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पूरनपुर तहसील के सात गांवों का नक्शा गायब, सार्वजनिक जमीनों पर हो रहे कब्जे

Thu, 23 Jun 2022 11:57 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jun 2022 11:57 PM IST
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Map of seven villages of Puranpur missing, land mafia active
पूरनपुर क्षेत्र का गांव खमरिया पट्टी। - फोटो : PILIBHIT
पूरनपुर। सूबे की सरकारें भले बदलती रही हों पर कई विभागों में व्यवस्था नहीं बदलती। सरकार ने एक तरफ अवैध कब्जे हटाने का अभियान छेड़ रखा है तो दूसरी ओर पूरनपुर तहसील के सात गांव का बंदोबस्ती नक्शा ही दशकों से गायब है। माफिया सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने में जुटे हैं। जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस बीच किसान भी परेशान हैं, क्योंकि उन्हें पूरे भू-अभिलेख देखने तक को नहीं मिल रहे।
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राजस्व विभाग में किस तरह लापरवाही होती है, इसे समझने के लिए पूरनपुर तहसील के सात गांव का हाल देख सकते हैं। तहसील के गांव खमरिया पट्टी असम हाईवे से सटी होने से यहां जमीन खासी कीमती है। इस गांव का भू मानचित्र करीब दो दशक पहले रहस्यमय तरीके से गुम हो गया था। पहले नक्शे की तलाश हुई लेकिन जब पता नहीं चला तो उसे जिला मुख्यालय और राजस्व परिषद बोर्ड में तलाश कराया गया, मगर नक्शा नहीं मिला। यही हाल तहसील क्षेत्र की नेपाल सीमा से सटे गांव सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज, शारदा पार के गांव बैल्हा, बमनपुर भागीरथ, शारदा नदी के इस पार के गांव खमरिया कलां, मुजफ्फरनगर, नवदिया मुस्तकीन मुजफ्फरनगर का है।
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नक्शा न होने का फायदा उठाकर माफिया सरकारी जमीनों पर कब्जा करने में जुटे हैं। अफसर लिखापढ़ी कर रहे हैं, मगर नक्शा नहीं मिल रहा है। नक्शे के अभाव में जमीनों की पैमाइश रुकी है, जबकि गांव के लोग चकरोड और रास्तों को काटकर खेतों में मिला रहे हैं। लेखपाल नक्शा न होने की बात कहकर पल्ल्ला झाड़ लेते हैं। गांव की चारागाह, ग्राम समाज, की जमीनों और तालाबों पर भी कब्जे की कोशिश तेजी से हो रही है।
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रुकवाने के बाद बन गया दो मंजिला भवन
गांव खमरिया पट्टी में रास्ते की जमीन पर कब्जा कर कई महीने पहले निर्माण शुरू किया गया था। तब राजस्व टीम ने जमीन को रास्ते की बताकर निर्माण रुकवाने के साथ निर्माण न कराने की चेतावनी दी थी। साठगांठ होने पर अब उस जमीन पर दो मंजिला भवन बना लिया गया।
नहर किनारे जमीन पर भी कब्जा
गांव की एक नहर किनारे की जमीन पर पहले एक व्यक्ति को पट्टा किया गया था। व्यक्ति के नाम जमीन भूमिधरी नहीं हो पाई। उस जमीन की उसने बिक्री कर दी और मिट्टी डालकर कब्जा कर लिया। इसके अलावा गांव के दक्षिण में कॉलोनाइजर और एक नेता ने श्मशान जाने वाली सड़क के हिस्से पर कब्जा कर लिया है।
मोबाइल में नक्शे की आड़ में होता है खेल
गांव खमरिया पट्टी में शोर मचा है कि रिकार्ड रूम और अभिलेखों में नक्शा गायब है मगर राजस्व विभाग के एक कर्मचारी के मोबाइल में नक्शा है। सार्वजनिक जमीन पर कब्जा होने पर मोबाइल के नक्शा को देखकर कब्जा रुकवाया जाता है। मगर साठगांठ होने पर कब्जा करा दिया जाता है। शिकायत पर नक्शा न होने का तर्क दिया जाता है।
कीमती जमीन हथिया रहे
गांव की सरकारी जमीन पर माफिया की नजर पड़ चुकी है। वे कीमती जमीन को हथिया रहे हैं। गांव की एक वृद्धा की जमीन भी हड़प ली गई। वृद्धा अफसरों के चक्कर काटकर मन मसोस कर घर बैठ गई है। -सोमपाल, खमरिया पट्टी।
डीएम को भेजा है पत्र
नक्शा न होने से सरकारी जमीन, चकरोड, तालाब कहां हैं, उस पर कब्जा है कि नहीं इसकी जानकारी तक नहीं मिल रही है। विवाद के मामलों में पैमाइश नहीं हो पा रही है। नक्शा के लिए डीएम को पत्र भेजा गया है। - रामेश्वर दयाल प्रधान, खमरिया पट्टी

तलाशा मगर नहीं मिला नक्शा
गांव खमरिया पट्टी सहित तहसील के सात गांव के नक्शे कई साल से गायब हैं। खमरिया पट्टी सहित अन्य गांव के नक्शों को रेवन्यू बोर्ड कर्मचारियों की टीम भेजकर तलाश कराया गया मगर वहां भी नक्शा नहीं मिला। नक्शा बनाने को चकबंदी विभाग की टीम लगाई गई है जो महीने में एक बार लखनऊ रेवन्यू बोर्ड जाती है। नक्शा बनवाने को शीघ्र ही कर्मचारियों की टीम को रुड़की भेजा जाएगा। - अशोक कुमार गुप्ता, तहसीलदार
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