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यूनुस हत्याकांड में तीन भाइयों समेत पांच को उम्रकैद
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पीलीभीत। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार ने बीसलपुर के गांव कितनापुर में पांच साल पहले दिन दहाड़े हुए यूनुस हत्याकांड में तीन सगे भाइयों समेत पांच आरोपियों को दोषी पाकर प्रत्येक को सश्रम आजीवन कारावास और 46 हजार रुपये अर्थ दंड से दंडित किया है। तीन आरोपियों को सत्र अधिनियम में अलग से सजा और जुर्माना सुनाया गया है। अर्थ दंड वसूल होने पर 20 हजार रुपये मृतक के पिता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाएंगे।
बीसलपुर कोतवाली के गांव कितनापुर निवासी फैजुल्ला खां ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार 18 नवंबर 2016 को गांव के ही शामा, गामा, भोला पुत्र गण जमील खां, निक्का, खलील और जमील उर्फ लल्ला पुरानी रंजिश को लेकर उसके घर में घुस गए। वादी के पुत्र यूनुस को घर से बाहर खींच लिया। भोला ने खलील खां की लाइसेंसी बंदूक से यूनुस पर जान से मारने को फायर झोंक दिया। अन्य आरोपियों पर भी अवैध तमंचे थे। घरवालों व ग्रामीणों के आने पर हमलावर यूनुस को मरा जानकर भाग गए। मरणासन्न अवस्था मेें यूनुस को लेकर घर से थाने गए और रिपोर्ट लिखाई। गंभीर चोटों के कारण यूनुस की उसी दिन मौत हो गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। 20 नंबवर 2016 को दिन में ढाई बजे पुलिस ने आरोपी भोला और गामा को गिरफ्तार किया। भोला की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लाइसेंस बंदूक बरामद की। मामले में मृतक पक्ष के विशेष अधिवक्ता संतराम राठौर और शासकीय अधिवक्ता विर्जेंद्र मोहन दीक्षित ने राज्य सरकार की ओर से पैरवी की। साक्ष्य के अभाव में आरोपी खलील को न्यायालय ने दोष मुक्त कर दिया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार ने बुधवार को फैसला सुनाया। शामा, गामा, भोला, निक्का, जमील उर्फ लल्ला को एक राय होकर हत्या का दोषी पाकर प्रत्येक को सश्रम आजीवन कारावास और 46 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया है। गामा और भोला को शस्त्र अधिनियम में चार साल सजा और पांच -पांच हजार जुर्माना सुनाया गया है। जमील उर्फ लल्ला को शस्त्र अधिनियम में छह माह की सजा और दो हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया है। जुर्माना वसूल होने पर 20 हजार रुपये की धनराशि क्षतिपूर्ति के रूप में मृतक के पिता को दिलाई जाएगी।
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बीसलपुर कोतवाली के गांव कितनापुर निवासी फैजुल्ला खां ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार 18 नवंबर 2016 को गांव के ही शामा, गामा, भोला पुत्र गण जमील खां, निक्का, खलील और जमील उर्फ लल्ला पुरानी रंजिश को लेकर उसके घर में घुस गए। वादी के पुत्र यूनुस को घर से बाहर खींच लिया। भोला ने खलील खां की लाइसेंसी बंदूक से यूनुस पर जान से मारने को फायर झोंक दिया। अन्य आरोपियों पर भी अवैध तमंचे थे। घरवालों व ग्रामीणों के आने पर हमलावर यूनुस को मरा जानकर भाग गए। मरणासन्न अवस्था मेें यूनुस को लेकर घर से थाने गए और रिपोर्ट लिखाई। गंभीर चोटों के कारण यूनुस की उसी दिन मौत हो गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। 20 नंबवर 2016 को दिन में ढाई बजे पुलिस ने आरोपी भोला और गामा को गिरफ्तार किया। भोला की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लाइसेंस बंदूक बरामद की। मामले में मृतक पक्ष के विशेष अधिवक्ता संतराम राठौर और शासकीय अधिवक्ता विर्जेंद्र मोहन दीक्षित ने राज्य सरकार की ओर से पैरवी की। साक्ष्य के अभाव में आरोपी खलील को न्यायालय ने दोष मुक्त कर दिया।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार ने बुधवार को फैसला सुनाया। शामा, गामा, भोला, निक्का, जमील उर्फ लल्ला को एक राय होकर हत्या का दोषी पाकर प्रत्येक को सश्रम आजीवन कारावास और 46 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया है। गामा और भोला को शस्त्र अधिनियम में चार साल सजा और पांच -पांच हजार जुर्माना सुनाया गया है। जमील उर्फ लल्ला को शस्त्र अधिनियम में छह माह की सजा और दो हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया है। जुर्माना वसूल होने पर 20 हजार रुपये की धनराशि क्षतिपूर्ति के रूप में मृतक के पिता को दिलाई जाएगी।
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