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हवाई सर्वे की औपचारिकता निभा लौट गए सिंचाई मंत्री

Sat, 12 Aug 2017 06:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो,पीलीभीत
अमर उजाला ब्यूरो,पीलीभीत Updated Sat, 12 Aug 2017 06:06 PM IST
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irrigation minister done aerial survey of flood effected areas
Flood
बाढ़-कटान  पीड़ितों को उम्मीद थी कि सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के आने पर उन्हें कुछ न कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन उनका उड़नखटोला हवाई सर्वे की औपचारिकताएं निभाते हुए वापस चला गया। वहीं बाढ़ खंड के पास शायद बाढ़ नियंत्रण कार्य के लिए धन ही नहीं है। इसी के चलते कटान वाले स्थानों पर बल्ली व झाड़ फानूस डालकर काम चलाया जा रहा है। ट्रांस शारदा क्षेत्र के ग्राम सिद्धनगर की ओर शारदा का रुख हो जाने के बाद से वहां तीव्र गति से हो रहे कटान को रोकने के उपाय एक सप्ताह बाद भी शुरू नहीं किए जा सके हैं। उधर माधोटांडा क्षेत्र में शारदा डैम के सामने बने स्पर के समीप पानी की धार का करंट पूरा दबाव बनाए हुए है। बात पहले माधोटांडा क्षेत्र के गांवों की करते हैं। यहां कुछ स्थानों पर नदी की धार का तेज प्रवाह खतरा पैदा किए हुए है। बाढ़ खंड के तत्कालीन अधिशासी अभियंता मिन्हाज अहमद ने इस स्थिति को भांप कर शारदा डैम के सामने नगरिया खुर्दकलां व ढकिया ताल्लुके महाराजपुर क्षेत्र में नदी पर बने पत्थरों के स्परों को कटने से बचाने के लिए उनकी नोज (स्पर का अगला भाग) पर जियो बैग की एप्रिन बनवाकर मजबूत किया था। साथ ही स्पर नंबर छह के डाउनस्ट्रीम में एक फर्लांग तक सीसी बैग व जियो बैग में रेत भरकर पट्टा बनवाया था। इस कार्य से मामूली राहत तो मिली, लेकिन स्पर नंबर छह की नोज पर पानी की तेज धार आने से रेत से भरे बैग बह गए। सूत्रों के मुताबिक बाढ़ खंड के पास शायद बजट नहीं है। इसी कारण अभियंता मेठ को लगाकर बांस व झाड़ फानूस से काम चला रहे हैं। ऐसे में नदी में बाढ़ न आने के बाद भी कटान का दबाव बना हुआ है। यही हाल रमनगरा बुझिया का है। यहां पानी की धार का प्रवाह तेज तो नहीं है, लेकिन जलस्तर बढ़ने पर डाउनस्ट्रीम में जो कटर पानी में डूब रहे हैं , मजदूर उन्हीं पर रेत से भरे बैग लगा रहे हैं। ऐसे में यदि यहां बाढ़ आती है तो स्थिति बिगड़ सकती है।      
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हजारा। यहां शारदा पहले से ही राणाप्रताप नगर और नहरोसा में कटान कर रही है। कई घर व काफी कृषि भूमि वहां मय लहलहाती फसलों के नदी में समा चुकी है। बाढ़ खंड विभाग ई-टेंडरिंग व्यवस्था हो जाने के चलते वहां पहले तो झाड़ फानूस के माध्यम से कटान रोकने का प्रयास करता रहा, लेकिन अब जीओ बैग के सहारे वहां कच्छप गति से काम शुरू कर बचाव कार्य की औपचारिकता में जुटा है। उधर शारदा द्वारा ग्राम सिद्धनगर में नये सिरे से कटान शुरू कर देने के बाद भी बाढ़ खंड महकमा चेता नहीं है। एक सप्ताह पहले यहां शुरू हुए कटान के चलते एक दर्जन ग्रामीणों की करीब 50 एकड़ कृषि भूमि मय लहलहाती फसलों के नदी में समा चुकी है। बाढ़ खंड महकमे द्वारा यहां अभी किसी तरह का कोई बचाव कार्य शुरू नहीं किया जा सका है, न ही राजस्व विभाग के अधिकारी क्षति का आंकलन लेने पहुंच सके हैं। इधर सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह द्वारा शुक्रवार को किए गए हवाई सर्वे देखने को नदी पर भारी भीड़ जमा रही, लेकिन तीन बजे के बाद उनका हेलीकाप्टर शारदा डैम होता हुआ रमनगरा बुझिया और राणा प्रताप नगर, नहरोसा के ऊपर से निकल गया। जबकि सिद्धनगर क्षेत्र में हो रहे कटान की ओर से उनका उड़न खटोला गुजरा ही नहीं। सभी स्थानों पर बाढ़-कटान पीड़ितों को उम्मीद थी कि सिंचाई मंत्री बाढ़ नियंत्रण कार्य के नाम पर कुछ न कुछ घोषणा जरुर करेंगे, लेकिन कुछ घंटे बाद उन्हें हकीकत पता चली तो उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। चर्चा रही कि प्रदेश सरकार ने अपनी किसी बाढ़ नियंत्रण योजना के लिए बजट ही नहीं दिया है। इसके चलते बांस बल्लियों से काम चलाया जा रहा है। यह बांस बल्लियां कब शारदा की तेज धार को रोकने में कितनी कामयाब होगी? यह आने वाले दिनों में ही पता चल सकेगा। फिलहाल बाढ़-कटान पीड़ितों को सिंचाई मंत्रियों के इस दौरे से निराशा ही हाथ लगी है।
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