{"_id":"61293ddb8ebc3e171647cb85","slug":"hindi-divas-pilibhit-news-bly4577190118","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारतीय संस्कृति की आत्मा है हिंदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारतीय संस्कृति की आत्मा है हिंदी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। हिंदी भारतीय संस्कृति की आत्मा है। ये देश की विभिन्न भाषाओं को एक सूत्र में पिरोने के लिए सक्षम है। हम सभी चाहते हैं कि हिंदी का अधिकाधिक विकास हो, लेकिन इसके लिए सार्थक प्रयास जरूरी है। आवश्यकता है कि हम सभी हिंदी के महत्व को समझें और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें। हिंदी हमारी मातृभाषा है और उत्तरी भारत एवं मध्य भारत में अधिक प्रचलन में है। दक्षिण भारत के कुछ प्रदेशों में प्रचलन कम है। राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक स्तर पर हिंदी को हर कोई समझता है। इसलिए सभी को आगे बढ़कर हिंदी को कामकाज की भाषा बनाना होगा। तभी हिंदी का सम्मान और बढ़ेगा।
हिंदी हमारी मातृभाषा है और इससे हम प्रगति की ओर बढ़ सकते हैं। हमें क्षेत्रीय भाषाओं पर किसी प्रकार की टिप्पणी करने की बजाय अपनी मातृभाषा हिंदी को बढ़ावा देना चाहिए जो सभी भाषाओं को मोतियों की तरह माला में पिरोती है। सभी भाषाओं का सम्मान भी रखना है। चाहे वह क्षेत्रीय हो या अंतरराष्ट्रीय। हिंदी को बढ़ाना हम सबका फर्ज है। - सर्वेश गंगवार प्रवक्ता
हिंदी हमारे बोलचाल का माध्यम ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति की पहचान, अस्मिता और एकता के सूत्र के लिए जानी जाती है। हिंदी भाषा हमारी आत्मा में रची-बसी है। आजादी के आंदोलन को एकता में पिरोने में हिंदी भाषा ही महत्वपूर्ण थी। पूरे विश्व में हिंदी भाषा का डंका है। चीनी भाषा के बाद दूसरे स्थान पर विश्व में हिंदी है। मातृभाषा के बिना उन्नति की कल्पना नहीं की जा सकती।- नीतू सिंह शिक्षिका
विज्ञापन
हिंदी हमारे देश की आत्मा है। आत्मा से विमुख होकर कोई भी इंसान संपूर्ण विकास नहीं कर सकता। हिंदी भाषा को बढ़ावा देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हमारा अध्यापक वर्ग निभा सकता है। अत: अध्यापकों के प्रति अपना सकारात्मक रवैया रखें। हिंदी भाषा पर समय-समय पर प्रतियोगिताएं करवाई जाएं। आने वाले बच्चों को अपनी संस्कृति और हिंदी भाषा एक बेहतर ज्ञान हो।- रविता सिंह शिक्षिका
विज्ञापन
हिंदी हमारी मातृभाषा है और इससे हम प्रगति की ओर बढ़ सकते हैं। हमें क्षेत्रीय भाषाओं पर किसी प्रकार की टिप्पणी करने की बजाय अपनी मातृभाषा हिंदी को बढ़ावा देना चाहिए जो सभी भाषाओं को मोतियों की तरह माला में पिरोती है। सभी भाषाओं का सम्मान भी रखना है। चाहे वह क्षेत्रीय हो या अंतरराष्ट्रीय। हिंदी को बढ़ाना हम सबका फर्ज है। - सर्वेश गंगवार प्रवक्ता
विज्ञापन
हिंदी हमारे बोलचाल का माध्यम ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति की पहचान, अस्मिता और एकता के सूत्र के लिए जानी जाती है। हिंदी भाषा हमारी आत्मा में रची-बसी है। आजादी के आंदोलन को एकता में पिरोने में हिंदी भाषा ही महत्वपूर्ण थी। पूरे विश्व में हिंदी भाषा का डंका है। चीनी भाषा के बाद दूसरे स्थान पर विश्व में हिंदी है। मातृभाषा के बिना उन्नति की कल्पना नहीं की जा सकती।- नीतू सिंह शिक्षिका
विज्ञापन
हिंदी हमारे देश की आत्मा है। आत्मा से विमुख होकर कोई भी इंसान संपूर्ण विकास नहीं कर सकता। हिंदी भाषा को बढ़ावा देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हमारा अध्यापक वर्ग निभा सकता है। अत: अध्यापकों के प्रति अपना सकारात्मक रवैया रखें। हिंदी भाषा पर समय-समय पर प्रतियोगिताएं करवाई जाएं। आने वाले बच्चों को अपनी संस्कृति और हिंदी भाषा एक बेहतर ज्ञान हो।- रविता सिंह शिक्षिका