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एफडी और बीमा करने के नाम पर रुपये हड़पे, दफ्तर में नहीं मिलते जिम्मेदार
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पीलीभीत। पांच वर्ष में रकम दोगुनी करने और कम प्रीमियम पर करोड़ों रुपये की बीमा पॉलिसी बेचने वाली चिट फंड कंपनी के नकटादाना स्थित दफ्तर में पांच दिन से ताला पड़ा है। न अधिकारी मिल रहे हैं न कर्मचारी मिल रहे हैं। निवेशक आते हैं तो ताला देखकर लौट जाते हैं।
नकटादाना में चिटफंड कंपनी का दफ्तर 2011 में खुला था। दस वर्ष में करोड़ों रुपये कमीशन एजेंट बनाकर जमा कराए गए। वित्तीय घोटाले के बड़े मामले में अब तक कोई एफआईआर नहीं हुई है। अलबत्ता शिकायतें कई बार हुईं हैं। अबकी बार उस मकान के मालिक ने शिकायत की है जिनके मकान कार्यालय संचालित है। मकान मालिक डॉ. अनिल कुमार सक्सेना ने बताया कि कंपनी के डायरेक्टर ने किरायेनामा के लिए अनुबंध किया। अनुबंध मार्च 2021 में खत्म हो गया है। अनुबंध खत्म होने के बाद 17 महीने हो गए हैं, जबकि किराया 25 महीने से बकाया है। न दफ्तर खाली हो रहा है न किराया दिया जा रहा है। मकान मालिक ने बताया कि दिन में दस से बीस निवेशक रोजाना आ रहे हैं जो बताते हैं कि उनकी जमा पूंजी हड़प ली गई है। उन्होंने बताया कि वित्तीय अपराध का केस दर्ज करके पुलिस जांच करे तो करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी खुलेगी। इस मामले कंपनी के मालिकों के नाम पते और फोन नंबर मकान मालिक ने लिखकर अपने प्रार्थनापत्र में दिए हैं। मुख्य आरोपी कंपनी के मालिक और उनके सगे भाई हैं। इनके साथ पीलीभीत जिले दो असरदार लोग हैं। अगर इनको पकड़ लिया जाए तो करोड़ों रुपये के घपलेबाजी का पूरा नेटवर्क आम जनता के सामने आएगा।
लाखों की गाड़ियों से चलते हैं डायरेक्टर
आम जनता को मोटी कमाई का सपना दिखाने वाले महंगी गाड़ियों से चलते हैं। लोगों को झांसा देकर रुपये जमा करा लेते हैं। जिले में हजारों लोग ठगे गए हैं। दस वर्ष से ठगी का नेटवर्क संचालित हो रहा है। लोग आते हैं जो बताते हैं कि एफडी मेच्योर होने के बाद भी उन्हें रकम नहीं मिल पाई है।
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एजेंट भी दुखी किससे कहें।
जिन ग्रामीणों से कंपनी ने रुपये जमा कराए हैं उनके और कंपनी के बीच कमीशन एजेंट हैं। एजेंटों को मोटे कमीशन का लालच दिया गया। बेरोजगारी के दौर में तमाम युवक एजेंट बने थे जिन्हें अब निवेशकों से अपनी जान बचाना भारी पड़ रहा है।
निवेशक और मकान मालिक की शिकायत अभी तक मेरे पास नहीं आई है। अगर कोई कंपनी निवेशकों को चूना लगाकर गई है तो जांच के बाद मुकदमा दर्ज होगा।
सुनील दत्त, पुलिस क्षेत्राधिकारी
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नकटादाना में चिटफंड कंपनी का दफ्तर 2011 में खुला था। दस वर्ष में करोड़ों रुपये कमीशन एजेंट बनाकर जमा कराए गए। वित्तीय घोटाले के बड़े मामले में अब तक कोई एफआईआर नहीं हुई है। अलबत्ता शिकायतें कई बार हुईं हैं। अबकी बार उस मकान के मालिक ने शिकायत की है जिनके मकान कार्यालय संचालित है। मकान मालिक डॉ. अनिल कुमार सक्सेना ने बताया कि कंपनी के डायरेक्टर ने किरायेनामा के लिए अनुबंध किया। अनुबंध मार्च 2021 में खत्म हो गया है। अनुबंध खत्म होने के बाद 17 महीने हो गए हैं, जबकि किराया 25 महीने से बकाया है। न दफ्तर खाली हो रहा है न किराया दिया जा रहा है। मकान मालिक ने बताया कि दिन में दस से बीस निवेशक रोजाना आ रहे हैं जो बताते हैं कि उनकी जमा पूंजी हड़प ली गई है। उन्होंने बताया कि वित्तीय अपराध का केस दर्ज करके पुलिस जांच करे तो करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी खुलेगी। इस मामले कंपनी के मालिकों के नाम पते और फोन नंबर मकान मालिक ने लिखकर अपने प्रार्थनापत्र में दिए हैं। मुख्य आरोपी कंपनी के मालिक और उनके सगे भाई हैं। इनके साथ पीलीभीत जिले दो असरदार लोग हैं। अगर इनको पकड़ लिया जाए तो करोड़ों रुपये के घपलेबाजी का पूरा नेटवर्क आम जनता के सामने आएगा।
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लाखों की गाड़ियों से चलते हैं डायरेक्टर
आम जनता को मोटी कमाई का सपना दिखाने वाले महंगी गाड़ियों से चलते हैं। लोगों को झांसा देकर रुपये जमा करा लेते हैं। जिले में हजारों लोग ठगे गए हैं। दस वर्ष से ठगी का नेटवर्क संचालित हो रहा है। लोग आते हैं जो बताते हैं कि एफडी मेच्योर होने के बाद भी उन्हें रकम नहीं मिल पाई है।
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एजेंट भी दुखी किससे कहें।
जिन ग्रामीणों से कंपनी ने रुपये जमा कराए हैं उनके और कंपनी के बीच कमीशन एजेंट हैं। एजेंटों को मोटे कमीशन का लालच दिया गया। बेरोजगारी के दौर में तमाम युवक एजेंट बने थे जिन्हें अब निवेशकों से अपनी जान बचाना भारी पड़ रहा है।
निवेशक और मकान मालिक की शिकायत अभी तक मेरे पास नहीं आई है। अगर कोई कंपनी निवेशकों को चूना लगाकर गई है तो जांच के बाद मुकदमा दर्ज होगा।
सुनील दत्त, पुलिस क्षेत्राधिकारी