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Pilibhit News: जिला अस्पताल में मरीज का स्ट्रेचर खुद ही खींचते तीमारदार
Fri, 06 Jun 2025 01:17 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Fri, 06 Jun 2025 01:17 AM IST
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मरीज का स्ट्रेचर खखुाद ही खींचकर ले जाते तीमारदार। संवाद
पीलीभीत। जिम्मेदार भले ही जिला अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं व संसाधन का दावा करते हैं, लेकिन अस्पताल में छोटे-छोटे संसाधनों की कमी से मरीज रोजाना परेशान हो रहे हैं। अस्पताल में गंभीर मरीजों को गेट से चिकित्सक कक्ष व जांच के लिए ले जाने के लिए स्ट्रेचर व व्हीलचेयर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उनके उपयोग के लिए कर्मचारी भी नहीं हैं। परिजन खुद ही स्ट्रेचर खींचते हैं।
मेडिकल कॉलेज के अधीन होने के तीन साल बाद भी जिला अस्पताल में छोटे-छोटे संसाधनोंं की कमी पूरी नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल में रोजाना 12 से 1400 मरीज पहुंचते हैं। इसमें 100 मरीज रोजाना गंभीर स्थिति में जिला असपताल पहुंचते हैं। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन, सर्जरी विभाग के ज्यादातर मरीज होते हैं। मरीजों को इधर से उधर लाने ले जाने के लिए अस्पताल में सिर्फ एक स्ट्रेचर और दो व्हीलचेयर की व्यवस्था है। ऐसे में मरीजों को असहनीय दर्द में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर खाली होने तक इंतजार करना पड़ता है। मगर अस्पताल प्रबंधन को मरीजों का यह दर्द नहीं नजर आता। यही वजह है कि इन छोटे संसाधनों को बढ़ाने का प्रयास भी नहीं किया जा रहा। बृहस्पतिवार को मरीज को लेकर आए तमाम तीमारदार खुद ही स्ट्रेचर खींचते नजर आए।
कागजों में चकाचक, धरातल पर व्यवस्था शून्य
अस्पताल प्रशासन के अनुसार इमरजेंसी वार्ड में दो व्हील चेयर, दो स्ट्रेचर, सर्जरी वार्ड में छह व्हील चेयर और छह स्ट्रेचर हैं। इसी तरह आर्थों वार्ड में दो स्ट्रेचर और एक व्हीलचेयर है। अन्य वार्डों में भी इसी तरह व्यवस्था है। मगर यह स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नजर नहीं आते। मरीज एक स्ट्रेचर के सहारे से मरीजों को इधर से उधर ले जाते हैं।
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स्ट्रेचर व व्हीलचेयर का भौतिक आंकलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर प्रस्ताव बनाकर प्रधानाचार्य के संज्ञान में लाया जाएगा। मरीजों को लाने ले जाने के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है।
एसपी सिंह, कार्यवाहक सीएमएस
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मेडिकल कॉलेज के अधीन होने के तीन साल बाद भी जिला अस्पताल में छोटे-छोटे संसाधनोंं की कमी पूरी नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल में रोजाना 12 से 1400 मरीज पहुंचते हैं। इसमें 100 मरीज रोजाना गंभीर स्थिति में जिला असपताल पहुंचते हैं। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन, सर्जरी विभाग के ज्यादातर मरीज होते हैं। मरीजों को इधर से उधर लाने ले जाने के लिए अस्पताल में सिर्फ एक स्ट्रेचर और दो व्हीलचेयर की व्यवस्था है। ऐसे में मरीजों को असहनीय दर्द में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर खाली होने तक इंतजार करना पड़ता है। मगर अस्पताल प्रबंधन को मरीजों का यह दर्द नहीं नजर आता। यही वजह है कि इन छोटे संसाधनों को बढ़ाने का प्रयास भी नहीं किया जा रहा। बृहस्पतिवार को मरीज को लेकर आए तमाम तीमारदार खुद ही स्ट्रेचर खींचते नजर आए।
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कागजों में चकाचक, धरातल पर व्यवस्था शून्य
अस्पताल प्रशासन के अनुसार इमरजेंसी वार्ड में दो व्हील चेयर, दो स्ट्रेचर, सर्जरी वार्ड में छह व्हील चेयर और छह स्ट्रेचर हैं। इसी तरह आर्थों वार्ड में दो स्ट्रेचर और एक व्हीलचेयर है। अन्य वार्डों में भी इसी तरह व्यवस्था है। मगर यह स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नजर नहीं आते। मरीज एक स्ट्रेचर के सहारे से मरीजों को इधर से उधर ले जाते हैं।
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स्ट्रेचर व व्हीलचेयर का भौतिक आंकलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर प्रस्ताव बनाकर प्रधानाचार्य के संज्ञान में लाया जाएगा। मरीजों को लाने ले जाने के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है।
एसपी सिंह, कार्यवाहक सीएमएस