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लोकसभा चुनाव 2024: पीलीभीत में अखिलेश यादव की पहली जनसभा में खुलीं गठबंधन की गांठें

Sat, 13 Apr 2024 12:29 PM IST
मुकेश कुमार शशांक मिश्र, बरेली ब्यूरो
शशांक मिश्र, बरेली ब्यूरो Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 13 Apr 2024 12:29 PM IST
सार

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शुक्रवार को पीलीभीत के पूरनपुर में चुनावी रैली को संबोधित किया। उन्होंने जोरशोर से चुनावी शंखनाद तो किया, लेकिन अवाम तक गठबंधन की एकता का संदेश अपेक्षित मजबूती से नहीं पहुंचा पाए।

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Knots of alliance opened in Akhilesh Yadav election rally in Pilibhit
सपा मुखिया अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा से मुकाबिल विपक्षी गठबंधन यूपी में अपनी गांठें अब तक नहीं कस पा रहा है। पीलीभीत में शुक्रवार को आयोजित समाजवादी पार्टी की पहली रैली में कमोबेश यही नजर आया। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने जोरशोर से चुनावी शंखनाद तो किया, लेकिन अवाम तक गठबंधन की एकता का संदेश अपेक्षित मजबूती से नहीं पहुंचा पाए। पोस्टर तक सीमित कांग्रेस व अन्य नेताओं के चेहरों की कमी मंच पर खलती रही। पीलीभीत के कांग्रेस जिलाध्यक्ष को मंच पर जगह जरूर मिली लेकिन अखिलेश की रणनीति एकला चलो वाली ही नजर आई।

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वर्ष-2017 के विधानसभा चुनाव में दो लड़कों के नारे से मशहूर हुई सपा मुखिया अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की जोड़ी उस समय भले ही कमाल न कर पाई हो, लेकिन एनडीए के खिलाफ एकजुट विपक्ष ने फिर से गठबंधन कर कमर कसी है। मेनका गांधी और वरुण गांधी की 35 साल तक कर्मभूमि रही पीलीभीत लोकसभा सीट पर सपा की पहली रैली में लोगों को उम्मीद थी कि कांग्रेस और सपा के नेता एक साथ मंच साझा कर प्रदेश को संदेश देंगे। 
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इसके पीछे सियासी पंडित तर्क भी लगा रहे थे कि वरुण का टिकट कटने के बाद सपा राहुल गांधी के जरिये मतदाताओं को साधने की कोशिश करेगी। चूंकि टिकट कटने के बाद वरुण ने भावुक पत्र लिखकर पीलीभीत की जनता को संदेश दिया था। हालांकि, उसके बाद से अब तक वे एक बार भी यहां नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में भाजपा के खिलाफ यह बड़ा हथियार साबित हो सकता था। 

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शुक्रवार को सपा ने टाइगर रिजर्व में स्थानीय मुद्दे तो जरूर छेड़े, लेकिन सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं को अपेक्षित तरजीह नहीं दी। मंच पर लगे बैनर में अखिलेश के साथ राहुल गांधी की फोटो थी और ऊपर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी जगह दी गई थी। इसके अलावा गठबंधन के किसी सहयोगी दल के नेता नहीं दिखे। जानकारों की मानें तो पीलीभीत में 50 हजार की ज्यादा आबादी वाले बंगाली समाज को साधने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चेहरे का उपयोग करने में भी सपा चूक गई है।

आम लोगों की दुखती रग पर रखा हाथ
जनसभा में सपा मुखिया अखिलेश यादव बेहद सधे अंदाज में किसानों और नौजवानों के साथ आम लोगों की दुखती रग पर हाथ धर गए। उन्होंने किसान आंदोलन और तिकुनिया कांड की याद दिलाई। केंद्र सरकार के तीन कानूनों को काला करार देते हुए उनके समाप्त होने को किसानों की जीत बताया और एमएसपी कानून के जरिए सपा के इरादे जाहिर किए। पेपर लीक, बेरोजगारी के जरिये उन्होंने युवाओं को साधा। मंहगाई और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाकर आम लोगों की पीड़ा को उकेरने का प्रयास किया। सभा में मौजूद सिख समाज को देश के प्रति न्यौछावर बताते हुए उन्होंने इस समाज को  भी अपने पाले में करने का पूरा प्रयास किया। 

करीब 50 मिनट के भाषण में तीन बार गठबंधन का नाम
करीब एक बजे मंच पर पहुंचे सपा मुखिया अखिलेश यादव ने 50 मिनट तक जनता को संबोधित किया। उन्होंने सपा के नेता के रूप में ही अपनी बात कही। भाषण के आखिरी छोर में उन्होंने गठबंधन का नाम लिया और अपने पूरे भाषण में तीन बार इंडिया गठबंधन का जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने पीएम मोदी और भाजपा की ओर से इंडी गठबंधन के संबोधन पर आपत्ति दर्ज की और कहा कि इन्हें इंडिया कहने में शर्म आती है।

सपा को कांग्रेस से खास लाभ नहीं मिलने वाला
बरेली कॉलेज में राजनीतिशास्त्र की प्रोफेसर वंदना शर्मा का कहना है कि कांग्रेस का जनाधार यूपी में लगभग खत्म सा हो गया है। ऐसे में सपा को कांग्रेस का साथ मिलने से कोई खास लाभ नहीं मिलने वाला है। गठबंधन की ज्यादा पैरवी सपा के अपने जनाधार के लिए खतरा हो सकती है। यही कारण है कि सपा की ओर से कांग्रेस को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जा रही है। यदि गठबंधन के नेता एक साथ मंच पर होंगे तो इसका संदेश मतदाताओं में दूर तक जाएगा।

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