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Pilibhit News: मुस्लिम बहुल शेरपुरकलां में आज भी अनूठे ढंग से मनाई जाती होली
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मुस्लिमों के दरवाजे पर होरियारे जमकर मचाते हैं धमाल, वसूलते हैं फगुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। मुस्लिम बहुल गांव शेरपुर में होली का पर्व अनूठे ढंग से मनाया जाता है। कई मुस्लिम होली पर निकलने वाली धमाल में शामिल होते हैं। धमाल कद्दावर और धनाढ्य मुस्लिमों के दरवाजे पर पहुंचती है। इसमें शामिल लोग उनके दरवाजों पर जमकर धमाल मचाते है। मुस्लिम समाज के लोग धमाल मचाने वालों को फगुआ देते हैं। होली पर यहां कभी विवाद नहीं हुआ।
नगर से चार किलोमीटर दूर शेरपुरकलां मुस्लिम बहुल गांव है। गांव में पहले 30 प्रतिशत से अधिक हिंदू आबादी थी, लेकिन अधिकतर हिंदुओं के परिवार नगर में आकर बस गए। अब नाममात्र के हिंदू परिवार ही गांव में रहते हैं। समय के साथ गांव का माहौल भी बदल गया। मगर गांव में होली का पर्व मनाने की परंपरा आज भी वही है।
होली पर गांव में सौहार्दपूर्ण माहौल रहता है। होली वाले दिन निकलने वाली धमाल में शामिल होकर कई मुस्लिम रंगों का भी आनंद लेते है। धमाल मुस्लिमों के दरवाजों पर भी पहुंचती है। मुस्लिम लोग इसका बुरा नहीं मानते और धमाल मचाने वालों को फगुआ देते है।
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गांव निवासी पूर्व प्रधान के पति हाजी रियाजतनूर खां बताते है कि उनके पिता पूर्व प्रधान शहादतनूर खां के दौर में भी होरियारे होली की धमाल का शुभारंभ उनके घर से ही करते थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। मुस्लिम बहुल गांव शेरपुर में होली का पर्व अनूठे ढंग से मनाया जाता है। कई मुस्लिम होली पर निकलने वाली धमाल में शामिल होते हैं। धमाल कद्दावर और धनाढ्य मुस्लिमों के दरवाजे पर पहुंचती है। इसमें शामिल लोग उनके दरवाजों पर जमकर धमाल मचाते है। मुस्लिम समाज के लोग धमाल मचाने वालों को फगुआ देते हैं। होली पर यहां कभी विवाद नहीं हुआ।
नगर से चार किलोमीटर दूर शेरपुरकलां मुस्लिम बहुल गांव है। गांव में पहले 30 प्रतिशत से अधिक हिंदू आबादी थी, लेकिन अधिकतर हिंदुओं के परिवार नगर में आकर बस गए। अब नाममात्र के हिंदू परिवार ही गांव में रहते हैं। समय के साथ गांव का माहौल भी बदल गया। मगर गांव में होली का पर्व मनाने की परंपरा आज भी वही है।
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होली पर गांव में सौहार्दपूर्ण माहौल रहता है। होली वाले दिन निकलने वाली धमाल में शामिल होकर कई मुस्लिम रंगों का भी आनंद लेते है। धमाल मुस्लिमों के दरवाजों पर भी पहुंचती है। मुस्लिम लोग इसका बुरा नहीं मानते और धमाल मचाने वालों को फगुआ देते है।
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गांव निवासी पूर्व प्रधान के पति हाजी रियाजतनूर खां बताते है कि उनके पिता पूर्व प्रधान शहादतनूर खां के दौर में भी होरियारे होली की धमाल का शुभारंभ उनके घर से ही करते थे।