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चावल टूटने की परेशानी कैसे हो खत्म, शासन से मांगा सुझाव

Sun, 06 Dec 2020 01:43 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 06 Dec 2020 01:43 AM IST
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How to get rid of the problem of breaking rice, sought suggestions from the government
पीलीभीत। एक तरफ धान खरीद को गति नहीं मिल पा रही, वहीं राइस मिलों से एफसीआई को भेजे जा रहे चावल में टूट-फूट की शिकायतें बढ़ गई हैं। चावल रिजेक्ट करने के साथ ही उतार में भी दिक्कत आ रही है। ऐसे में अधिकारियों को भुगतान फंसने का डर सताने लगा है। मानकों को देखते हुए राहत पाने के लिए खाद्य विपणन विभाग के अधिकारियों ने शासन से मदद मांगी है। आरएफसी के माध्यम से शासन को पत्र लिखा गया है। शासन से सुझाव मिलने के बाद राहत की उम्मीद जताई जा रही है।
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जनपद में एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू हुई थी। अब तक 34 हजार किसानों से 20.88 लाख क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी गई है। करीब साढ़े पंद्रह हजार किसान पंजीकरण के बावजूद अब तक धान लेकर क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच सके हैं। यहां बता दें कि किसानों के धान का भुगतान एफसीआई से चावल का पेमेंट मिलने पर किया जाता है। मगर इस बार चावल के उतार की स्थिति भी बेहतर नहीं बन पा रही। बीते दिनों चावल रिजेक्ट करने पर राइस मिलर और एफसीआई के अधिकारियों के बीच तनातनी हुई थी। इसे किसी तरह अधिकारियों ने ठीक कराया था। मानक के तहत चावल का उतार कराने की बात कह दी गई थी। मगर बीते कई दिनों से अब टूटे चावल की दिक्कत ज्यादा आने लगी है। इसके चलते या तो चावल का उतार नहीं हो पा रहा। वहीं कई लाटें रिजेक्ट भी कर दी गई हैं, जिसका सीधा असर किसानों के भुगतान पर भी पड़ रहा। अधिकारियों को भी आने वाले समय में बड़ी दिक्कत का आभास है।
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बीते साल अब तक चार हजार लाटों का उतार कराया जा चुका था। मगर वर्तमान में एफसीआई के गोदाम पर चावल के उतार की तस्वीर 25 प्रतिशत ही है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक एक हजार लाटों का ही उतार एफसीआई में हो सका है। मानक से अधिक चावल टूटने से एफसीआई चावल लेने से इनकार कर रहा है। इसका समाधान तलाशने के लिए पहले एफसीआई के अधिकारियों से संपर्क साधा गया, मगर कोई परिणाम न निकलने पर अब शासन की मदद ली गई है।
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चावल टूटने की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इसका असर चावल के उतार पर पड़ रहा। फिर किसानों का भुगतान भी बाधित है। हमारे स्तर से समस्या के समाधान के लिए एक पत्र आरएफसी के माध्यम से शासन स्तर पर भेजा गया है। उम्मीद है कि शासन से कोई बेहतर सुझाव मिलेगा।
- डॉ. अविनाश झा, डिप्टी आरएमओ
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