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Pilibhit News: सूखी पड़ी नहरें, सिंचाई के लिए परेशान हो रहे किसान
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कल्याणपुर गांव के पास सूखी पड़ी सहायक रजवाह नहर। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। रबी की फसलों में समय से नहरों में टेल तक पानी मुहैया कराने के दावों के बीच जिले के करीब एक लाख किसान परेशान हैं। सिल्ट सफाई के नाम पर सुखाई गई नहरों में पानी न छोड़ने से फसलें प्रभावित हो रही हैं। मजबूरन पानी की जरूरत को देखते हुए किसान किराए पर पंपिग सेट ओर बिजली के मोटर पंप का सहारा लेकर सिंचाई कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि ऐसे में उनपर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
जनपद में 680 किलोमीटर की लंबाई में फैली नहरों, सहायक नहरों और माइनरों से करीब एक लाख से ज्यादा किसानों की फसलों के लिए पानी मुहैया कराया जाता है। इन नहरों की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की पांच उपखंडों के अधीन है। रबी की फसलों के लिए पानी की मांग अधिक रहती है। किसानों को समय से पानी मिल जाए इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च कर हर साल नहरों और माइनर की सफाई कराई जाती है। लेकिन अफसरों की उदासीनता के चलते किसानों को समय से पानी नहीं मिल पा रहा है। जनपद में छोटी बढ़ी करीब पचास नहरें, सहायक नहरें और माइनर हैं। जो फिलहाल सूखी हैं। किसानों का कहना है कि रबी की फसलों में प्रमुख गेहूं की फसल है। इस समय फसल बढ़त पर होने के चलते पानी की आवश्यकता अधिक है, लेकिन नहरों में पानी न होने से दिक्कत आ रही है।
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करीब 20 हजार किसानों के लिए सिर्फ नहरें ही सिंचाई का जरिया
जिले में हजारों किसान ऐसे भी हैं जिन्हें फसलों में सिंचाई के लिए सिर्फ नहरों का सहारा है। नवदिया टोंडर, नवदिया घनेश, केसरपुर, लोधीपुर, बराही, कीरतपुर, अर्जुनपुर, लौकाही, अमृतपुर, बिहारीपुर, डगा आदि गांवों में करीब 20 हजार से ज्यादा किसान सिंचाई के लिए सिर्फ नहरों पर ही निर्भर हैं। यहां न खेतों पंपिंग सेट है और न ही बिजली की व्यवस्था। जिले की हरदोई ब्रांच, खीरी ब्रांच, पूरनपुर रजवाह, माधौटांडा रजवाह नहरें व सहायक नहरों से ही करीब 20 हजार किसान फसलों की सिंचाई करते हैं।
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एक एकड़ पर सिंचाई का खर्च आ रहा 14-15 सौ रुपये
किसानों का कहना है कि पंपिंग सेट से सिंचाई करने पर खर्च दोगुना हो जाता है। एक एकड़ पर करीब सात सौ रुपये का डीजल खर्च होता है। इसके अलावा चार सौ रुपये पंपिंग सेट का किराया, 300 रुपये मजदूर के खर्च होते हैं। इस तरह करीब 14-15 सौ रुपये एक एकड़ फसल की सिंचाई पर कम से कम खर्च होते हैं।
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बोले किसान - निजी खर्च से पानी लगाने पर मजबूर
नहरों मे सिंचाई के लिए कभी भी समय से पानी नहीं मिलता। निजी खर्च से पानी लगाने पर मजबूर हैं। नहरों की सफाई भी ठीक से नहीं होती। ऐसे में पानी छोड़ने पर खेतों में सिल्ट भरने लगती है।
- सुखदीप सिंह लाठी
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विभाग की उदासीनता से किसानों को गेहूं की फसल में सिंचाई के लिए नहरों से पानी नहीं मिल पा रहा है। नहरें व माइनरें बंद होने से फसलें खराब हो रही हैं। डीजल से सिंचाई करने से अतिरिक्त खर्चा झेलना पड़ रहा है।
- मंजीत सिंह, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक)
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नहरों में सिल्ट सफाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा।
- मुकेश चंद्रा, सहायक अभियंता, शारदा सागर उपखंड
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जनपद में 680 किलोमीटर की लंबाई में फैली नहरों, सहायक नहरों और माइनरों से करीब एक लाख से ज्यादा किसानों की फसलों के लिए पानी मुहैया कराया जाता है। इन नहरों की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की पांच उपखंडों के अधीन है। रबी की फसलों के लिए पानी की मांग अधिक रहती है। किसानों को समय से पानी मिल जाए इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च कर हर साल नहरों और माइनर की सफाई कराई जाती है। लेकिन अफसरों की उदासीनता के चलते किसानों को समय से पानी नहीं मिल पा रहा है। जनपद में छोटी बढ़ी करीब पचास नहरें, सहायक नहरें और माइनर हैं। जो फिलहाल सूखी हैं। किसानों का कहना है कि रबी की फसलों में प्रमुख गेहूं की फसल है। इस समय फसल बढ़त पर होने के चलते पानी की आवश्यकता अधिक है, लेकिन नहरों में पानी न होने से दिक्कत आ रही है।
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करीब 20 हजार किसानों के लिए सिर्फ नहरें ही सिंचाई का जरिया
जिले में हजारों किसान ऐसे भी हैं जिन्हें फसलों में सिंचाई के लिए सिर्फ नहरों का सहारा है। नवदिया टोंडर, नवदिया घनेश, केसरपुर, लोधीपुर, बराही, कीरतपुर, अर्जुनपुर, लौकाही, अमृतपुर, बिहारीपुर, डगा आदि गांवों में करीब 20 हजार से ज्यादा किसान सिंचाई के लिए सिर्फ नहरों पर ही निर्भर हैं। यहां न खेतों पंपिंग सेट है और न ही बिजली की व्यवस्था। जिले की हरदोई ब्रांच, खीरी ब्रांच, पूरनपुर रजवाह, माधौटांडा रजवाह नहरें व सहायक नहरों से ही करीब 20 हजार किसान फसलों की सिंचाई करते हैं।
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एक एकड़ पर सिंचाई का खर्च आ रहा 14-15 सौ रुपये
किसानों का कहना है कि पंपिंग सेट से सिंचाई करने पर खर्च दोगुना हो जाता है। एक एकड़ पर करीब सात सौ रुपये का डीजल खर्च होता है। इसके अलावा चार सौ रुपये पंपिंग सेट का किराया, 300 रुपये मजदूर के खर्च होते हैं। इस तरह करीब 14-15 सौ रुपये एक एकड़ फसल की सिंचाई पर कम से कम खर्च होते हैं।
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बोले किसान - निजी खर्च से पानी लगाने पर मजबूर
नहरों मे सिंचाई के लिए कभी भी समय से पानी नहीं मिलता। निजी खर्च से पानी लगाने पर मजबूर हैं। नहरों की सफाई भी ठीक से नहीं होती। ऐसे में पानी छोड़ने पर खेतों में सिल्ट भरने लगती है।
- सुखदीप सिंह लाठी
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विभाग की उदासीनता से किसानों को गेहूं की फसल में सिंचाई के लिए नहरों से पानी नहीं मिल पा रहा है। नहरें व माइनरें बंद होने से फसलें खराब हो रही हैं। डीजल से सिंचाई करने से अतिरिक्त खर्चा झेलना पड़ रहा है।
- मंजीत सिंह, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक)
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नहरों में सिल्ट सफाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा।
- मुकेश चंद्रा, सहायक अभियंता, शारदा सागर उपखंड