फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Health

कोरोना काल में 1951 अतिकुपोषित बच्चों की देखभाल भूल गए जिम्मेदार

Fri, 21 May 2021 12:11 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 21 May 2021 12:11 AM IST
विज्ञापन
Health
पीलीभीत। ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में बच्चों के लिए अधिक नुकसानदायक होगी। स्वस्थ बच्चों की तो बात ही छोड़िए जनपद के 1951 अतिकुपोषित बच्चों को जिम्मेदारों ने उनके हाल पर छोड़ दिया है। कुपोषित बच्चों को पोषक आहार मुहैया नहीं हो पा रहा। साथ ही पोषण पुनर्वास केंद्र के सारे बेड भी खाली पड़े हैं। ऐसे में कुपोषित बच्चों पर ध्यान नहीं दिया गया तो उन पर खतरा मंडरा सकता है।
विज्ञापन

प्रशासन के 2020-21 के आंकड़ों के मुताबिक जनपद भर में 14248 कुपोषित बच्चे हैं। इनमें 1951 बच्चे अतिकुपोषित है। इनकी उम्र शून्य से लेकर छह साल के बीच है। कुपोषित और अतिकुपोषित मिलने वाले अधिकांश बच्चें गरीब परिवारों से हैं। भरण पोषण के लिए अतिकुपोषित बच्चों को जिला पोषण पुनर्वास केंद्र और एसएनसीयू में भर्ती करने की जिम्मेदारी जिला बाल विकास पुष्टाहार विभाग को दी गई है। आशा और आंगनबाड़ी के माध्यम से इन्हें भर्ती करने से लेकर पोषाहार वितरण कराया जाता है, मगर कोरोना के पीक पर पहुंचने के बाद यह योजना ठप पड़ गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कोरोना की तीसरी लहर का हमला बच्चों पर होने की आशंका जाहिर कर रहे हैं। कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों पर इसका असर होने के आसार जताए हैं। फिर भी स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन ने कोई तैयारी नहीं की है। पिछले माह अप्रैल में जिला पोषण पुनर्वास केंद्र में 14 बच्चे भर्ती किए गए थे, लेकिन कोरोना के चलते 25 अप्रैल को सभी की छुट्टी कर दी गई। टेलीमेडिसिन से निगरानी का दावा किया जा रहा। आशा और आंगनबाड़ी को कोरोना मरीजों के सर्वे में लगा दिया है, ऐसे में इन बच्चों तक सरकार के द्वारा मिलने वाला पोषाहार नहीं पहुंच रहा। बच्चों का हाल जानने के लिए भी कोई नहीं पहुुंच रहा। (संवाद)
विज्ञापन

खुद कर लो फोन, तो टेलीमेडिसिन वाले दे रहे जानकारी
कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को टेलीमेडिसन के माध्यम से इलाज और जानकारी देने का दावा किया जा रहा है, दरअसल टेलीमेडिसिन चालू तो किया गया है, लेकिन बच्चों का फॉलोअप नहीं किया जाता है, अगर कोई पारिवारिक सदस्य जागरूकता दिखते हुए स्वयं ही फोन कर कुछ पूछे लें, तो जानकारी मिल जाती है, वरना विभाग के द्वारा यहां इलाज कराकर गए बच्चों की कोई निगरानी नहीं की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अभी तक नहीं हो सकी तैयारियां
तीसरी लहर को देखते हुए तैयारी के निर्देश शासन से मिले थे। इस पर जिले में एसएनसीयू वार्ड में दस बेड का कोविड अस्पताल बनाया जाना है। मगर अभी तक इसे गति नहीं मिल सकी है। अगर समय रहते कोई तैयारी नहीं की गई, तो समस्या बढ़ सकती है।
तीसरी लहर को लेकर अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई है। कुपोषित बच्चों को पोषाहार मिलने में अगर कोई दिक्कत आ रही है, तो इसे गंभीरता से दिखवाएंगे। यह बात सही है कि अभी कुपोषित बच्चों पर ध्यान दिया तो आगे लाभ मिलेगा। इसे लेकर जल्द बैठक भी कराएंगे। - पुलकित खरे, डीएम

कोरोना काल में कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों का ध्यान रखा जा रहा है। आरबीएसके टीम के साथ आशा आंगनबाड़ी को भी उनकी निगरानी में लगाया गया है। टेलीमेडिसिन प्रोग्राम भी चल रहा है। अगर स्थिति गंभीर है, तो बच्चे को पुनर्वास केंद्र में भर्ती भी कराया जाएगा। तीसरी लहर को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed