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Pilibhit News: सरकारी कवायद नाकाफी, जिले में फाइलेरिया के 824 मामले
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पीलीभीत। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी जिले में फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर बीमारी खत्म नहीं हो पा रही है। अब तक मंडल में केवल बदायूं जिला ही ऐसा है जो फाइलेरिया से मुक्त हो पाया है। प्रदेश के जिन 56 जिलों में फाइलेरिया के मरीज मिल रहे हैं, उनमें पीलीभीत का भी नाम है। बीते साल ही जिले में फाइलेरिया के नौ मामले मिले हैं। जिसके साथ जिले में फाइलेरिया के मामलों की संख्या 824 हो गई है। शासन के निर्देश पर इस बीमारी को रोकने के लिए अब जिले में 1825 टीमें लगाई गई हैं। टीम डोर-टू-डोर जाकर लोगों को दवाएं खिला रही हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर गंदे पानी में पैदा होता है। इस संक्रामक बीमारी में धागे जैसे कीटाणु होते हैं। खास बात यह है कि मच्छर के काटने के 10 से 15 साल बाद इस बीमारी का असर देखा जाता है। मरीज के हाथ, पैर, स्तन, अंडकोष में सूजन, पेशाब में सफेद रंग के द्रव्य का रिसाव, लंबे समय से सूखी खांसी आने जैसे लक्षण सामने आते हैं। खास बात यह है कि एक बार होने के बाद यह बीमारी खत्म नहीं होती।
जनपद में भी पिछले कई सालों से फाइलेरिया पैर पसारे हुए है। सबसे ज्यादा मामले सन 2017 में 110 व 2018 में 119 सामने आए थे। हालांकि इसके बाद संख्या काफी कम हुई लेकिन अब तक यह बीमारी खत्म नहीं हो सकी है। बीमारी की रोकथाम के लिए 10 फरवरी से 27 फरवरी तक अभियान चलाया जाएगा। जिसकी योजना बनाई जा रही है।
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1825 टीमें घर-घर दस्तक देकर खिलाएंगी खुराक
जनपद में फाइलेरिया की रोकथाम के लिए 1825 टीमों को लगाया गया है। एक टीम में दो सदस्यों को शामिल किया गया है। एक सुपरवाइजर पर छह टीमों की जिम्मेदारी दी गई है। एक टीम दिन में 25 घरों में पहुंचकर प्रत्येक सदस्य को आयु वर्ग के अनुसार खुराक खिलाएंगी। अभियान की निगरानी के लिए मुख्यालय की टीमों को लगाया गया है।
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किस आयु वर्ग को कितनी खुराक
आयु वर्ग खुराक डीईसी एल्बेंडाजोल
0 से दो वर्ष शून्य शून्य
दो से 5 वर्ष एक गोली एक गोली
6 से 14 वर्ष दो गोली एक गोली
15 वर्ष से अधिक 3 गोली एक गोली
अब तक मिले मरीज
वर्ष मरीज
2012 27
2013 23
2014 48
2015 40
2016 72
2017 110
2018 119
2019 74
2020 26
2021 20
2022 09
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फाइलेरिया के जनपद में लगातार मामले मिल रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए 10 फरवरी से अभियान चलाया जाएगा। टीम को 93 लाख डीईसी गोलियां और 22 लाख एल्बेंडाजोल की गोलियां उपलब्ध कराई गईं हैं।
- डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ
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चिकित्सकों का कहना है कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर गंदे पानी में पैदा होता है। इस संक्रामक बीमारी में धागे जैसे कीटाणु होते हैं। खास बात यह है कि मच्छर के काटने के 10 से 15 साल बाद इस बीमारी का असर देखा जाता है। मरीज के हाथ, पैर, स्तन, अंडकोष में सूजन, पेशाब में सफेद रंग के द्रव्य का रिसाव, लंबे समय से सूखी खांसी आने जैसे लक्षण सामने आते हैं। खास बात यह है कि एक बार होने के बाद यह बीमारी खत्म नहीं होती।
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जनपद में भी पिछले कई सालों से फाइलेरिया पैर पसारे हुए है। सबसे ज्यादा मामले सन 2017 में 110 व 2018 में 119 सामने आए थे। हालांकि इसके बाद संख्या काफी कम हुई लेकिन अब तक यह बीमारी खत्म नहीं हो सकी है। बीमारी की रोकथाम के लिए 10 फरवरी से 27 फरवरी तक अभियान चलाया जाएगा। जिसकी योजना बनाई जा रही है।
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1825 टीमें घर-घर दस्तक देकर खिलाएंगी खुराक
जनपद में फाइलेरिया की रोकथाम के लिए 1825 टीमों को लगाया गया है। एक टीम में दो सदस्यों को शामिल किया गया है। एक सुपरवाइजर पर छह टीमों की जिम्मेदारी दी गई है। एक टीम दिन में 25 घरों में पहुंचकर प्रत्येक सदस्य को आयु वर्ग के अनुसार खुराक खिलाएंगी। अभियान की निगरानी के लिए मुख्यालय की टीमों को लगाया गया है।
000
किस आयु वर्ग को कितनी खुराक
आयु वर्ग खुराक डीईसी एल्बेंडाजोल
0 से दो वर्ष शून्य शून्य
दो से 5 वर्ष एक गोली एक गोली
6 से 14 वर्ष दो गोली एक गोली
15 वर्ष से अधिक 3 गोली एक गोली
अब तक मिले मरीज
वर्ष मरीज
2012 27
2013 23
2014 48
2015 40
2016 72
2017 110
2018 119
2019 74
2020 26
2021 20
2022 09
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फाइलेरिया के जनपद में लगातार मामले मिल रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए 10 फरवरी से अभियान चलाया जाएगा। टीम को 93 लाख डीईसी गोलियां और 22 लाख एल्बेंडाजोल की गोलियां उपलब्ध कराई गईं हैं।
- डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ