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Chaitra navratri 2023: पीलीभीत में सजने लगा मां यशवंतरी देवी का मंदिर, नवरात्रि पर लगेगा आस्था का मेला

Mon, 20 Mar 2023 06:19 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 20 Mar 2023 06:19 PM IST
सार

मां यशवंतरी देवी का मंदिर एक हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है। लेकिन गजेटियर में यह साढ़े तीन सौ साल से दर्ज है। मान्यता है कि इस मंदिर में आने वाले भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। नवरात्रि पर यहां मेला लगता है। 

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Maa Yashwantari Devi temple started decorating in Pilibhit for Chaitra navratri 2023
मां यशवंतरी देवी मंदिर में पूजा करते पुजारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीलीभीत में चैत्र नवरात्रि को लेकर शासन से मिले निर्देश के बाद मंदिरों में सजावट का काम शुरू करा दिया गया है। मंदिर को भव्य रूप से सजाया जा रहा है। शहर के प्रसिद्ध यशवंतरी देवी मंदिर पर लगने वाले मेले में भी दुकानदारों के आने का क्रम शुरू हो गया है। कई तरह के खेल तमाशे, झूले लगने लगे हैं।

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नवरात्रि को लेकर शहर के प्राचीन यशवंतरी देवी मंदिर पर प्रशासन की ओर से तैयारियों को शुरू कर दिया गया है। मंदिर की सजावट कराई जा रही है। साथ ही रंगाई पुताई का काम लगभग पूरा हो गया है। मंदिर के सभी हैंडपंप ठीक करा दिए गए हैं। नगर निगम की तरफ से पानी का टैंकर रखवा दिया गया है। 

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नवरात्रि भर लगता है मेला  

इसके साथ ही मोबाइल शौचालय की भी व्यवस्था कराई गई है। मंदिर परिसर में लगने वाले मेला को लेकर दुकान लगने का क्रम भी शुरू हो गया है। मंदिर में खेल तमाशा के साथ ही झूले भी लगने लगे हैं। पूरे नवरात्रि भर यहां पर मेला लगता रहता है। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्त मंदिर में पहुंचकर भजन, कीर्तन, प्रसाद चढ़ाकर मनौती मांगते हैं।

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इस बार शासन ने नवरात्रि को लेकर प्राचीन देवी मंदिरों पर विशेष प्रबंध करने और सभी नौ दिनों तक आरती के साथ, दुर्गा सप्तशती पाठ का आयोजन कराने के निर्देश दिए हैं। कहा गया है कि मंदिर में रोजाना धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया जाए। इसके लिए जिले को एक लाख रुपये भी दिए गए हैं।

हर ब्लॉक से लिया जाएगा एक मंदिर

नवरात्रि और श्री राम नवमी पर्व को लेकर शासन ने विशेष पूजा-अर्चना व भजन-कीर्तन के साथ अखंड पाठ कराए जाने के निर्देश जारी किए थे। शासन के निर्देशों के बाद जिले में प्राचीन देवी मंदिरों को चिह्ति किया जा रहा है। इसको लेकर सूचना विभाग की ओर से जिले के सभी ब्लॉकों से एक-एक मंदिर चयनित करवाया जा रहा है। 

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इन मंदिरों पर पूरे दिनों भजन, कीर्तन, आरती व अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी वहां के खंड विकास अधिकारियों को सौंपी गई है। कार्यक्रमों को लेकर रोजाना वीडियो और फोटो शासन के संस्कृति विभााग को भेजे जाने हैं।

एक हजार वर्ष से भी पुराना है यशवंतरी देवी मंदिर

महंत राजेश वाजपेई बताते हैं कि मां यशवंतरी देवी का मंदिर यूं तो एक हजार वर्ष से भी ज्यादा पुराना है। लेकिन गजेटियर में यह साढ़े तीन सौ साल से दर्ज है। वह नौवीं पीढ़ी के पुजारी है। महंत बताते हैं कि यहां मां के बाल रूप के चरण हैं। नकटा दानव से युद्ध करते समय मां ने यहां विश्राम किया था तथा जल पिया था। 

मंदिर में मां के जहां चरण हैं वहां पहल एक विशाल घड़े में जल था। तब से नियमित रोजाना इसमें पानी डाला जाता रहा। अब इसे चांदी से मड़वा दिया गया है। इस पानी को पीने से कई लोगों की बीमारियां दूर हुई हैं।

 इसके अलावा मान्यता यह भी है कि पूर्णागिरी से लौटकर आते समय मां यशवतंरी देवी के दर्शन करने के बाद ही यात्रा पूर्ण मानी जाती है। मंदिर के शुरुआत से ही यहां प्राचीन तालाब है, जो आज भी बरकरार है। नवरात्रि पर यहां मेला लगता है। हजारों श्रद्धालु मंदिर में मां का आर्शीवाद लेने आते हैं। उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। जिस पर मुंडन संस्कार भी यहां होता है।

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