके भार्गव ने बताया कि जमीन पर एमआरएफसी और डलावघर बनेगा। वहां एकत्र कूड़े की छटाई कराई जाएगी। लोहा, शीशा, रबड़ आदि सामानों को अलग कर उसकी नीलामी होगी। बाकी अवशेष से खाद बनवाई जाएगी। इस कदम से नगरपालिका की आय बढ़ेगी।
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