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Pilibhit News: गर्भावस्था से जुड़ी गंभीर हृदय बीमारी को लेकर मेडिकल कॉलेज में अलर्ट
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पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (एएसएमसी) की सघन चिकित्सा इकाई और प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने गर्भावस्था से जुड़ी दुर्लभ और जानलेवा हृदय बीमारी 'पेरिपार्टम कार्डियोमायोपैथी' को लेकर अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं में हृदय विफलता के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानने की अपील की है।
मेडिकल कॉलेज में हाल ही में भर्ती एक गर्भवती में पेरिपोर्टम कार्डियोमायोपैथी के लक्षण मिलने के बाद विशेषज्ञ गंभीर हुए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी गर्भावस्था के अंतिम महीने या प्रसव के बाद पांच माह तक विकसित हो सकती है। इसमें हृदय का बायां निलय कमजोर होकर शरीर में रक्त संचार प्रभावित कर देता है। खास बात यह है कि यह बीमारी उन महिलाओं में भी हो सकती है, जिन्हें पहले कोई हृदय रोग न रहा हो।
हाल ही में एएसएमसी में भर्ती 36 सप्ताह की गर्भवती 38 वर्षीय महिला के उपचार के दौरान बीमारी की गंभीरता सामने आई। महिला गंभीर श्वसन विफलता की हालत में अस्पताल पहुंची थी। जांच में गंभीर प्रीक्लेम्प्सिया, मेंडलसन सिंड्रोम और पेरिपार्टम कार्डियोमायोपैथी की पुष्टि हुई। हृदय की पंपिंग क्षमता केवल 25 प्रतिशत पाई गई। सघन चिकित्सा इकाई प्रभारी डॉ. अरविंद एम और डॉ. रूपल खरे के नेतृत्व में आईसीयू में ही आपातकालीन प्रसव कराया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद मां और गर्भस्थ शिशु को बचाया नहीं जा सका।
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विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार सांस फूलना, पैरों में सूजन, सीने में बेचैनी और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उन्नत मातृ चिकित्सा सुविधाएं विकसित करना उद्देश्य है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना मातृ मृत्यु दर कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संवाद
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मेडिकल कॉलेज में हाल ही में भर्ती एक गर्भवती में पेरिपोर्टम कार्डियोमायोपैथी के लक्षण मिलने के बाद विशेषज्ञ गंभीर हुए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी गर्भावस्था के अंतिम महीने या प्रसव के बाद पांच माह तक विकसित हो सकती है। इसमें हृदय का बायां निलय कमजोर होकर शरीर में रक्त संचार प्रभावित कर देता है। खास बात यह है कि यह बीमारी उन महिलाओं में भी हो सकती है, जिन्हें पहले कोई हृदय रोग न रहा हो।
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हाल ही में एएसएमसी में भर्ती 36 सप्ताह की गर्भवती 38 वर्षीय महिला के उपचार के दौरान बीमारी की गंभीरता सामने आई। महिला गंभीर श्वसन विफलता की हालत में अस्पताल पहुंची थी। जांच में गंभीर प्रीक्लेम्प्सिया, मेंडलसन सिंड्रोम और पेरिपार्टम कार्डियोमायोपैथी की पुष्टि हुई। हृदय की पंपिंग क्षमता केवल 25 प्रतिशत पाई गई। सघन चिकित्सा इकाई प्रभारी डॉ. अरविंद एम और डॉ. रूपल खरे के नेतृत्व में आईसीयू में ही आपातकालीन प्रसव कराया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद मां और गर्भस्थ शिशु को बचाया नहीं जा सका।
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विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार सांस फूलना, पैरों में सूजन, सीने में बेचैनी और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उन्नत मातृ चिकित्सा सुविधाएं विकसित करना उद्देश्य है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना मातृ मृत्यु दर कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संवाद