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Pilibhit News: नगर पालिका में अनियमितताओं की हो सकती है जांच
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पीलीभीत। नगर पालिका परिषद पीलीभीत में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को याचिकाकर्ता के आठ जून के प्रत्यावेदन पर नियमानुसार विचार कर प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
आदेश हाईकोर्ट की कोर्ट नंबर-1 में न्यायमूर्ति अजीत कुमार व न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने शहर के साहूकारा वार्ड की सभासद पुष्पा उपाध्याय की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए 11 अगस्त को दिया। याचिका में नगर पालिका परिषद पीलीभीत में हुई कथित अनियमितताओं और नियम विरुद्ध कार्यों को लेकर प्रतिवादी संख्या तीन और चार के खिलाफ जांच शुरू कराने के लिए संबंधित अधिकारी को निर्देश देने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इस संबंध में आठ जून को प्रतिवादी संख्या-दो के समक्ष प्रत्यावेदन दिया जा चुका है, लेकिन उस पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि यदि संबंधित अधिकारी को याचिकाकर्ता की शिकायत पर विचार कर कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करने का निर्देश देते हुए याचिका निस्तारित की जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए प्रतिवादी संख्या-दो को निर्देश दिया कि वह आठ जून के प्रत्यावेदन में उठाई गई याचिकाकर्ता की शिकायत पर विचार कर प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने से दो माह के भीतर कानून के अनुसार उचित निर्णय लें।
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सभासद पुष्पा उपाध्याय का कहना है कि उन्होंने याचिका दाखिल की थी, जिस पर न्यायालय कार्रवाई कर रहा है। संवाद
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आदेश हाईकोर्ट की कोर्ट नंबर-1 में न्यायमूर्ति अजीत कुमार व न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने शहर के साहूकारा वार्ड की सभासद पुष्पा उपाध्याय की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए 11 अगस्त को दिया। याचिका में नगर पालिका परिषद पीलीभीत में हुई कथित अनियमितताओं और नियम विरुद्ध कार्यों को लेकर प्रतिवादी संख्या तीन और चार के खिलाफ जांच शुरू कराने के लिए संबंधित अधिकारी को निर्देश देने की मांग की गई थी।
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याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इस संबंध में आठ जून को प्रतिवादी संख्या-दो के समक्ष प्रत्यावेदन दिया जा चुका है, लेकिन उस पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि यदि संबंधित अधिकारी को याचिकाकर्ता की शिकायत पर विचार कर कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करने का निर्देश देते हुए याचिका निस्तारित की जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए प्रतिवादी संख्या-दो को निर्देश दिया कि वह आठ जून के प्रत्यावेदन में उठाई गई याचिकाकर्ता की शिकायत पर विचार कर प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने से दो माह के भीतर कानून के अनुसार उचित निर्णय लें।
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सभासद पुष्पा उपाध्याय का कहना है कि उन्होंने याचिका दाखिल की थी, जिस पर न्यायालय कार्रवाई कर रहा है। संवाद