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विरासत में मिला नशे का कारोबार !
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Fri, 24 Feb 2017 12:04 AM IST
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मासूम बालक का हत्यारोपी नजीम स्मैक का आदी होने के साथ ही इसका व्यापार भी करता था। यह धंधा उसे पिता से विरासत में मिला था। नजीम का परिवार तीन पीढ़ी पहले अमरिया आकर बसा था। उसके दादा महबूब अली 35 साल पहले चठिया गांव छोड़कर अमरिया आए थे। बताते हैं वह स्वयं डोडे का सेवन करते थे। महबूब अली के दो बेटे मुसव्वर अली और तसव्वर भी डोडा बिक्री करने लगे। कुछ दिनों बाद उन्होंने स्मैक का धंधा शुरू कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार मुसव्वर बाहर से चरस लाता था तो इसे बेचने का काम तसव्वर के जिम्मे था। इस दौरान पकड़े जाने के डर से मुसव्वर ने धंधा छोड़ दिया लेकिन तसव्वर बिक्री के साथ ही स्मैक के नशे का भी आदी हो गया। उसने कारोबार नहीं छोड़ा। कुछ समय बाद तसव्वर का बेटा हत्यारोपी नजीम भी स्मैक पीने लगा। जब बाप बेटे दोनों स्मैक पीने लगे तो धंधा बंदी के कगार पर पहुंच गया। इसके बाद दोनों अलीगढ़ जाकर मांस फैक्ट्री में नौकरी करने लगे लेकिन नशेड़ी होने के चलते उन्हें निकाल दिया गया। वापस आने के बाद दोनों ने फिर धंधा शुरू कर दिया था।
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