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डीजल कीमत बढ़ने के बाद ट्रांसपोर्टर ट्रक सरेंडर करने को मजबूर

Sun, 12 Jul 2020 07:37 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2020 07:37 PM IST
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inflation during corona
पीलीभीत। डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते काम न मिलने से परेशान ट्रक मालिकों को अपनी जेब से टैक्स की भरपाई करनी पड़ी तो उन्होंने अपने खाली खड़े ट्रक एआरटीओ दफ्तर में सरेंडर करने का निर्णय ले लिया। अब तक 250 मालिकों ने अपने ट्रक सरेंडर करने के लिए आवेदन किया है।
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कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए देश में लागू 70 दिन के लॉकडाउन से लगभग सभी तरह के कारोबार पर विपरीत असर पड़ा। जब एक जून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनलॉक-1 की घोषणा की तो कारोबारियों को कुछ उम्मीद की किरण जागी। अनलॉक-1 में राहत देते हुए लगभग सभी तरह के प्रतिष्ठान खोलने की अनुमति दे दी गई, मगर ट्रांसपोर्टरों और ट्रक मालिकों की समस्याएं उसके बाद भी कम नहीं हुई। अनलॉक-1 शुरू होते ही ट्रकों का पहिया घूम ही पाया था कि कुछ दिन बाद ही डीजल-पेट्रोल के दाम आसमान छूने लगे। इसके चलते माल भाड़े में 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हो गई। लॉकडाउन में पूरी तरह टूट चुके कारोबारियों ने जब माल भाड़े में बढ़ोतरी की खबर सुनी तो उन्होंने माल मंगाना ही बंद कर दिया। इसके परिणाम स्वरूप ट्रांसपोर्टर व्यवसाय पुन: एक बार फिर बंदी के कगार पर आ पहुंचा। ट्रांसपोर्टर यूनियन के कुछ पदाधिकारियों ने नाम न प्रकाशित करने की गुजारिश पर बताया कि माल भाड़ा बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन पर काफी फर्क पड़ा है।
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इधर, लॉकडाउन के बाद जो थोड़े-बहुत जो ट्रक भी चल रहे थे, डीजल के भाव बढ़ने के बाद उनके पहिए भी थम गए। सरकार की नीति ही ऐसी है कि ट्रक का जो बीमा 700-800 रुपये में हो रहा है, उस पर जीएसटी 27 और 28 हजार रुपये के आसपास लग रही है। एक अन्य ट्रांसपोर्टर के मुताबिक बरसात में डीजल के दाम बढ़ते ही माल भाड़ा बढ़ गया। कारोबार ठप है। सभी कारोबारियों के ट्रक पूरी तरह खाली हैं। काम बंद हैं, फिर भी हमें हर माह अपनी जेब से ही टैक्स की भरपाई करनी पड़ रही है। टायरों के दाम भी बहुत बढ़ गए हैं। ऐसे में अधिकांश ट्रांसपोर्टर ट्रक सरेंडर करना ही बेहतर समझते हैं। परिवहन विभाग के मुताबिक कार्यालय में ट्रक सरेंडरके लिए 250 से अधिक आवेदन आ चुके हैं।
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ट्रक सरेंडर करने के लिए कार्यालय में 250 से अधिक आवेदन आ चुके हैं। इन आवेदनों पर विचार किया जा रहा है। आमतौर पर बरसात के मौसम में ट्रक मालिक अपनी ट्रकों को सरेंडर कर देते हैं। - अमिताभ राय, एआरटीओ
सरकार की नीतियों के चलते ट्रांसपोर्टरों को बहुत नुकसान पहुंचा है। डीजल के पहले ही इतने दाम बढ़ा दिए गए, ऊपर से टैक्स में भी कोई छूट नहीं मिली। ऐसे में वाहन सरेंडर करना ही अच्छा है। - अंकित अग्रवाल, ट्रांसपोर्टर

डीजल के दाम बढ़ने से मालभाड़ा में बढ़ोतरी हुई है। मालभाड़ा बढ़ने से काम भी कम हो गया है। ट्रक खड़ा होने से खर्चा उतना ही होता है। इसलिए ट्रक सरेंडर कर दिए। - रिया सूरी, ट्रांसपोर्टर
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