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खरूआ के किसानों को एक माह में मिलेगा मुआवजा
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Fri, 29 Apr 2016 11:31 PM IST
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- फोटो : pilibhit, beureu
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वर्ष 2004 में एसएसबी ने बरेली-पीलीभीत नेशनल हाइवे के किनारे खरूआ में मुख्यालय बनाने के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहीत की है। मुआवजे के लिए किसान मजदूर संगठन की याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के दो जजों की बेंच ने एक माह के अंदर किसानों को क्षतिपूर्ति अदा करने के आदेश दिए हैं।
खरूआ में किसानों की करीब 75 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के बाद पूर्व विधायक वीएम सिंह ने किसान मजदूर संगठन के बैनर तले हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल कर किसानों को नये सर्किल रेट के मुताबिक मुआवजा दिए जाने की मांग की। सात दिसंबर 2015 को हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत किसानों को मुआवजा दिया जाए। प्रशासन ने 26 दिसंबर 2015 को जो मुआवजा की सूची बनाई उसमें सरकार के एक जून 2015 के एक सर्कुलर का हवाला दिया, जिसके आधार पर किसानों की मुआवजा राशि घट गई। कुछ किसानों ने अपना विरोध जताते हुए मुआवजा ले लिया, लेकिन अधिकांश ने नहीं लिया। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ न्यायमूर्ति एपी शाही और न्यायमूर्ति अताउर्रहमान मसूदी ने याचिका की गुरुवार को सुनवाई की। आदेश दिया कि एक माह केे अंदर किसानों को उनकी क्षतिपूर्ति राशि हर हाल में दी जाए। याची वीएम सिंह ने हाईकोर्ट में कहा कि सात दिसंबर 2015 का आदेश सभी पक्षों की सहमति से हुआ था। उसके बावजूद एक जून 2015 के सरकुर्लर को गलत ढंग से पेश कर मुआवजा घटाया गया है जो उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि किसान एक जून 2015 के सरकुर्लर को अलग से याचिका कर चुनौती दे सकते हैं। वीएम सिंह का तर्क है कि 2013 के कानून के बाद यह सर्कुलर विधि संगत नहीं है।
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खरूआ में किसानों की करीब 75 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के बाद पूर्व विधायक वीएम सिंह ने किसान मजदूर संगठन के बैनर तले हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल कर किसानों को नये सर्किल रेट के मुताबिक मुआवजा दिए जाने की मांग की। सात दिसंबर 2015 को हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत किसानों को मुआवजा दिया जाए। प्रशासन ने 26 दिसंबर 2015 को जो मुआवजा की सूची बनाई उसमें सरकार के एक जून 2015 के एक सर्कुलर का हवाला दिया, जिसके आधार पर किसानों की मुआवजा राशि घट गई। कुछ किसानों ने अपना विरोध जताते हुए मुआवजा ले लिया, लेकिन अधिकांश ने नहीं लिया। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ न्यायमूर्ति एपी शाही और न्यायमूर्ति अताउर्रहमान मसूदी ने याचिका की गुरुवार को सुनवाई की। आदेश दिया कि एक माह केे अंदर किसानों को उनकी क्षतिपूर्ति राशि हर हाल में दी जाए। याची वीएम सिंह ने हाईकोर्ट में कहा कि सात दिसंबर 2015 का आदेश सभी पक्षों की सहमति से हुआ था। उसके बावजूद एक जून 2015 के सरकुर्लर को गलत ढंग से पेश कर मुआवजा घटाया गया है जो उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि किसान एक जून 2015 के सरकुर्लर को अलग से याचिका कर चुनौती दे सकते हैं। वीएम सिंह का तर्क है कि 2013 के कानून के बाद यह सर्कुलर विधि संगत नहीं है।
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